विपक्ष ही नहीं बीजेपी के आधे से अधिक विधायक भी स्थानीय और नियोजन नीति के खिलाफ, 24 विधायकों ने सीएम को लिखी चिट्ठी

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 01/30/2018 - 17:30

Ranchi : स्थानीय नीति और नियोजन नीति को लेकर सरकार के 24 विधायकों ने ही सरकार को घेरा है. इन सभी 24 बीजेपी के विधायकों ने मांग की है कि स्थानीय नीति और नियोजन नीति में सरकार बदलाव लाए. इससे पहले इन नीतियों में बदलाव को लेकर विपक्ष हमेशा से आंदोलन करता आया है. स्थानीय नीति रघुवर सरकार की सबसे सफलतम नीतियों में से एक मानी जा रही थी. स्थानीय नीति बना कर सरकार ने हर मोर्चे पर अपनी पीठ थपथपाने का काम किया है. वहीं विपक्ष ने इन दोनों नीतियों को लेकर सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन किया है. बीजेपी के 24 विधायकों में बीजेपी के मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर भी शामिल हैं. इन्होंने आज मुख्यमंत्री रघुवर दास को सात बिन्दुओं वाला एक पत्र लिखा है. सभी विधायकों ने ये मांग की है कि बिंदुवार सातों सुझावों को सरकार गंभीरता से ले.

क्या लिखा है विधायकों ने

बीजेपी के विधायकों का कहना है कि राज्य के तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों पर नियुक्तियां रुकी पड़ी थी. नियोजन में कठिनाई हो रही थी.

BJP MLAs outside Jharkhand assembly
BJP MLAs outside Jharkhand assembly

जनता की मांग लंबे समय से लंबित थी. सरकार ने स्थानीय नीति और नियोजन नीति बना कर जनता के लिए महत्वपूर्ण काम किया है. लेकिन, इन नीतियों में कई विसंगतियां हैं. जिन्हें सुधारने की जरूरत है. विधायकों का ये भी कहना है कि इन नीतियों की वजह से राज्य की जनता विशेष रूप से मूलवासी सदान और जनजातीय समुदाय के युवाओं के बीच काफी आक्रोश है. ऐसे में जगह-जगह पर आंदोलन हो रहे हैं. उनके आंदोलनों और मांग की वजह से विधायकों को भी कोप का भाजन बनना पड़ रहा है. मामले को लेकर युवाओं का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है. सरकार इसे गंभीरता से ले.

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सत्ता पक्ष के विधायकों का इन सात बिंदुओं पर है सुझाव

-           झारखंड विधानसभा के सदस्यों की एक उच्च स्तरीय समिति बनायी जाए. जो स्थानीयता, नियोजन, जिला रोस्टर और आरक्षण में व्याप्त गलतियों को दूर करने के लिए गंभीर मंथन करे और तीन महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट दे. तब-तक राज्य में किसी तरह की नियुक्ति नहीं की जाए.

-           स्थानीयता नीति को फिर से परिभाषित करते हुए लागू नीति में बाहर से आकर झारखंड राज्य में तीस साल या 1985 से पहले से निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा स्वघोषणा, शपथ पत्र के आधार पर स्थानीय निवासी का प्रमाण पत्र जारी करने के प्रावधान को समाप्त किया जाए और ऐसे व्यक्ति और सदस्यों के लिए 1932 का सर्वे खतियान और 1951 की जनगणना और मतदाता सूची को आधार बनाए जाने का प्रावधान किया जाए.

-           राज्य के बाहर से आए हुए लोग अपने मूल राज्य के जिलाधिकारी से प्रणाम पत्र जिसमें यह उल्लेखित हो कि वो अपने मूल राज्य में किसी भी प्रकार के नियोजन, आरक्षण या अपने मूल राज्य में मिलने वाली दूसरी किसी भी प्रकार की सुविधा को नहीं ले सकेगा. ये शर्त के रूप में लाया जाए.

-           राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों के रूप में संवौधानिक रूप से अधिसूचित 14 जिलों में जिस प्रकार उस जिले के जनजाति, मूलवासी सदान वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए जिला रोस्टर के आधार पर तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों पर नियुक्ति के लिए अगले दस सालों तक आरक्षित कर दिया गया है. उसी प्रकार राज्य के 11 जिलों में जो अधिसूचित नहीं किए गए हैं वहां भी मूलवासी-सदान और जनजाति के लिए नियोजन को फ्रीज कर दिया जाए.

-           राज्य के 11 जिलों में तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों पर नियुक्ति के लिए भारत के किसी भी राज्य का कोई अभ्यर्थी नौकरी पा सकता है. इस नियम को खत्म कर दिया जाए.

-           जिला रोस्टर के आधार पर ही आरक्षण और तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के पदों पर नियुक्तियां करना सुनिश्चित की जाए.

-           राज्य में स्पष्ट तौर पर विभागवार और पदवार नियोजन नीति बनायी जाए ताकि राज्य के मूलवासी-सदान और जनजाति समुदाय की जनता के साथ न्याय हो सके और राज्य में व्याप्त आक्रोश को नियंत्रित किया जा सके.

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