बच्चियों से रेप के दोषी को होगी फांसी की सजा ! मोदी सरकार आज ला सकती है ऑर्डिनेंस

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 04/21/2018 - 09:58

NewDelhi: नाबालिग बच्चियों से बढ़ते रेप के मामले और इस मसले पर होती केंद्र सरकार की किरकिरी के बाद अब मोदी गर्वमेंट कानून में बदलाव के मूड में है. खबर है कि केंद्रीय कैबिनेट नाबालिग से रेप मामले में मौत की सजा के प्रावधान के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है. शनिवार को कैबिनेट की बैठक में 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस' यानी पॉक्सो एक्ट में संशोधन को मंजूरी मिल सकता है, जिसके बाद 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के दोषियों को मौत की सजा दिए जाने का रास्ता साफ हो जाएगा.

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इसके साथ ही एस-एसटी एक्ट को लेकर भी मोदी सरकार एक ऑर्डिनेंस भी लाने की तैयारी में है. इस दूसरे ऑर्डिनेंस से एससी/एसटी कानून को दोबारा पुराने स्वरूप में ला सकती है. माना जा रहा है कि सरकार ने इसे लेकर तैयारी भी पूरी कर ली है.

मेनका गांधी ने पहले ही किया मौत की सजा का समर्थन

गौरतलब है कि महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने हाल में ही कहा था कि वो कठुआ और हाल में हुई दूसरी बलात्कार की घटनाओं से बहुत दुखी हैं और उनका मंत्रालय बहुत जल्द ही पॉक्सो एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने पेश करेगा. फिलहाल इस कानून में दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान नहीं है. कैबिनेट की बैठक के एक दिन पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका के जवाब में एक पत्र देकर कहा है कि सरकार पॉक्सो एक्ट में संशोधन करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है, जिसके तहत 12 साल से कम की बच्चियों के साथ बलात्कार के लिए फांसी की सजा का प्रावधान होगा.

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एससी-एसटी एक्ट को लेकर ऑर्डिनेंस

हाल के दिनों में दलित आंदोलन और दलित समुदाय में बढञते असंतोष को लेकर मोदी सरकार एक और ऑर्डिनेंस शनिवार को ला सकती है. इस अध्यादेश के जरिये एससी/एसटी कानून को दोबारा पुराने स्वरूप में ला सकती है. सूत्रों के अनुसार, शनिवार को पीएम नरेन्द्र मोदी विदेश दौरे से लौटने के तुरंत बाद कैबिनेट मीटिंग में भाग लेंगे, जिसमें ऑर्डिनेंस के मुद्दे पर फैसला लिया जा सकता है. दूसरे ऑर्डिनेंस से सरकार एससी/एसटी ऐक्ट को पुराने स्वरूप में ही लाने का फैसला ले सकती है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कानून में बदलाव करते हुए इसमें तुरंत गिरफ्तारी को लेकर कुछ शर्तें लगा दी थी. इसके बाद पूरे देश में दलित आंदोलन हुआ, जिसमें कुछ लोगों की जान भी गई थी. सरकार पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि वह जानबूझकर दलितों से जुड़े कानून को कमजोर कर रही है. खुद बीजेपी के कई दलित एमपी भी इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ आ गए. हालांकि सरकार ने इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुर्नविचार याचिका डाली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. 

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