झारखंड में महिलाओं के उत्थान के नाम पर हुआ घोटाला, चुप है रघुवर सरकार

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 04/12/2018 - 10:44

Surjit singh

केंद्र और राज्य में सरकार बनने के बाद भाजपा ने जिन मुद्दों को ज्यादा तरजीह देने का वादा किया था, उसमें एक महिला उत्थान की बात भी थी. कहा गया था कि महिला उत्थान के लिए सरकार कई बड़े कदम उठायेगी. झारखंड का मुख्यमंत्री बनने के बाद रघुवर दास ने भी महिला उत्थान के लिए कई वायदे किये. लेकिन झारखंड में महिला उत्थान का नारा अब घोटाला का पर्याय बनता जा रहा है. महिलाओं के उत्थान के लिए रघुवर सरकार ने दो बड़े कदम उठाये. पहला एक लाख महिलाओं को मोबाइल फोन से लैस करने का और दूसरा महिला सखी मंडलों व बुनकर समितियों से नौ लाख कंबल बनवाकर गरीबों के बीच बांटने की. दोनों ही योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी. 

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मोबाइल के नाम पर महिलाओं को झुनझुना थमा दिया गया, तो महिलाओं द्वारा कंबल बनाने के नाम पर अफसरों ने बिना टेंडर किये बाहर से कंबल खरीद लिये. और यह दिखा दिया कि महिलाओं ने कंबल बनाया. न्यूज विंग ने 15 अक्टूबर 2017 को मोबाइल घोटाला और 19 मार्च 2018 को कंबल घोटाला का पर्दाफाश किया. पर अब तक सरकार ने किसी भी मामले की जांच का आदेश नहीं दिया है. अब जरा सोंचिये, जब राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास खुद की सरकार को बेदाग सरकार बताते हैं, सरकार को महिलाओं के उत्थान के कृतसंकल्पित होने की बात करते हैं, तब उन महिलाओं और उनके परिवार को लोग क्या सोंचते होंगे, जिनके नाम पर सरकार के अफसरों ने घोटाला कर दिया. सरकार यह भूल रही है कि भ्रष्टाचार करने वाला जितना दोषी होता है, उतना ही दोष भ्रष्टाचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने वाले का भी होता है. चारा घोटाला में लालू प्रसाद अभी जेल में हैं. उन्होंने भ्रष्टाचार नहीं किया, बल्कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की. झारखंड में भी अभी कमोबेश यही स्थिति है.

महिलाओं को दिये गये मोबाइल फोन का सच

-        सखी मंडल के महिलाओं को एसा स्मार्टफोन ( Karbon K9 4G) दिया गया, जो आउटडेटेड हो चुका था.

-        फोन से ठीक तरह से बात भी नहीं हो पाती थी.

-        सरकार ने मोबाइल खरीदने के लिए एसी कंपनी को चुनी, जिसका रांची या राज्य के किसी शहर में न दो दुकान है और ना ही सर्विस सेंटर. मतलब अगर कुछ भी खराबी आयी तो कचरा.

-        जो मोबाइल महिलाओं को दिये गये, उसमें किसी भी तरह का डाउनलोड नहीं किया जा सकता.

-        वर्ष 2017 में बांटे गये कार्बन की मोबाइल सिर्फ 1जीबी रैम वाला था और इंटरनल स्टोरेज सिर्फ 8 जीबी. शायद ही अब एसे मोबाइल को कोई खरीदे.

सरकार ने जो मोबाइल दिये, उससे एक काम भी नहीं हुआ

-        स्वलेखा में इंट्री के लिए.

-        भीम एप के माध्यम से ट्रांजैक्शन

-        गांव में ग्रामीण महिलाओं को स्मार्टफोन देकर उन्हें मोबाइल एडवाइजरी सर्विस के साथ भी जोड़ना लक्ष्य था

-        ध्वनि संदेश के माध्यम से खेती, सरकारी योजना और मौसम की जानकारी देना.

-        मुख्यमंत्री सखी मंडल स्मार्टफोन योजना का लक्ष्य गांवों और शहरों के बीच डिजीटल माघ्यमों की दूरी और विषमता को खत्म करना.

-        योजना के तहत डिडीटल माध्यमों को जरिए कैशलेस लेन-देन का बढ़ावा देना.

-        शक्ति एप के जरिये ग्रामीण महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना.

-        ई-किसान एप के जरिये पशु, सखी और आजीविका कृषक मित्र के हर तरह का आंकड़ा आनलाईन और आफलाइन मोड़ में देख सके.

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अब जानिये कंबल योजना का सच

वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने घोषणा कर दी कि गरीबों को बांटे जाने वाला कंबल इस साल खरीदा नहीं जायेगा. कंबल का निर्माण सखी मंडल के महिला सदस्यों और बुनकर समितियां करेगी. इससे महिलाओं की आय बढ़ेगी और उनका उत्थान होगा. इस योजना की घोषणा से पहले ना तो संबंधित विभागों ने इसकी तैयारी की और न ही सखी मंडलों और बुनकर समितियों को कंबल बनाने के लिए जरुरी संसाधन उपलब्ध कराये गये. नतीजा यह निकला कि कंबल बने ही नहीं. तब अफसरों ने बिना टेंडर किये बाजार से कंबल खरीद लिये. फिर उस पर झारक्राफ्ट का मुहर लगा दिया औऱ यह प्रचार किया कि नौ लाख कंबल का निर्माण झारखंड की महिलाओं और बुनकर समितियों ने किया. खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी इस उपलब्धि का उल्लेख किया है. सरकार के स्तर से इस झूठी उपलब्धि का प्रचार भी किया गया. जब लातेहार से पहली शिकायत आयी थी, तभी अफसरों को सचेत हो जाना चाहिए था. लेकिन नहीं. सत्ता शीर्ष पर बैठे अफसरों ने इस पर गौर नहीं किया. नतीजा बिना टेंडर के ही अफसरों ने नौ लाख कंबल खरीद लिये और लगभग 18 करोड़ का घोटाला कर दिया.

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