नासा की खोज : अंतरिक्ष में एक साल रहे, तो शक्ल-सूरत बदल जायेगी 

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 03/17/2018 - 17:55

Nw desk : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने दावा किया है कि अंतरिक्ष में अगर आप एक साल रहेंगे, तो आपकी शक्ल-सूरत के साथ-साथ जीन में भी बदलाव होगा. नासा ने यह बात दो जुड़वां भाइयों पर रिसर्च करने के बाद कही है. 10 से ज्यादा वैज्ञानिकों की टीम केली भाइयों के आंत के बैक्टीरियाहड्डियों और इम्यून सिस्टम की जांच कर रही है, रिसर्च के नतीजे 2018 में ही जारी किये जायेंगे. नासा ने इस संबंध में पांच बार अंतरिक्ष की यात्रा कर जा स्कॉट केली और उनके हमशक्ल भाई मार्क केली पर प्रयेाग किया है. प्रयोग के अनुसार मार्च 2015 में स्कॉट केली को छठी बार लगभग साल भर के लिए अंतरिक्ष में भेजा गया. एक मार्च 2016 को  धरती पर उनकी वापसी हुई.

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अंतरिक्ष में 11 महीने रहने से स्कॉट के शरीर में बदलाव देखने को मिले

अंतरिक्ष में 11 महीने रहने से स्कॉट के शरीर में गजब के बदलाव देखने को मिले. नासा के अनुसार स्कॉट केली के सात फीसदी जीन धरती पर लौटने के बाद भी पुरानी और सामान्य अवस्था में नहीं लौट सके. शोध के क्रम में स्कॉट को अंतरिक्ष में भेजने से पूर्व कई टेस्ट किये गये. उनके अंतरिक्ष से लौटने के बाद हूबहू वही टेस्ट दोबारा किये गये. टेस्ट के नतीजों को स्कॉट के हमशक्ल जुड़वां भाई मार्क केली से मिलाया गया. नासा की एनालिसिस में पता चला कि अंतरिक्ष में रहने की वजह से स्कॉट के ज्यादातर जीन बदल गये. हालांकि 93 फीसदी जेनेटिक गुण धरती पर लौटने के बाद पुरानी अवस्था में आ गये, लेकिन सात फीसदी जीन बदले हुए मिले. बदले हुए जीन कम से कम पांच जैविक अनुवांशिक गुणों से जुड़े हुए हैं.

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अंतरिक्ष में भारहीनता, विकीरण, तनाव के कारण शरीर में बड़े बदलाव होते हैं

वैज्ञानिकों के अनुसार अंतरिक्ष में भारहीनता, विकीरण, तनाव और भोजन में व्यापक बदलाव के कारण शरीर में कई किस्म के बड़े बदलाव होते हैं.  इनका असर मनुष़्कय के  डीएनए और आरएनए पर भी पड़ता है. अंतरिक्ष यात्रा से पहले स्कॉट और मार्क की जिनोम सीक्वेंसिंग काफी हद तक एक जैसी थी, लेकिन अंतरिक्ष यात्रा ने इसे बदल दिया.  बताया जा रहा है कि जुड़वां भाइयों पर हो रहे शोध से अंतरिक्ष में इंसान के शरीर के व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी.

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