SBI घटा सकती है खातों में न्यूनतम राशि की सीमा, मिनिमम बैलेंस बढ़ाने के बाद हो रही थी किरकिरी

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 01/05/2018 - 19:00

Mumbai : बचत खातों में मासिक औसत न्यूनतम राशि नहीं रखने पर ग्राहकों से जुर्माने के तौर पर 1,771 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने पर चौतरफा कड़ी आलोचना झेल रहे भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने आज कहा कि वह न्यूनतम राशि और जुर्माना राशि को फिर से तय करने का विचार कर रहा है. देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने अप्रैल 2017 में मासिक औसत न्यूनतम राशि (एमएबी) शुल्कों को संशोधित किया था. यह उसने पांच साल के अंतराल के बाद किया था. उसने मेट्रो शहरों के खाते में एमएबी को 5,000 रुपये और ग्रामीण इलाकों में 1,000 रुपये रखा था. इससे कम राशि पर जुर्माना लगाया था.

निमम बैलेंस नॉन मेंटेंनेस के लिए जुर्माना वसूल कमाये 1,771 करोड़

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 40.2 करोड़ बचत खाता धारकों वाले इस बैंक ने इस मद में अप्रैल 2017 से नवंबर 2017 के बीच एमएबी पर जुर्माने के तौर पर 1,771.67 करोड़ रुपये का लाभ कमाया. यह उसके दूसरी तिमाही के लाभ से भी ज्यादा है. खुदरा एवं डिजिटल बैंकिंग के लिए बैंक के प्रबंध निदेशक पी. के. गुप्ता ने आज यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘एमएबी को अप्रैल में लागू करने के बाद से हम इसकी लगातार समीक्षा करते रहते हैं और अक्तूबर में हमने इसे कुछ कम भी किया था. अब हम दोबारा इसकी समीक्षा कर रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि प्राप्त हुई प्रतिक्रियाओं के आधार पर एमएबी और उस पर जुर्माने की हम समग्र समीक्षा कर रहे हैं. जल्द ही संशोधनों की घोषणा की जाएगी. मौजूदा समय में मेट्रो और शहरी इलाकों में बचत खातों के लिए एमएबी 3,000 रुपये है जिसके ना रखने पर जुर्माना 30 से 50 रुपये और कर अलग से है. इसी प्रकार अर्द्धशहरी इलाकों में एमएबी 2,000 रुपये और ग्रामीण क्षेत्र में 1,000 रुपये है. इसके ना रखने पर जुर्माना 20 से 40 रुपये और कर अलग से है.

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खाते में न्यूनतम शेष न रखने पर एसबीआई ने ग्राहकों से वसूला 1,772 करोड़ रुपये का जुर्माना

उल्लेखनीय है कि देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को 1,771.67 करोड़ रुपये का अप्रत्याशित लाभ हुआ है. यह उसके दूसरे तिमाही के मुनाफे से भी अधिक है. वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार एसबीआई चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों अप्रैल-नवंबर के दौरान ग्राहकों द्वारा अपने बचत खातों में मासिक आधार पर औसतन न्यूनतम शेष या बैलेंस नहीं रखने पर यह राशि जुर्माने के रूप में वसूली है.

एसबीआई के बचत खाताधारकों की संख्या 40.5 करोड़ है. एसबीआई ने करीब छह साल बाद 1 अप्रैल, 2017 से मासिक औसत शेष (एमएबी) शुल्क को फिर से लागू किया है. बैंक ने बयान में कहा, ‘‘महानगरों में औसत 3,000 रुपये के बैलेंस पर एसबीआई को मासिक छह रुपये मिलते हैं. वहीं ग्रामीण इलाकों में 1,000 रुपये के न्यूनतम शेष पर बैंक को सिर्फ दो रुपये प्राप्त होते हैं. बैंक द्वारा दी जाने वाली सेवाओं को देखते हुए यह राशि काफी कम है. इन सेवाओं में मुफ्त चेकबुक, एटीएम से आठ मुफ्त लेनदेन और मुफ्त शाखा लेनदेन शामिल हैं.

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छवि की क्षति को पाटने की कोशिश

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि बैंक ने अप्रैल से नवंबर के दौरान अपने ग्राहकों द्वारा खातों में निर्धारित न्यूनतम राशि नहीं रखने पर 1,771.67 करोड़ रुपये वसूले. एक अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाता पंजाब नेशनल बैंक :पीएनबी: खातों में न्यूनतम राशि नहीं रखने पर सिर्फ 97.34 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला है. जिन अन्य बैंकों ने ग्राहकों से 50 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला है उनमें सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, केनरा बैंक, आईडीबीआई बैंक और इंडियन बैंक शामिल हैं. उल्लेखनीय है कि एसबीआई का जुलाई-सितंबर तिमाही का शुद्ध लाभ 1,581.55 करोड़ रुपये रहा है जो उसके द्वारा वसूले गए जुर्माने से कम है. इस तरह चौतरफा आलोचना के हुई छवि क्षति को पाटने के लिए बैंक न्यूनतम शेष की राशि कम कर सकती है. 

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