विधानसभा के परिसंवाद में विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के निशाने पर भी रहे रघुवर, सरयू राय ने कैबिनेट की बैठक पर उठाये सवाल

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 01/16/2018 - 17:42

Ranchi:  विधानसभा में सदन की कार्यवाही ठीक से चले. विधायकों को उनके सवाल का जवाब मिले. विपक्ष अपनी बात ठीक से सरकार के सामने रख पाये. सरकार सभी सवालों का जवाब सही से दे. इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव की पहल पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में राज्य के सभी विधायक आमंत्रित थे. ये अलग बात थी कि कार्यशाला में विधायकों से ज्यादा पत्रकार मौजूद थे. कार्यशाला विधायी शोध संदर्भ एवं प्रशिक्षण कोषांग की तरफ से बुलाया गया था. परिसंवाद का विषय सदन में आए दिन बढ़ती अव्यवस्था की प्रवृति के कारण और निदान था. परिसंवाद में वहां मौजूद कई विधायकों ने अपनी बात रखी. उनकी बातों का जवाब वरिष्ठ पत्रकार बलबीर दत्त के अलावा वहां मौजूद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी और दूसरे सदस्यों ने दिया. कार्यशाला में एक बात जो आम थी वो रही कि चाहे वो विपक्ष हो, सत्ता के मंत्री हों या फिर कार्यशाला में आए गणमान्य अतिथि हों सभी के निशाने पर कमोवेश सीएम और सरकार ही थी.

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सत्ता जिद पर अड़ता है तो अपना ही भट्ठा बैठ लेता हैः नामधारी

मौजूद सदस्यों को संबोधित करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने कहा कि सत्ता को जिद्दी नहीं होना चाहिए. ना ही किसी एक बात पर अड़ना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो सत्ता अपना ही भट्ठा जाम कर लेता है. कहा सदन में सभी को बात रखने का हक है. खास कर विपक्ष को ज्यादा सुना जाना चाहिए, क्योंकि विपक्ष हमेशा कमजोर होता है. कहाः सदन में अगर विपक्ष अपनी बात रखने में संतुष्ट हो गया तो सदन का कार्यवाही सही चलेगी. विपक्ष के साथ कोई भी सदस्य असंतुष्ट रहता है तो व्यवस्था ठीक नहीं रहेगी. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सत्ता पक्ष में बैठे लोगों को हमेशा अच्छा सुनने की आदत हो जाती है. जो ठीक नहीं हैं. ऐसा रवैया उन्हें ही कमजोर बनाता है. विपक्ष हमेशा से अपनी बात रखता आया है. अगर उसकी बात सरकार नहीं सुनेगी तो स्वाभिमानी विपक्ष रिएक्ट करेगा. ये रिक्शन ही दिखाता है कि विपक्ष कितना स्वाभिमानी है.

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जनता को मंत्रिपरिषद की बैठक को लेकर गलतफहमी हैः सरयू राय

अपने संबोधन में सरकार के मंत्री सरयू राय ने कहा कि जनता के बीच मंत्रिपरिषद की बैठक को लकर गलतफहमी है. उन्होंने कहा कि कहीं अगर हम कहते हैं कि हमें मंत्रिपरिषद की बैठक में जाना है तो जनता कहती है कि जल्दी जाइए. आपको तो दो-तीन घंटे बैठक करनी होगी. हर फैसले पर मंथन करना होगा. लेकिन होता क्या है किसी से छिपा नहीं है. दस मिनट से ज्यादा बैठक चलती ही नहीं है. उन्होंने कहा कि गलती सभी से होती है, लेकिन कोई दूसरा आपको उस गलती के बारे संकेत दे रहा हो. बता रहा हो, तो आपको संभल जाना चाहिए. लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है. कहाः सरकार अपना पल्ला सिर्फ यह कह कर नहीं झाड़ सकती कि विपक्ष का तो काम सिर्फ विरोध करना होता है. अपनी आलोचना सुनने की ताकत सभी के अंदर होनी चाहिए. कहाः ये जिम्मेवारी सदन के नेता की है कि सदन चले या नहीं. सदन के नेता को यह भूल जाना चाहिए कि वो मुख्यमंत्री है. वो सदन का नेता है जिसमें विपक्ष भी शामिल है. ये कितनी अजीब बात है कि सत्र के पहले हुए सर्वदलीय बैठक में यह चर्चा होती ही नहीं कि सदन आखिर चले कैसे.

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हर स्तर पर गिरावट है स्वीकार करता हूं: दिनेश उरांव

अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने कहा कि चाहे वो कोई हो उसे अपने दायरे में रहना चहिए. किसी को अपनी सीमा नहीं लांघनी चाहिए. लोकतंत्र के चारों स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया को भी अपना दायरे का ख्याल रखा जाना चाहिए. सदन की नियमावली की धारा 56 में कार्यस्थगन के बारे सारी जानकारी दी गयी है. लेकिन अभी तक सिर्फ एक बार 2007 में अध्यक्ष की तरफ से कार्यस्थगन का प्रस्ताव माना गया है. कहाः मैं मानता हूं कि हर स्तर में गिरावट आयी है. सदन की व्यवस्था स्मूथ नहीं चल रही है. हमलोगों के बीच काफी कमी आयी है. इसे चिंता के रूप में लेना चाहिए.

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विपक्ष से ना सही अपने मंत्रिमंडल से तो पूछ लीजिए जनाबः प्रदीप यादव

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कार्यशाला में विधायक प्रदीप यादव काफी जोर-शोर से अपनी बात रखनी शुरू कर दी तो उन्हें बैठने को कहा गया. बाद में उन्हें संबोधित करने को भी कहा गया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विपक्ष और दूसरी पार्टी से अगर सरकार किसी विधेयक के लिए नहीं पूछती है तो कोई बात नहीं. कम-से-कम अपने मंत्रिमंडल से तो पूछ लीजिए. यह सभी जानते हैं कि सरकार में किसी की नहीं चलती है. किसी की बात नहीं सुनी जाती है. जब ऐसे हालात पैदा होते हैं तो सदन में एक विधायक बोलेगा ही. अब ऐसा करने से एक विधायक को रोका जाए तो फिर लोकतंत्र का मतलब क्या रह जाएगा. पूरे राज्य को इशारा मिल चुका है कि इस बार सदन को चलने दिया जएगा या नहीं. लेकिन फिर भी सरकार की तरफ से कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं जिससे सदन का कार्यवाही सही से चल सके. सरकार के दो वरीय अधिकारियों की वजह से सदन बाधित होने वाली है. अध्यक्ष महोदय और संसदीय कार्यमंत्री को चाहिए वो जाकर सीएम से मिले. उन्हें कोई कदम उठाने को कहें. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है क्योंकि सभी जानते हैं कि किसी की सुनी नहीं जाती है.

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