पलामू : पांकी पूर्वी पंचायत को 2016 में ही बताया गया ओडीएफ, लेकिन जमीनी हकीकत खोल रही है राज

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 02/13/2018 - 18:50

Daltonganj : जिले की कई पंचायतें ओडीएफ घोषित कर दी गयी हैं और सरकार को इसकी रिपोर्ट भी सौंप दी गयी है. जिसमें यह बताया गया है कि लोग पूरी तरह शौचालय का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन पांकी की कई पंचायतें इसका अलग ही नजारा पेश कर रही हैं. यहां कागज पर ओडीएफ घोषित करने के चक्कर में जमीनी हकीकत को तार-तार कर दिया गया है.  पांकी प्रखंड की पांकी पूर्वी, केकरगढ़ और हूरलौंग पंचायत में शौचालय निर्माण कार्य पूरा होने के बाद पंचायतें ओडीएफ तो हुयीं. लेकिन अभी भी इस इलाके के लोग खुले में शौच करने को विवश हैं. इसकी मुख्य वजह शौचालय निर्माण का कार्य सही तरीके से ना होना है. साथ ही इसके निर्माण में घटिया सामग्रियों का भी उपयोग किया गया है.

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पांकी के पूर्वी पंचायत अंतर्गत पांकी बस्ती निवासी शांति देवी का शौचालय आज तक अधूरा पड़ा है. घर की सदस्य रीना देवी ने बताया कि काफी दिन हो गये, लेकिन शौचालय निर्माण करवा रहे लोगों ने शौचालय में ढक्कन तक नहीं लगाये. इसके अलावा शौचालय का दरवाजा भी हवा से उड़ गया है और   शौचालय में पैन भी नहीं लगवाया गया है.वहीं पांकी पूर्वी पंचायत के ही दरजाही टोला निवासी रामबली सिंह का शौचालय निर्माण के बाद से आज तक खुला ही नहीं. यहां तक कि जिस जगह रामबली सिंह का शौचालय का निर्माण करवाया गया है, वह वहां रहते ही नहीं हैं. जबकि शौचालय का निर्माण बिचैलियों द्वारा करवा दिया गया है.

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पांकी पूर्वी पंचायत वर्ष 2016 में ही ओडीएफ घोषित हुई है

ज्ञात हो कि पांकी प्रखंड की पांकी पूर्वी पंचायत वर्ष 2016 में ही ओडीएफ घोषित हुई है. पांकी पूर्वी पंचायत में 440 शौचालय का निर्माण 56,80,000 की लागत से करवाया गया है. वहीं 2017 में पांकी प्रखंड की ही आदर्श पंचायत केकरगढ़ भी ओडीएफ घोषित हुई है. जिसमें 845 शौचालय का निर्माण 10140,000 की लागत से करवाया गया है, जबकि ओडीएफ हुई पंचायत हुरलौंग में 833 शौचालयों का निर्माण 99,96000 की लागत से करवाया गया है.

जिले में शौचालय की स्थिति बदतर है. एक ओर सरकार जहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों रुपए खर्च कर शौचालय का निर्माण तो करवा रही है. वहीं शौचालय निर्माण में बिचैलियों की वजह से शौचालय के निर्माण कार्य में बेहद लापरवाही बरती जा रही है. कागज पर तो पंचायत ओडीएफ हो रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.

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