अनुसूचित क्षेत्रों पर राज्यपाल को हर साल भेजनी है रिपोर्ट, तीन साल से केंद्र को नहीं गयी रिपोर्ट, जानकारों ने कहा यह संवैधानिक बेईमानी है

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 05/14/2018 - 14:25

Praveen Kumar

Ranchi: झारखंड के आदिवासी इलाकों में चल रही पत्थलगड़ी को लेकर सरकार के साथ-साथ सांसद-विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक के बयान आते रहे हैं. लेकिन इस विषय में सही क्या है और गलत क्या हैअब तक संवैधानिक प्रावधान के अनुरूप सरकार का पक्ष नहीं आया है. इस बीच खबर सामने आ रही है कि अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर राज्यपाल को प्रति वर्ष केंद्र को रिपोर्ट भेजनी होती है. उसे झारखंड से नहीं भेजा जा रहा है. इस रिपोर्ट में अनुसूचित क्षेत्र के स्थानीय शासन-प्रशासन एवं इन इलाको में चल रही विकास योजना एवं समुदायिक आक्रोश, आंदोलन की जानकारी होती है. लेकिन इस संदर्भ में झारखंड से वर्ष 2013- 14, 2014 -15, 2015 -16 का रिपोर्ट केन्द्र को नहीं भेजा गया है.  इसका खुलासा 2017- 18 के  जनजातीय कार्य मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट से हुई  है. रिपोर्ट में अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर राज्यपाल की ओर से भेजी जाने वाली रिपोर्ट नहीं भेजा गया अंकित है. इस रिपोर्ट के नहीं भेजे जाने को राज्य के आदिवासी मामलों के जानकार  संवैधानिक बेईमानी के रूप में देखते हैं. 

इसे भी पढ़ें - गोमिया उपचुनाव : गिरिडीह लोकसभा चुनाव का पार्ट टू हो सकता है इस बार का विधानसभा उपचुनाव, नतीजे का आंकलन मुश्किल

क्या  महत्व है राज्यपाल के रिपोर्ट का 

राज्यपाल जो रिपोर्ट केंद्र को भेजते हैं, उसमें पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों के लिए आदिवासी के विकास एवं कल्याण की स्थिति के अलावा कानून-व्यवस्था की स्थिति, नक्सल, आंदोलन, विद्रोह, समस्याएं एवं आदिवासियों की क्षेत्र में अशांति और राजनीतिक मामले तथा आदिवासियों के अधिकारों के हित की रक्षा करने वाली संवैधानिक प्रावधानों की गतिविधियों के बारे में जानकारी राज्यपाल की रिपोर्ट  में होती है. इस रिपोर्ट के आधार पर  केंद्र सरकार यह तय करती है कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजी जाने वाली रिपोर्ट राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों की प्रस्तुति के बारे में आइना की तरह कार्य करे. साथ ही आदिवासी हितों की रक्षा एवं उनके कल्याण के लिए किये गये कार्यों की जानकारी संपूर्ण तरीके से इस रिपोर्ट में दर्ज होती है. इसके अलावा रिपोर्ट में कानून व्यवस्था एवं अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासी संस्कृति, परिवेश में उत्पन्न होने वाली बहरी आबादी के द्वारा संस्कृति पर प्रभाव तथा शोषण, प्रवृत्ति के तहत बाहरी लोगों के द्वारा आदिवासी अर्थव्यवस्था एवं जमीन का नियंत्रण के बारे में जानकारी होती है. पर, झारखंड की राज्यपाल के द्वारा वर्ष 2013- 14, 2014 -15, 2015 -16 से रिपोर्ट नहीं भेजा गया है.

इसे भी पढ़ें - ... तो इसलिए आरईओ से हटाये गये आइएएस अविनाश कुमार 

मुपुपसक
जनजातीय कार्य मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट रिपोर्ट, जिसके अनुसार राज्यपाल ने पिछले तीन साल से नहीं भेजी केंद्र को रिपोर्ट

पांचवी अनुसूची के तहत राज्यपाल को है विशेष शक्ति

 पांचवी अनुसूची के पैरा 5-1 के तहत संविधान की पांचवी अनुसूची क्षेत्र में राज्यपाल को यह शक्ति प्रदान करता है कि अनुसूचित क्षेत्र के लिए राज्यों में बनाए गए नियमों तथा राज्य के विधानसभा तथा संसद में बनाए गए किसी भी नियम अथवा कानून, जिससे आदिवासी समुदाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो, उसे अनुसूचित क्षेत्र में अथवा राज्य के किसी भी भाग में लागू होने से रोकने तक का निर्देश दे सकता है. साथ ही संसद में बनाए गए कानून का संचालन सही रूप में हो रहा है या नहीं यह भी राज्यपाल देख सकते हैं. इन कारणों से अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर राज्यपाल की रिपोर्ट अहम होती है.

इसे भी पढ़ें - शिक्षा विभाग टैब घोटाला : 41,000 शिक्षकों के बदले दे दिया करीब 2500 बीआरपी और सीआरपी को टैब, आठ महीने में नहीं करा पाए एक दिन की ट्रेनिंग (2)

किसी राज्यपाल ने नहीं भेजी रिपोर्ट, पत्थलगड़ी आंदोलन इसी का परिणाम ः सुनील मिंज

आदिवासी मामलों के जानकार सुनील मिंज कहते हैंः 5 वीं अनुसूची के तहत  आदिवासियों को स्वशासन, विकास में नियंत्रण, रूढ़ि, रीति-रिवाज, परंपरा का अनुपालन उसका संरक्षणभूमि संरक्षण और अधिग्रहण के अलग कानून, जंगल पर उनके नैसर्गिक अधिकार, खनिजों पर अधिकार, आदिवासियों का स्वाभाविक रूप से विकास, उनकी भाषा संस्कृति का विकास आदी किया जाना था. महामहिम राज्यपाल को इस बाबत प्रत्येक वर्ष राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजनी होती है.  लेकिन आज तक किसी गवर्नर ने समय पर रिपोर्ट नहीं भेजा. और तो और उन इलाकों में सामान्य जिलों के कानून के अनुसार शासन चलाये जाते रहे. परिणाम स्वरूप आदिवासियों का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया. गवर्नर को TAC के मार्फत अलग कानून बनाने थे और 13 अनुसूचित जिलों में अलग प्रशासन बनाने थे, जो पिछले 70 सालों में नहीं किया गया. आज परिणाम के रूप में पत्थलगड़ी आंदोलन को देखा जा सकता है. इसके लिए यहां के MLA, MP भी कम दोषी नहीं हैं. 

राज्यपाल के कारण आदिवासी हाशिये पर : प्रेमचंद मुर्मू

आदिवासी बुद्विजीवी मंच के प्रेमचन्द्र मुर्मू ने कहा कि राज्य से अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संबध में रिपोर्ट नहीं भेजा जाना आदिवासियों के लिए काफी  संवेदनशील मामला है. यह राज्य के आदिवासियों के प्रति सरकार एवं टीएसी का नजरिये को दर्शाता है. राज्य से रिपोर्ट का न जाना संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना के बराबर है एवं इस संदर्भ  में गर्वनर अपने दायित्व का निर्वाह राज्य में नहीं कर रहे हैं. राज्य गठन के बाद किसी भी राजनीतिक दल ने 5 वीं अनुसूची को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण आज आदिवासी राज्य में हाशिये पर चले जा रहे हैं.

इसे भी पढ़ें - इधर लोगों को भीषण गर्मी से बचने के उपाय बता रहे मुख्यमंत्री, उधर ट्रैफिक पुलिस को खरीद कर पीना पड़  रहा पानी

यह संवैधानिक बेईमानी  है -रश्मि कात्यान

देश में 5 वीं अनुसूचित अनुपालन अनुसूचित क्षेत्र में नहीं होना संवैधानिक बेईमानी है. राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल ने अपने कार्यकाल के दौरान  पांचवीं अनुसूची वाले राज्यों के राज्यपालों को  इसे पालन करने के संबंध में पत्र भी लिखा था. फिर भी इसका पालन न होना और रिपोर्ट न भेजना संवैधानिक बेईमानी  के समान है.

इसे भी पढ़ें - सैंकड़ों किसानों का भाग्य बदलने वाले तनय चक्रवर्ती के काम को अक्षय कुमार ने सराहा, झारखंड के किसानों को देंगे दो दिन

राजभवन में पांचवीं अनुसूची अफसर तक नियुक्त नहीं ः रतन तिर्की

पांचवी अनुसूची क्षेत्र का कस्टोडियन राज्यपाल होते हैं.  धारा 244-1 के तहत नियम  का क्रियान्वयन के दायित्व राज्यपाल का होता है.  इसके लिए राजभवन में पांचवी अनुसूची ऑफिसर नियुक्त किया जाता है. जो पिछले कई वर्षों से नियुक्त नहीं किया गया है. अनुसूचित क्षेत्र में ग्रामसभा को अधिकार दिया गया है. यह तमाम जानकारी राष्ट्रपति को भेजना होता है. राज्य सरकार के द्वारा  पांचवी अनुसूची के नियम की अवहेलना होने के कारण कई राज्यों से समय पर रिपोर्ट नहीं भेजी जाती है. झारखंड से रिपोर्ट नहीं जाना आदिवासी समुदाय के प्रति विकास के नजरिया को दिखता है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

na