झारखंड में ओडीएफ की खुली पोल : अब तक मात्र आठ ही जिले ओडीएफ घोषित, सीएम व मंत्री भी जता चुके हैं नाराजगी

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 05/15/2018 - 18:25

Ranchi :  स्वच्छ भारत मिशन के तहत झारखंड सरकार आगामी 2 अक्टूबर तक राज्य को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित करने के भले ही तमाम दावे कर रही हो.  लेकिन इसपर खुद नगर विकास मंत्री सीपी सिंह का ने अपनी नाराजगी जाहिर की है. उनका कहना है कि सिर्फ कागज पर ओडीएफ घोषित कर देने भर से काम नहीं चलेगा, क्योंकि ये  लक्ष्य प्राप्ति पर एक प्रश्न चिन्ह लगाता है. एक आंकड़े के मुताबिक फरवरी 2018 तक राज्य के कुल 10,953 गांव ही खुले में शौच से मुक्त हो सके थे. जबकि वर्तमान में आलम यह है कि राज्य के करीब 29,647 गांव में से सिर्फ  15,000 गांव ही ओडीएफ किये गये हैं. सबसे अहम यह है कि अब झारखंड को ओडीएफ राज्य बनाने के लक्ष्य में मात्र चार माह ही बचे हैं.

15,000 गांव ही हो पाये हैं ओडीएफ

राज्य में कितने गांव ओडीएफ घोषित हो चुके हैं, इस सवाल पर राज्य शहरी विकास एजेंसी (सूडा) के निदेशक राजेश कुमार शर्मा ने न्यूज विंग के संवाददाता को बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत झारखण्ड राज्य के कुल 29,647 गांव में करीब 15,000 गांवों को खुले में शौच से मुक्त (ओ.डी.एफ.) घोषित किया गया है. यानि कि करीब 50 प्रतिशत गांव को ही ओडीएफ घोषित किया गया है. लेकिन आलम यह है कि राज्य सरकार ने दो अक्टूबर 2018 तक राज्य को पूर्ण रूप से ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य तय किया हुआ है.

पेयजल एवं स्वच्छता राज्य मंत्री ने दी थी जानकारी

इससे पहले राज्यसभा सांसद परिमल नाथवाणी द्वारा पूछे गये सवाल पर इस साल फरवरी महीने में केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता राज्यमंत्री रमेश चंदप्पा जिगाजीनागी ने खुद इस बात की जानकारी दी थी कि, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत झारखण्ड राज्य के कुल 29,647 गांव में से 10,963 गांवों को खुले में शौच से मुक्त (ओ.डी.एफ.) घोषित किया गया है. जिसका मतलब यह हुआ कि  उस समय तक राज्य के करीब 36.98 प्रतिशत गांव को ही ओडीएफ घोषित किया गया था. इससे इस बात की पुष्टि होती है कि राज्य सरकार ने महज तीन महीने में ही करीब 4100 गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया है.

प्रतिकूल स्थिति है राज्य की, स्वंय मुख्यमंत्री दे चुके हैं नसीहत

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बीते सोमवार को राज्य के मुखिया रघुवर दास ने भी राज्य को ओडीएफ करने की दिशा में अफसरों  को सख्त नसीहत दी थी.  साथ ही सीएम ने ट्वीट करके कहा था, कि धनबाद के गोविंदपुर के रहने वाले भाई रामभोल के घर जल्द शौचालय निर्माण का आदेश दिया था. साथ ही मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश धनबाद जिला प्रशासन दिया था. गौरतलब है कि रामभोल की पत्नी घर में शौचालय ना होने की वजह से घर छोड़कर चली गयी थी. जिससे मामला मीडिया में आने के बाद सीएम ने ओडीएफ को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी.

नगर विकास मंत्री भी जता चुके हैं नाराजगी

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नगर विकास मंत्री सीपी सिंह

स्वच्छ भारत मिशन के तहत बीते सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में हुई एक कार्यशाला में नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने भी ओडीएफ की स्थिति पर नाराजगी जतायी थी. सीपी सिंह ने कहा था कि   केवल कानून बनाकर लोगों को खुले में शौच से नहीं रोका जा सकता. उन्होंने अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा था कि कागज पर ओडीएफ घोषित कर देने भर से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके लिए लोगों को जागरुक करने के अलावा अधिकारियों को भी सख्ती से कार्य करने की जरुरत है.

केवल आठ जिले ही हो चुके हैं ओडीएफ, बचे हैं 16 जिले

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स्वच्छ भारत मिशन के तहत अब तक झारखण्ड के आठ जिले ओडीएफ घोषित हुए हैं. वहीं अभी भी राज्य के कुल 24 जिले में से कुल 16 जिले लक्ष्य प्राप्ति से दूर हैं. इसे लेकर खुद राज्य के मुखिया रघुवर दास कई बार यह बात कह चुके हैं कि मिशन के तहत आगामी दो अक्तूबर तक पूरे झारखण्ड को ओडीएफ करने का लक्ष्य हर हाल में प्राप्त करना है.

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