रांची : खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय का आदेश महज अखबारी बयान, जमीन पर काम कुछ नहीं 

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 02/14/2018 - 16:00

Dheeraj Kumar (लेखक भोजन अधिकार अभियान से जुड़े हैं)

Ranchi :  सूबे के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय  ने आदेश जारी कर कहा था कि, केंद्रीय खाद्य आपूर्ति मंत्रालय द्वारा 8 फरवरी को जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को सिर्फ आधार कार्ड के ना होने पर, उसे पी.डी.एस के राशन से वंचित नहीं किया जायेगा. साथ ही मंत्रालय से जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर किसी के पास आधार नहीं है तो भी वह वैकल्पिक प्रमाण देकर अपने हक का राशन ले सकता है. साथ ही लाभुकों के अंगूठे का मिलान पौस मशीन से नहीं होने की वजह से भी उन्हें राशन लेने से नहीं रोका जा सकता.

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लेकिन खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय का यह आदेश भी महज अखबारी बयान बन कर रहा गया है. मंत्री जी के आदेश के बावजूद पलामू में एतवरिया देवी की भूख से मौत सिर्फ इसलिए हो गयी.क्योंकि एतवरिया देवी का अंगूठा पौस मशीन से मिलान नहीं होने पर उनको राशन नहीं मिला था. वहीं सबसे हालिया भूख से मौत की शिकार हुयी, पाकुड़ की लुखी मुर्मू का भी अक्टूबर के बाद राशन बंद था क्योंकि पौस मशीन में उनकी बहन का अंगूठा काम नहीं करने के कारण उन्हें राशन नहीं मिल पा रहा था.

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केवल गलती स्वीकार करने से क्या होता है मंत्री जी ! 

सरयू राय  ने आदेश जारी
सरयू राय  का आदेश 

खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय बार-बार आधार नहीं होने की वजह से राशन कार्ड रद्द होने की गलती स्वीकार करते हैं. लेकिन गलती स्वीकार करने से क्या होता है. अगर मंत्री जी को लगता है कि ऐसा करना गलती थी. फिर ऐसे में खाद्य आपूर्ति विभाग को वैसे सभी लोग जिनका गैर कानूनी ढंग से राशन कार्ड रद्द हुआ है, उनकी सूची जारी करनी चहिए थी और युद्ध स्तर पर उनकी पहचान कर उनका राशन कार्ड फिर से बनवाना चाहिए था. लेकिन गैर कानूनी तरीके से बिना आधार वाले रद्द हुए राशन कार्ड फिर से बने इसके लिए विभाग की ओर से कोइ भी पहल नहीं की गयी है. जमीनी अनुभव बताते हैं कि जिनका राशन कार्ड रद्द हुआ है, उनको स्वयं ही किसी तरह कार्ड बनवाने के लिए ब्लॉक या जिला में आवेदन करना पड़ा है. साथ ही कई जरूरतमंद लोगों का तो आवेदन देने के बावजूद भी अब तक राशन कार्ड नहीं बना है.पारदर्शिता के लिहाज से खाद्य आपूर्ति विभाग को कितने राशन कार्ड रद्द हुए एवं कितने बन गये, उसकी सूची भी जारी करनी चाहिए. लेकिन विभाग की ओर से इसकी कोइ भी पहल नहीं की गयी है.

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चारा घोटाले की स्मृतियों से बाहर निकले सरयू राय

सरयू राय  का आदेश 
सरयू राय  का आदेश 

सरयू राय पशुओं के अनाज के घोटाले की स्मृतियों में खोये हुए हैं. जबकि स्वयं उनके राजनैतिक नेतृत्व में इंसानों के खाने वाले अनाज सिर्फ कुप्रबंधन की वजह से गोदामों में अनाज सड़ रहे हैं और दूसरी ओर  लगातार भूख से मौत भी हो रही है. इसलिए अच्छा होता कि सरयू राय इस बात का अहसास करते कि वह एक ऐसा महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रहे हैं, जिसका सम्बन्ध झारखंड के लगभग ढाई करोड़ जरूरतमंद लोगों की भूख से है. साथ ही वह इस बात की कोशिश करते कि राज्य में अनाज का बेहतर ढंग से प्रबंधन कैसे हो.

यदि खाद्य आपूर्ति मंत्री के रूप में सरयू राय के अब तक के मंत्रित्व काल का मूल्यांकन किया जाए, तो वे बेहद अकुशल, कमजोर एवं अखबारी बयान देने वाले मंत्री के रूप में नजर आते हैं. इसके अलावा  मुख्य सचिव के आदेश के फौरन बाद अगर खाद्य आपूर्ति मंत्री ने सिर्फ अपने आदेश को अखबारी बयान तक सीमित ना रखते और विभाग से लिखित आदेश जारी कर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करवाते. तो  तो संभवतः सिमडेगा में संतोषी कुमारी की भूख से मौत नहीं हुई होती. साथ ही झारखंड में बड़े पैमाने पर आधार की वजह से लाखों राशन कार्ड भी रद्द ना हुए होते.   

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आज अगर पर्याप्त अनाज होने के बावजूद भी झारखंड में भूख से मौत हो रही है, तो इसके लिए खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय नैतिक एवं राजनैतिक तौर पर जिम्मेदार हैं. साथ ही वर्तमान में भी विभाग के कामकाज, जनवितरण प्रणाली के संचालन एवं स्वयं मंत्री जी की कार्यशैली को देखकर ऐसा नहीं लगता कि,  सूबे में आगे भूख से मौत ना हो इसके लिए कोइ भी जमीनी व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है. इसलिए अच्छा होगा कि सरयू राय खाद्य आपूर्ति मंत्री का पद भी छोड़ दें.

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(यह लेखक के निजी विचार हैं)