बिहारशरीफ सहित नौ शहर स्मार्ट सिटी परियोजना का बने हिस्सा, प्रस्तावित स्मार्ट शहरों में आधे बाढ़ वाले जिले

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 01/19/2018 - 18:29

New Delhi :  उत्तर प्रदेश में बरेली और बिहार में बिहारशरीफ सहित विभिन्न राज्यों के नौ शहरों को स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल किया गया है. आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल किये जाने वाले, शहरों की चयन प्रक्रिया के परिणामों का खुलासा करते हुये यह जानकारी दी. पुरी ने बताया कि शहरों के चयन की प्रक्रिया के चौथे चरण में उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक तीन शहरों बरेली, मुरादाबाद और सहारनपुर को जगह मिली है. इसके अलावा तमिलनाडु में इरोड, दादर नगर हवेली में सिलवासा, लक्षद्वीप में कवारती, अरुणाचल प्रदेश में ईटानगर और दमन दीव में दीव शहर को जगह मिली है.

इसे भी पढ़ें - रामगढ़ : बस और ट्रक की भीषण टक्कर, दो की मौत 21 घायल, सभी घायल बिहार के रहने वाले  

90 शहरों को पहले ही शामिल किया जा चुका है

स्मार्ट सिटी परियोजना में 90 शहरों को पहले ही शामिल किया जा चुका है. इस चरण में दस शहरों को चुना गया है. पुरी ने स्पष्ट किया कि एक शहर पूर्वोत्तर राज्य से चयन किया गया है. लेकिन संबद्ध राज्य में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो जाने के कारण इस शहर का नाम बाद में घोषित किया जायेगा. पुरी ने बताया कि इस चरण में स्मार्ट सिटी परियोजना के मानकों पर खरे उतरने वाले चयनित शहरों में सिलवासा अव्वल रहा. उन्होंने बताया कि चयनित शहरों ने अपने स्मार्ट सिटी प्रस्तावों में परियोजना के मानकों के मुताबिक 12,824 करोड़ रुपये के विकासकार्यों की कार्य योजना पेश की है. इस राशि की मदद से इन शहरों में जीवन को सुविधापूर्ण और सुगम बनाया जा सकेगा.

उल्लेखनीय है कि सरकार का लक्ष्य इस परियोजना के पहले चरण में 100 शहरों को केन्द्र सरकार की तरफ से प्रत्येक शहर को 500 करोड़ रुपये दिया जा रहा है. शेष राशि संबद्ध शहर स्थानीय निकाय बांड के अलावा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी से जुटा रहे हैं.

इसे भी पढ़ें  - बोकारो एसपी ने कनीय अफसरों से कहा, बेटे को नौकरी देने के लिए शहीद होते हैं पदाधिकारीः एसोसिएशन

आधे स्मार्ट शहर बाढ़ की जोखिम वाले जिलों में शामिल : रिपोर्ट

दूसरी ओर देश में बाढ़ को सबसे जोखिम वाली आपदा के रूप में रेखांकित करते हुए एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आधे स्मार्ट शहर बाढ़ की जोखिम वाले जिलो में आते हैं. ऐसे में इन शहरों का विकास इन चुनौतियों और जरूरतों के अनुरूप किया जाना चाहिए. सीड्स एवं सेंटर फॉर रिसर्च ऑन दि एपिडेमिओलॉजी ऑफ डिजास्टेर्स (सीआरईडी) ने आज डिकोडिंग द मानसून फ्लड्सनामक अपनी एक रिपोर्ट पेश की. यह रिपोर्ट 2000 से 2017 के बीच बांग्लादेश, भारत, नेपाल और म्यामां में आयी आपदाओं के आंकड़ों पर आधारित है. रिपोर्ट में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में विनाशकारी आपदाओं की सूची में बाढ़ सबसे ऊपर है. पिछले 18 सालों में इन चार देशों में बाढ़ की 361 घटनाएं (बाढ़ और चक्रवात दोनों) सामने आई हैं, जो कि एशिया के इस क्षेत्र में आई कुल आपदाओं का तीन चौथाई भाग है.

इसे भी पढ़ें - आईजी ऑपरेशन आशीष बत्रा : सरेंडर नहीं किया तो एनकाउंटर में नक्सलियों का मरना तय (देखें वीडियो)   

साथ ही रिपोर्ट में सामने आया कि भारत में काफी संख्या में शहर एवं कस्बे  उन जिलों में मौजूद हैं. जिन्होंने पिछले 18 वर्षों में कम से कम 11 बाढ़ का सामना किया है. निष्कर्षों में यह बात भी सामने आई है कि भारत के प्रस्तावित स्मार्ट शहरों में से आधे शहर बाढ़ की जोखिम वाले जिलों में आते हैं. सीड्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. मनु गुप्ता ने कहा कि मानवीय जरूरतें बढ़ रही हैं और जरूरत एवं सहायता के बीच का अंतर बढ़ रहा है.  ऐसे में इन शहरों का विकास इन चुनौतियों और जरूरतों के अनुरूप किया जाना चाहिए.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

top story (position)