10 लाख का सालाना पैकेज छोड़ रिशु प्रिया ने पास की UPSC की परीक्षा, मिला 446वां रैंक

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 05/03/2018 - 18:28

Ranchi : सपनों को परवाज यूं ही नहीं मिलते, इसके लिए जीतोड़ मेहनत के साथ त्याग, लगन और ऊंचे मनोबल की जरूरत होती है. रांची की एक होनहार बेटी रिशु  प्रिया को यूपीएससी के दूसरे प्रयास में ही सफलता मिली है. उन्हें 446वां  रैंक मिला है. रिशु  अपने इस सपने को पूरा करने के लिए 10 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़कर घर में बिना बताए तैयारी कर ये सफलता हासिल की है. 27 अप्रैल को रिजल्ट आने के बाद अपने माता पिता को ये बात बताकर सरप्राइज्ड कर दिया. अपनी बेटी की इस सफलता पर पिता राजेन्द्र वर्मा और माता कमला वर्मा काफी उत्साहित हैं. रिशु  प्रिया डीएवी श्यामली और बीआईटी सिंदरी से पढ़ाई करने के बाद जेनरल मोटर्स में कार्यरत थीं.

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दोस्तों को देती है अपनी सफलता का श्रेय
रिशु अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता पिता के साथसाथ अपने दोस्तों को देती हैं. अलाजू प्रियंका, अर्चना झा, राहुल और गुलशन ने इनको इस मुकाम तक पहुंचने में काफी सहयोग किया. रिशु  ने बैंगलोर में होम लोन लेकर घर खरीदा है, तैयारी करने के लिए जॉब छोड़ने के दौरान  के इएमआई भरने का जिम्मा दोस्तों ने ले लिया. इस वजह से रिशु अपनी पढ़ाई बिना किसी बोझ के कर पाने में सफल रहीं

गोपा कुमार के केरला समाजम ने तैयारी में की मदद
रिशु ने यूपीएससी की तैयारी बैंगलोर में रहकर ही की, बैंगलोर के ही आईआरएस सर्विस में कार्यरत गोपा कुमार के गाईडेंस में उनके दवारा चलाए जा रहे केरला समाजम से की है. केरला समाजम सप्ताह में एक दिन तैयारी कर रहे छात्रों को गाईड करता है. रिशु जून महीने के मध्य तक ट्रेनिंग में चली जाएंगी.



पिता हैं मेकॉन के रिटायर्ड पीआरओ, मां जेवीएम में शिक्षिका
रिशु  के पिता राजेन्द्र वर्मा मेकॉन में पीआरओ के पद पर से रिटायर हुए हैं, वहीं माता कमला वर्मा जवाहर विद्या मंदिर श्यामली में शिक्षिका हैं. दोनों ने बताया कि 27 को इसने फोन कर बताया कि मेरा परीक्षा का रिजल्ट क्लीयर हो गया है. हम बता नहीं सकते हम कितने खुश थे. ये थोड़ी दुखी थी रैंक को लेकर फिर मां ने समझाया कि जो है वो बेहतर है. बाद में जो मिलेगा वो भी बेहतर होगा तब ये थोड़ी नॉर्मल हुई हैं.

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रिशु ने न्यूज विंग के साथ अपने अनुभव भी साझा किए. पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश-

सवाल: आपने पहली बार में ही यूपीएससी की परीक्षा पास की है, इसके लिए आपको बधाई. आपका रैंक क्या आया है ?
जवाब: धन्यवाद, पर मैने ये दूसरी बार परीक्षा दी थी, इससे पहले मैंने यूं ही बिना तैयारी के एग्जाम दिया था, जिसके बाद मैने पूरी प्रतिबद्धता के साथ तैयारी की. इस बार मुझे 446वां रैंक मिला है.
सवाल: अपने एजुकेशन के बारे में बताएं.
जवाबः  मैने अपनी पूरी पढ़ाई नर्सरी से लेकर बारहवीं तक डीएवी श्यामली से की है. उसके बाद मैंने बीआईटी सिंदरी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक किया है.
सवाल: पढ़ाई के बाद आपने क्या किया ?
जवाब: पढ़ाई के बाद 2012 से जेनरल मोटर्स में काम कर रही थी.
सवाल: जेनरल मोटर्स में आपका सालाना पैकेज कितना था और आप कहां प्लेस्ड थीं ?
जवाब: मुझे 10 लाख रुपये सालाना का पैकेज प्राप्त था और मैं बैंगलोर में प्लेस्ड थी.
सवाल: आपका पैकेज जितना है मिडिल क्लास के हिसाब से 10 लाख का पैकेज बहुत होता है, कितना मुश्किल था उसे छोड़कर तैयारी में आना ?
जवाब: हां कठिन तो था इसलिए मैने साथ-साथ तैयारी करनी शुरु की थी, पर बाद में ये मुश्किल हो गया इसलिए मैंने पीटी पास करने के बाद पूरी तरह से नौकरी छोड़कर तैयारी की. ये डिमांडिंग परीक्षा है रिस्क तो लेना पड़ता है. नो रिस्क नो गेन.
सवाल: क्या आपको अपने पैरेंटस का सपोर्ट मिला ?
जवाब: सपोर्ट तो था पर इनका कहना था कि अगर होता है तो करो, नहीं भी होता है तो  कोई बात नहीं. काम छोड़ने की जरुरत नहीं है. मेरी अपनी ज्यादा इच्छा थी.

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सवाल: क्या ऐसा है कि आपने काम छोड़कर बिना घर वालों को बताए तैयारी  की और आखिर में रिजल्ट आने के बाद सबकुछ बताया ?
जवाब: हां पैरेंटस नहीं चाहते थे कि मैं काम छोड़कर पढ़ाई करुं. कुछ दिन तक मैंने साथ-साथ किया बाद में लगा कि अब छोड़कर करना चाहिए तो घर पर बात करने और मनाने में देर हो जाती इसलिए मैंने नहीं बताना उचित समझा.
सवाल: आपने कौन सा सब्जेक्ट चुना था. क्यों और किस वजह से उस सब्जेक्ट का चयन किया ?
जवाब: इतिहास का विषय चुना था.  दो कारण थे, एक तो फिर से आर्टस पढ़ने का मौक मिलता दूसरा मैं स्कूल के समय में इतिहास में बहुत अच्छी थी और मुझे बहुत पसंद था. मुझे लगा खुद से हो जाएगा. मैटेरियल आसानी से उपलब्ध हैं. साइंस सब्जेक्ट में आसानी से मिल पाना मुश्किल  है.
सवाल: कौन सी किताब का आपने रेफरेंस लिया था ?
जवाब: सबसे जरुरी तो एनसीईआरटी की छठी से लेकर बारहवीं तक की किताबें हैं जो बेहतर बेस बनाती हैं. उसके बाद करेंट अफेयर्स. हिस्ट्री के लिए मिडायवल हिस्ट्री के लिए इग्नू की किताबें, माडर्न हिस्ट्री के लिए शेखर बंधोपाध्याय की किताब, इंटरनेशलन हिस्ट्री के लिए एल मुखर्जी की किताबों को मैने प्रिफर किया.
सवाल: इंटरव्यू में क्या सवाल पूछे गए आपसे ?
जवाब: शुरुआत ड्राइवरलेस कार के सवाल से हुई, इसका प्रचलन इतना क्यों बढ़ रहा है. एसयूवी कार की डिमांड इतनी क्यों बढ़ रही है, ट्राइबल क्षेत्र से रिलेटेड सवाल भी पूछे गए हॉबी से रिलेटेड सवाल भी पूछे गए.
सवाल: कितने घंटे आपने पढ़ाई की ?
जवाब: काम के साथ में हर रोज पांच से छह घंटे पढ़ाई करती थी काम छोड़ने के बाद मैं हर रोज 10 घंटे पढ़ती थी.

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