मध्य प्रदेशः चार महीने की मासूम से रेप-हत्या के दोषी को फांसी, 23 दिनों में आया फैसला

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 05/12/2018 - 16:36

Indore: देश में महिलाओं और बच्चियों के प्रति बढ़ते अपराध के बाद कानून में हुए संशोधन का असर दिखने लगा है. मध्यप्रदेश के इंदौर जिला कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में सजा सुनाते हुए नजीर पेश की है. कोर्ट ने 4 महीने की मासूम बच्ची के साथ रेप और उसकी निर्मम हत्या करने वाले शख्स को सजा-ए-मौत दी है. हालांकि यह साफ नहीं है कि सजा पॉक्सो ऐक्ट में संसोधन अध्यादेश के तहत दी गई है या नहीं. बता दें कि 20 अप्रैल को मध्य प्रदेश के रजवाड़ा क्षेत्र में एक चार महीने की बच्ची के साथ बर्बरता से रेप करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई. ये शायद पहला मौका होगा कि एक महीने के अंदर ऐसे संगीन जुर्म पर फैसला आया हो. जज ने 7 दिन तक सात-सात घंटे सिर्फ इसी केस को सुना और 21 दिन में सुनवाई पूरी होने के बाद 23वें दिन फैसला सुना दिया. शनिवार को आरोपी नवीन को पुलिस कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट लेकर पहुंची. वहां पर नवीन को कोर्ट रूम नंबर 55 में पेश किया गया. सुरक्षा कारणों से कोर्ट रूम के भीतर मीडियाकर्मियों को जाने पर रोक लगा दी गई थी.

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गौरतलब है कि दूधमुंही बच्ची के साथ हुए इस हैवानियत ने आम लोगों के साथ-साथ पुलिसकर्मियों को भी सकते में डाल दिया था. घटना को लेकर लोगों में खासा रोष था. यहां तक कि  मामले की सुनवाई के लिए वकील कोर्ट में आरोपी का पक्ष रखने को भी तैयार नहीं थे. इंदौर बार असोसिएशन ने किसी भी बलात्कार के आरोपी का केस न लड़ने का फैसला किया था.

23 दिनों में आया फैसला

गैरतलब है कि ये वारदात 20 अप्रैल की अहले सुबह की है. जब राजवाड़ा गेट से कुछ दूरी पर सो रहे परिवार ने बच्ची के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. जिसके बाद पुलिस को शिवविलास पैलेस के एक कॉम्पलेक्स में बच्ची का शव मिला. जांच में बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की पुष्टी हुई थी. जिसके बाद सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुलिस आरोपी की पहचान करने में सफल रही और त्वरित कार्रवाई करते हुए 12 घंटों के अंदर उसे धर-दबोचा था. बता दें कि आरोपी नवीन पीड़ित परिवार का रिश्तेदार था और घटना को अंजाम देने से पहले उसका बच्ची की मां से झगड़ा भी हुआ था.

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इस विभत्स घटना को लेकर लोग इतने गुस्से में थे कि कोर्ट में पेशी से पहले लोगों ने जमकर आरोपी की धुनाई कर डाली. पुलिस ने किसी तरह से उसे भीड़ से बचाते हुए कोर्ट में पेश किया. हालांकि इस दौरान मीडिया को कोर्ट में घुसने की इजाजत नहीं दी गई थी.

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