सात माह पहले अमित शाह ने बिरसा मुंडा के वंशजों के आवास के लिए किया भूमि पूजन, नहीं लगी एक भी ईंट, पोस्टर निहार रहे परिजन

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 04/17/2018 - 11:54

Akshay Kr Jha/Pravin Kumar

Khunti/Ranchi: 17 सिंतबर 2017 को रांची से लेकर खूंटी के उलिहातु तक ऐसा लग रहा था कि कोई उत्सव मनाया जा रहा हो. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के गांव उलिहातु जा रहे थे. वहां पहुंचते ही उन्होंने शहीद ग्राम विकास अंतर्गत आवास योजना का भूमि पूजन भगवान बिरसा मुंडा के आंगन में किया था. कल्याण विभाग की तरफ से इस योजना के मुताबिक उलिहातु में 136 आवास बनने थे. इन आवासों को गांव वालों के बीच बांटना था. लेकिन सात महीना बीतने को है और अभी तक विभाग एक ईंट भी उलिहातु में नहीं जोड़ पाया है. जैसा नजारा 17 सितंबर 2017 को था, वैसा ही नजारा आज भी है. भगवान बिरसा मुंडा के पोते सुखराम के पास अब सिर्फ उस दिन लगे पुराने पोस्टर बचे हैं. जिन्हें वो रोज निहारा करते हैं.

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सरकार हमें घर के बदले कबूतर खाना दे रही है

सरकार की योजना के मुताबिक कल्याण विभाग की तरफ से झारखंड में आठ शहीदों के गांव के लिए शहीदों के नाम पर आवास योजना की शुरुआत की गयी. जिसमें सबसे पहला नाम उलिहातु का है. योजना की शुरुआत बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उलिहातु से की. दरअसल योजना के मुताबिक 8*9 फीट के दो कमरे, 6*6.6 फीट का एक किचन, 7*6.6 फीट का एक बरामदा, 4*4 का बाथरुम और 4*3 फीट की WC (Water Closet) यानी ट्वायलेट वाला एक मॉडल मकान बना कर दिया जाना था. लेकिन गांव वालों ने इस मॉडल का विरोध किया. उनका कहना है कि इतने छोटे-छोटे मकान कबूतर खाने की तरह हैं. उन्हें चार कमरे का 15*12 फीट कमरे वाला मकान चाहिए.

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योजना के मुताबिक बनने वाले आवास का नक्शा

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कहां फंसा है पेच

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जो मकान बना कर दिया जाता है, उसपर सरकार का खर्च 1.30 लाख आता है. सरकार ने शहीदों के लिए इस खर्च को बढ़ा कर 2.63 लाख कर दिया. जिसके तहत मॉडल मकान बना कर शहीदों के गांव वालों को दिया जाना था. उलिहातु में जिस मकान की डिमांड शहीद के गांव वाले कर रहे हैं, प्रशासन उसपर लागत करीब 17 लाख रुपए बता रहा है. जबकि न्यूज विंग ने कुछ इंजीनियरों से बात की तो खर्च मॉडल मकान का ज्यादा-से-ज्यादा तीन गुना होने का अनुमान लगाया गया. ऐसे में सरकार पसोपेश में फंसी है कि आखिर किया क्या जाए.

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आवास को लेकर क्या कहते हैं बिरसा मुंडा के पोते सुखराम देखें वीडियो

भगवान बिरसा मुंडा के पोते ने की केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकत

मकान के मॉडल को लेकर जिला प्रशासन और गांव वालों के बीच मौखिक रूप से कई बार बात हो चुकी है. गांववालों ने बिरसा मुंडा के पोते सुखराम की अगुआई में जिला प्रशासन से दो बार पत्राचार भी किया है. इधर दो हफ्ते पहले गांव वालों के साथ जिला प्रशासन ने ग्राम सभा भी की. लेकिन उस ग्राम सभा में कोई नतीजा निकल कर सामने नहीं आया. जिला प्रशासन से बात नहीं बनते देख, भगवान बिरसा के पोते सुखराम मुंडा ने दिल्ली का रुख किया. वो अपनी दोनों बेटियों के साथ दिल्ली गए. वहां उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की. राजनाथ सिंह ने सुखराम को भरोसा दिलाया कि उनकी मांग पूरी की जाएगी. सुखराम से उन्होंने कहा कि वे सीएम रघुवर दास से इस मामले बात करेंगे. इसी आश्वासन के साथ वो दिल्ली से लौट आए. लेकिन विभागीय स्तर पर फिलहाल किसी तरह की कोई पहल उनकी मांग को लेकर होता नहीं दिख रहा है.           

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बीच का रास्ता क्या निकलना चाहती है सरकार

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आवास योजना का पोस्टर

सरकार को उलिहातु शहीद ग्राम योजना के तहत 136 मकान बनाने हैं. अगर सरकार गांववालों की बात मानती है, तो सरकार पर करोड़ों का खर्च आएगासाथ ही दूसरे शहीद ग्राम के लोग भी इस मांग को दोहरा सकते हैं. ऐसे में सरकार बीच का रास्ता चाह रही है. उलिहातु में भगवान बिरसा मुंडा के 16 परिजन हैं, सरकार कुछ ऐसा करना चाहती है जिससे इन 16 परिजनों को खुश किया जा सके. इन 16 परिजनों के लिए सरकार दूसरा मॉडल मकान तैयार करने की सोच रही है. 

किसी भी योजना में एकरूपता दिखनी चाहिएः लुईस मरांडी, कल्याण मंत्री 

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लुईस मरांडी, विभागीय मंत्री

आदिवासी फ्रिडम फाइटरों के लिए पहली बार देश के झारखंड में यह योजना लायी गयी. योजना किसी एक शहीद के गांव के लिए नहीं बल्कि आठ शहादों के गांवों के लिए है. योजना में एकरूपता दिखना काफी जरूरी है. भारत सरकार की तरफ से योजना की काफी तारीफ भी की गयी है. सरकार इसपर गंभीरता से सोच रही है. जैसा निर्देश आएगा उसे माना जाएगा. यह योजना काफी सकारात्मक योजना है, इसमें सभी का साथ मिलना चाहिए.

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