सुरक्षा बलों और माओवादियों की लड़ाई का दंश झेल रहे बुढ़ा पहाड़ पर बसे गांव के ग्रामीण

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 03/17/2018 - 17:21

Manoj Dutt Dev

Latehar : झारखण्ड के लातेहार जिला और छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला की सीमा पर नक्सली का गढ़ माने जाने वाला बुढा पहाड़ की लगातार कई श्रृंखला है. पहाड़ पर और उसके आसपास घनघोर जंगल है. जिसका ज्यादा लाभ प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी को मिलता. बुढ़ा पहाड़ पर हर नक्सल अभियान में सुरक्षा बलों को ही ज्यादा नुकसान पहुंचता है. पहाड़ों की इस श्रृंखला और घनघोर जंगल के के आसपास दर्जनों गांव बसे हुये हैं. इन गांवों में बसे ग्रामीण हर दिन माओवादी और सुरक्षा की लड़ाई का दंश झेल रहे हैं. कभी नक्सलियों को खाना खिलाने और उनका सहयोग करने के आरोप में सुरक्षा बलों से ग्रामीण पीट रहे हैं तो कभी सुरक्षा बलों को सहयोग करने के आरोप में नक्सलियों से पीट रहे हैं. बेबस मजबूर गरीब ग्रामीणों कि मानें तो वे सुरक्षा बल और माओवादियों के झगड़े में फुटबॉल बनकर रह गए हैं, जो भी आता है आरोप लगाकर पीटकर चला जाता है.

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कुछ दिन पहले ही तिसिया ग्राम के ग्रामीणों को सुरक्षा बलों ने पीटा था

हाल के दिनों में ठीक इसी प्रकार की घटना बुढा पहाड़ क्षेत्र के तिसिया ग्राम में घटी, जहां माओवादियों का राशन रखने और माओवादियों का सहयोग करने के आरोप में सुरक्षा बलों ने ग्रामीणों को पीटा. तिसिया ग्राम लातेहार जिला के महुआडांड़ थाना क्षेत्र अन्तर्गत आता है. ग्रामीण खुद को माओवादी और सुरक्षा बल का फुटबॉल समझने लगे हैं, जो भी आता भोले-भाले ग्रामीणों पर आरोप लगाकर प्रताड़ित कर चला जाता है.

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तिसिया ग्राम के पीड़ित ग्रामीणों ने बयां किये अपने दर्द

सुरक्षा बल के शिकार हुये तिसिया ग्राम निवासी राजेश नगेसिया, पिता बंधन नगेसिया (तिसिया ग्राम के ग्राम प्रधान) ने बताया कि पांच मार्च की देर शाम तक़रीबन छह बजे एक राहगीर छत्तीसगढ़ का चरहू ग्राम का निवासी काल्पनिक नाम इस्लाम मोटरसाइकल से अपने एक साथी के साथ आया और कहा कि कार्टून में चाय का सामान और बिस्कुट है, इसको रख लो बाद में कोई आकर ले जाएगा. राजेश ने कार्टून को घर के बाहर दरवाजे से सटा कर रख दिया, उसके बाद दोनों चरहू ग्राम चले गये. कुछ देर बाद ही सुरक्षा बलों ने गांव को घेर लिया. दूसरे दिन सुबह छह मार्च को गांव पहुंचते हैं और राजेश के साथ मारपीट कर उस कार्टून रखने वाले और लेने आने वाले व्यक्ति की जानकारी मांगते हैं. सुरक्षा बलों ने राजेश के साथ गाली-गलौज भी की और माओवादियों का सहयोग करने का आरोप लगाते हुये कहा कि तुमलोग नहीं सुधरोगे. राजेश के साथ मारपीट का विरोध करने पर सुरक्षा बलों ने प्रमोद नगेसिया, सुनील नगेसिया, बिनोद नगेसिया, दशवंत नगेसिया आदि को भी पीटा. पिटाई करने के बाद सुरक्षा बलों ने सभी ग्रामीणों को बांढ़ेसाड थाना के हवाले कर दिया, जहां थाना प्रभारी नित्यानंद प्रसाद ने पांच घण्टे पूछताछ करने के बाद ग्रामीणों को मुक्त किया. थाना प्रभारी ने ग्रामीणों से सुरक्षा बलों द्वारा पिटाई का कारण पूछा, ग्रामीणों ने थाना प्रभारी को पूरी घटनाक्रम की जानकारी दी, जिसके बाद थाना प्रभारी ने सभी ग्रामीणों को छोड़ दिया.

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थाना प्रभारी ने बताया ग्रामीणों के साथ हुई थी मारपीट

मामले की जानकारी जब थाना प्रभारी से ली गयी तो, थाना प्रभारी नित्यानद प्रसाद ने कहा कि ग्रामीणों के साथ मारपीट हुई है. उन्होंने कहा कि जवान लोकल नहीं हैं न समझने में थोड़ी भूल हुई है. मामले की जानकारी वरीय पदाधिकारियों को दी गयी है. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के साथ मधुर संबंध बनाने का प्रयास किया जा रहा है, कभी कभार ऐसी गलती हो जाती है, जिसका हमें खेद है.

तिसिया ग्राम की महिलाओं को महिला बल से पिटवाने की धमकी देते हैं सुरक्षा बल

तिसिया ग्राम की अनुपा देवी और संगीता देवी सहिया ने बताया कि माओवादी आते हैं, तो खाना मांगते हैं, सुरक्षा बल आते हैं गांव के मर्दों को पीटते हैं, जब महिलाएं इसका विरोध करती हैं तो सुरक्षा बल महिला पुलिस बुलवाकर महिलाओं को भी पीटवाने की धमकी देते हैं. उपरोक्त महिलाओं ने बताया कि तिसिया ग्राम में ग्रामीण पुलिस और नक्सली के बीच फुटबॉल बनकर रह गए हैं. ग्रामीण महिलाओं ने पुलिस और नक्सली से परेशान होकर अपना दर्द बयां करते हुये कहा कि यदि कहीं शहर में जमीन मिल जाती तो ग्राम छोड़ देते. हर वक्त माओवादी और सुरक्षा बल का डर बना रहता है.

बुढा पहाड़ की गोद में बसा है ये गांव

बुढा पहाड़ की गोद में झारखण्ड लातेहार जिला का कुजरुम, लाटू, तिसिया, नवाटोली, मेराल चेमो, सानिया, कुटकु आदि गांव बसा है. वहीं छत्तीसगढ़ बलरामपुर जिला का चरहू, पीपराडावा, पुंदाग, नवाटोली चुनचुना, थलही, बहागढा आदि गांव बसा है. यहां के ग्रामीण माओवादी और सुरक्षा बलों की लड़ाई में पिस रहे हैं.

माओवादी और सुरक्षा बल का स्पाई कर रहा है डबल क्रॉस, जिससे ग्रामीण हैं परेशान

तिसिया ग्राम में घटी घटना से ऐसा ही प्रतीत हो रहा है. राजेश नगेसिया के घर माओवादी का सामान रखना, तुरंत सुरक्षा बल का अम्बुस होना और सफलता नहीं मिलने पर ग्रामीणों की पिटाई संकेत देता है माओवादी और पुलिस दोनों का स्पाई एक ही है और वो दोनों को सूचना दे रहा है, जिसका खामियाजा बेबस ग्रामीणों को उठाना पड़ रहा है.

सरकारी सुविधा विहीन है तिसिया ग्राम

लातेहार जिला अन्तर्गत महुआडांड़ थाना और प्रखंड कार्यालय से 30 किलोमीटर की दूरी पर श्रृंखला बद्ध पहाड़ और घनघोर जंगल के बीच बसा तिसिया ग्राम की दूरी मुख्य पथ से आठ किलोमीटर की दूरी पर है, मगर ग्राम से मुख्य पथ के लिए कोई पथ ही नहीं है. ग्रामीण जंगल के रास्ते का इस्तेमाल करते हैं. ग्राम में एक प्राथमिक स्कूल है, जिसमें करीब 50 बच्चे पढ़ते हैं. 50 बच्चों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक हैं, वो भी कभी-कभी ही आते हैं. स्वास्थ्य सुविधा सप्ताह में मात्र एक ही दिन मिलता, जहां ग्राम में सरकारी नर्स आती है. गांव में कुल 35 घर है वो भी मिट्टी के, वहीं ग्राम की आबादी 200 के करीब है.

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