गरीबों से जुर्माना लेकर अमीर बन रहा एसबीआई

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 01/02/2018 - 14:41

New Delhi : वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ( एसबीआई) ने न्यूनतम शेष बैंक खातों से साल 2017 में अप्रैल से नवंबर के दौरान लगभग 1771 करोड़ रुपये चार्ज वसूली से जुटाये. ये वैसे लोगों के खाते थे जो न्यूनतम मासिक औसत शेष (मिनिमम बैलेंस) नहीं रखते थे. यह राशि बैंक के जुलाई-सितंबर तिमाही के 1581.55 करोड़ रुपये के लाभ और अप्रैल-सितंबर के कुल लाभ 3586 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है. एसबीआई ने वित्तीय वर्ष 2016-17 में मिनिमम अकाउंट बैलेंस के रखरखाव के लिए लगने वाले पैसे नहीं लिये थे. वहीं चालू वित्त वर्ष के दौरान पांच साल के अंतराल के बाद इसे फिर से शुरू किया गया था. 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने  विभिन्न बैंकों द्वारा मिनिमम अकाउंट बैलेंस नहीं मेनटेन करनेवाले ग्राहकों से चार्ज वसूली पर रिपोर्ट प्रकाशित की है.  

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जनधन योजना के खातों पर भी वसूले गये नॉन मेंटेनेंस चार्ज

गौरतलब है कि बैंक के कुल 42 करोड़ बचत बैंक खाते हैं. जिसमें 13 करोड़ मूल बचत बैंक जमा खाता और प्रधानमंत्री जन-धन योजना खाते शामिल हैं. दोनों ही तरह के खातों को ऐसे शुल्कों की लेवी से छूट दी गयी है. एसबीआई के बाद पंजाब नेशनल बैंक ने अप्रैल-नवंबर के दौरान ग्राहकों पर चार्ज कर इस तरह 97.34 करोड़ रुपये जुटाये. इसके बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 68.67 करोड़ रुपये और केनरा बैंक ने 62.16 करोड़ रुपये इसी तरह के चार्जेज वसूल कर कमाये. 

प्राइवेट बैंकों ने भी वसूले मिनिमम बैलेंस से कम होने पर चार्ज

प्राइवेट बैकों समेत अधिकांश बैंक मिनिमम अकाउंट बैलेंस के लिए एक मिनिमम राशि निर्धारित करते हैं. खाते में उससे कम राशि होने पर ग्राहकों से शुल्क वसूलते हैं. एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक समेत अन्य निजी बैंकों ने मिनिमम अकाउंट बैलेंस के रखरखाव के लिए लोगों से कितने पैसे चार्ज के रूप में वसूले, इसका आंकडा तुरंत नहीं मिल पाया.

आंकड़े

उल्लेखनीय है कि एसबीआई ने 01 अप्रैल 2017 से बचत बैंक खातों में मासिक औसत शेष राशि को बनाए रखने में नाकाम रहने के लिए विभिन्न लेनदेन पर सेवा शुल्क संशोधित किया है, जिसमें नकद जमा भी शामिल है. इस तरह के शुल्क को सितंबर महीने से कम कर दिया गया था जब एसबीआई ने मेट्रो शहरों में मिनिमम अकाउंट बैलेंस 5000 रुपये से 3000 रुपये कर दिया था.  बैंक ने सरकारी सामाजिक लाभों के पेंशनभोगियों, लाभार्थियों को छूट दी है. 01 अक्टूबर से नाबालिगों के खातों को छूट दी गई है. यह छूट मूल बचत बैंक जमा खातों (बीएसबीडी) के ग्राहकों के अतिरिक्त था.

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एसबीआई ने निर्धारित की थी मिनिमम बैलेंस 5000 रुपये

अप्रैल और सितंबर के बीच, एसबीआई ने मेट्रो, शहरी और ग्रामीण केंद्रों में मिनिमम अकाउंट बैलेंस में विफलता के लिए सर्विस चार्ज लगाया. मेट्रो केंद्रों के लिए, 5000 रुपये की शेष राशि से 50 फीसदी कम होने पर 50 रुपये, 50 से 75 फीसदी तक कम होने पर 75 रुपये, और मिनिमम बैलेंस 75 फीसदी से अधिक कम होने पर 100 रुपये चार्ज के रूप में निर्धारित कर वसूले गये. 

शहरी केंद्रों के मामले में, 3000 रुपये एमएबी (मिनिमम अकाउंट बैलेंस) से कम होने पर 40 रुपये सेवा शुल्क वसूले जाने थे. 50-75 फीसदी की कमी के लिए 60 रुपये और 75 फीसदी से अधिक कम होने पर 80 रुपये  चार्ज निर्धारित किये गये थे. एमएबी के रखरखाव नहीं करने के एवज में चार्ज वसूली के अलावा, एसबीआई ने कार्ड की श्रेणी के आधार पर डेबिट कार्ड के लिए 125-300 रूपये का वार्षिक रखरखाव शुल्क लिया. 25 सितंबर को एसबीआई ने सभी आबादी समूहों और श्रेणियों में एमएबी के रखरखाव के लिए शुल्क में 20% से 50% तक की कमी के लिए संशोधन की घोषणा की.

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