पाकिस्तान की गोलीबारी के कारण डर के साये में रहने को मजबूर हैं सीमावर्ती गांवों के लोग

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 01/20/2018 - 17:11

Jammu: सीमावर्ती गांवों में लोग डर के साये में रहने को मजबूर हैं. पिछले तीन दिनों में पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं में पांच नागरिकों समेत नौ लोगों की मौत हो चुकी है और 47 अन्य घायल हुए हैं.  इन गांवों में गनपाउडर की गंध बनी हुई है घरों में फैला खून, खिड़कियों के टूटे शीशे और ध्वस्त छतों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछले तीन दिनों में पाकिस्तानी गोलीबारी और गोलाबारी ने इन इलाकों को कितना नुकसान पहुंचाया है.

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मौत के साये में जी रहे लोग

एक स्थानीय निवासी रत्नो देवी ने न्यूज एजेंसी के हवाले से कहा कि हम लोग मौत के साये में जी रहे है. हमारे घरों पर मोर्टार बमों की बौछारें हो रही हैं और हमने सोचा था कि हम किसी भी क्षण मर जाएंगे लेकिन पुलिस अरनिया में साई खुर्द गांव से हम लोगों को बाहर निकाल लाई. देवी ने बताया कि साई खुर्द में गोलाबारी में कई मकान क्षतिग्रस्त हो गये और कई जानवरों की मौत हो गई. उन्होंने बताया कि एक महिला की मौत हो गई जबकि गांव में उसका पति और बेटा घायल हो गये. अरनिया क्षेत्र के बाहरी इलाके में अपने रिश्तेदार के यहां शरण ली हुई रत्नो देवी ने कहा, सरकार को पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी को रोकना चाहिए.

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गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले गयी पुलिस

आर एस पुरा के उपमंडलीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) सुरिन्दर चौधरी के अनुसार सीमावर्ती इलाके वास्तव में युद्ध क्षेत्र में बदल गये हैं. पाकिस्तान नागरिक इलाकों को निशाना बना रहा है. इससे मकानों और जानवरों को काफी नुकसान हुआ है. कोरोताना, साई खुर्द, माहाशा कोटे, पिंडी, सुचेतगढ, झोरा फार्म गांव गोलियों और मोर्टार गोलों से बुरी तरह से प्रभावित हुए है. इन गांवों में छतें ढह गई और मकानों की दीवारें गिर गईं.

एसडीपीओ सुरिन्दर चौधरी ने कहा, हम सीमावर्ती गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले गये हैं. पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता है.

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ग्रामीणों का दावा सरकार बंकर बनाने में विफल रही

चंचलो देवी ने कहा कि वह और उनके पति अरनिया वार्ड संख्या 13 में मोर्टार गोलों की आवाज से जागे और उन्होंने तुरन्त पड़ोस के एक मकान में जाने का प्रयास किया क्योंकि उनका घर तहस-नहस हो चुका था.

विधिपुर के देशराज ने बताया कि उनका परिवार तब तक एक कमरे में बिना भोजन और पानी के रहा जब तक वे गोलीबारी और गोलाबारी से बचकर अपने घर से नहीं निकल गये.

अरनिया के सुदर्शन सिंह ने कहा, यदि सरकार बंकरों का निर्माण कर देती या कई वर्षों पहले किये गये वादे के अनुसार एक सुरक्षा स्थान उपलब्ध करा देती तो सीमावर्ती इलाकों के लोग नहीं मारे जाते या घायल नहीं होते.

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एक जवान समेत तीन लोगों की मौत

जम्मू मंडल में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पाकिस्तानी सैनिकों की गोलीबारी में आज सेना के एक जवान समेत तीन लोगों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गये. जम्मू और साम्बा जिलों के तीन सेक्टरों में संघर्ष विराम की घटना में कल 17 वर्षीय एक लड़की की मौत हो गई थी और बीएसएफ का एक जवान शहीद हो गया था जबकि पांच नागरिक घायल हो गये थे.

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