बोधगया में नीतीश ने की तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाईलामा से भेंट, किया पुस्तक का विमोचन

Submitted by NEWSWING on Mon, 01/08/2018 - 10:09

Gaya : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को बोधगया में तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाईलामा से भेंट की और उनके साथ एक पुस्तक भी जारी की. दो जनवरी से बोधगया में ठहरे हुए दलाईलामा ने कालचक्र मैदान में मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें आशीर्वाद के तौर पर बुद्ध की प्रतिमा और अंगवस्त्रम भेंट किये. बाद में दोनों ने मिलकर ‘साइंस एंड फिलोस्फी इन द इंडियन बुद्धिस्ट क्लासिक्स’ जारी किया. यह विभिन्न खंडों वाले एक संस्करण का पहला भाग है जिसमें लौकिक विश्व के बारे में वैज्ञानिक पर्यवेक्षण और बौद्ध साहित्य के ज्ञान पर प्रकाश डाला गया है.

विभिन्न भाषाओं में अनुवादित की जायेगी पुस्तक

नीतीश ने कहा चार खंड वाली पुस्तक को विभिन्न भाषाओं में अनुवादित किया जायेगा. हिंदी भाषा में अनुवादित होने पर अधिक से अधिक संख्या में लोग बौद्ध दर्शन का लाभ उठा सकेंगे. भगवान बुद्ध के विचारों का वैज्ञानिक विश्लेषण पुस्तक में समाहित है. पहला खंड भौतिक दुनिया, दूसरा खंड मनोविज्ञान है जबकि तीसरे व चौथे खंड में विशेष रूप से बुद्ध की दार्शनिक विरासत की व्याख्या की गई है.

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नीतीश ने की आध्यात्मिक नेता दलाईलामा की प्रशंसा

नीतीश ने बुद्ध के वैज्ञानिक चिंतन से भारतीय युवकों को अवगत कराने के लिए आध्यात्मिक नेता की प्रशंसा की और कहा कि ऐसी भूमि से जुड़ा होना हर बिहारवासी के लिए गर्व की बात है जहां बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ क्योंकि उनके चिंतन ने दुनियाभर में लोगों को प्रेरणा दी. नीतीश ने कहा कि जब कभी दलाईलामा बोधगया आते हैं मुझे बड़ा हर्ष होता है. उनके उपदेश से असंख्य लोग प्रेरित हुए और उनमें बदलाव आया. मुझे आशा है कि नयी पुस्तक, जो उनके निरीक्षण में तैयार हुई है, विश्व में शांति के संवर्धन के लिए प्रेरणा देगी.

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दलाईलामा ने नीतीश को भेंट की तिब्बती परंपरा की तस्वीर

वहीं दलाईलामा ने नीतीश कुमार को नालंदा के आचार्यों की तिब्बती परंपरा में उकेरी गयी एक तस्वीर भेंट की. दलाईलामा ने अपने संबोधन में कहा कि नीतीश कुमार ने पटना में बुद्ध स्मृति पार्क के कार्यक्रम में आमंत्रित किया था और वे हमारे आमंत्रण पर बोधगया आ गए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नालंदा के बौद्ध विद्धानों ने ही तिब्बती बौद्ध ग्रंथ कंग्यूर व तेग्यूर की रचना की थी. इस कारण तिब्बत में बौद्ध धर्म पहुंचा और आज विश्व के कई देशों में फैल गया है.

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