झारखंड और बिहार में मनरेगा की सबसे कम मजदूरी, काम नहीं करना चाहते मजदूर

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 04/17/2018 - 15:04

Pravin kumar

Ranchi : देशभर में जहां प्रतिवर्ष महंगाई के अनुरूप मजदूरी में इंक्रीमेंट की जाती है. साथ ही सरकार के द्वारा संचालित योजना का स्टीमीट भी महंगाई के अनुरूप बढ़ाया जाता है, वहीं झारखंड, बिहार सहित कुछ राज्यों के मनरेगा मजदूरों की मजदूरी न बढ़ना सरकार के नजरिया को परिलक्षित करता है. केन्द्र सरकार के द्वारा प्रतिवर्ष मनरेगा योजना में काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी निर्धारित की जाती है. वर्ष 2018-19 में मनरेगा मजदूरी की दर केन्द्रीय ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा जारी किया गया, जिसमें झारखंड-बिहार सहित 10 राज्यों की मनरेगा मजदूरों की मजदूरी में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई. झारखंड में वर्ष 2017-2018 में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी एक रुपया बढ़ाई गई थी और इस वर्ष इसमें किसी भी तरह की वृद्धि नहीं की गई है. मनरेगा मजदूरों को राज्य में जो मजदूरी दी जाती है वह न्यूनतम मजदूरी से भी कम है. ऐसे में सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना का मजदूरों के द्वारा भी निंदा की जाती रही है.

झारखंड जैसे राज्य जहां प्रतिवर्ष काम की तलाश में ग्रामीण ईंट भट्ठे से लेकर जोखिम भरे काम करने के लिये दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं, वैसे में सरकार के द्वारा मनरेगा योजना में मजदूरी न बढ़ना राज्य से श्रमिकों के पलायन का कारण बन रही है. आज भी राज्य के ग्रमीणा अंचल से हजारों लोगों का पलायन धान कटनी के बाद बदस्तूर जारी है. ऐसे में केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा पलायन रोकने में सहयोग करने वाली मनरेगा योजना का बेहतर संचालन की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है.

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क्या कहते हैं जेम्स हेरेंज राज्य संयोजक झारखंड नरेगा वाच

झारखंड में मनरेगा योजना की स्थिति काफी दयनीय है. राज्य के मजदूर इसमें काम नहीं करना चाहते, इसका कारण है कि न्यूनतम मजदूरी से भी कम मनरेगा में मजदूरी का भुगतान किया जाता है. वहीं काम करने वाले मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिलती है. पिछले वर्ष सितंबर और अक्टूबर महीने में मजदूरी भुगतान में एक महीना विलंब हुआ. ऐसा ही मार्च महीने में भी हुआ है. राज्य में मनरेगा जैसी स्कीम रहते हुये भी मजदूर का दूसरे राज्यों में पलायन हो रहा है.

झारखंड जैसे राज्य में जहां पिछले दो साल में मनरेगा की मजदूरी में एक रुपया की बढ़ोत्तरी की गई थी, वहीं राज्य में न्यूनतम मजदूरी की दर 230 रुपया है. वैसा ही हाल बिहार का भी है, यहां न्यूनतम मजदूरी 237 रुपये है, मगर मनरेगा में 168 रुपये, यूपी में न्यूनतम मजदूरी 228 रुपये और मनरेगा में 175 रुपया ही दिया जाता है. सरकार के इस महत्वकांक्षी योजना में भी मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम मजदूरी मिल रहा है.

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किस राज्य में क्या है न्यूनतम कृषि मजदूरी, 2018-19 में मनरेगा मजदूरी दर में की गई वृद्धि

झारखंड                           230     168                  0

बिहार                              237          168              0

अंडमान निकोबार           297         250              14

आंध्र प्रदेश                      302          205              8

अरुणाचल प्रदेश             200          177              0

असम                             250          189              6

चंडीगढ़                          350         273              8

छत्तीसगढ़                      234         174              2

दादर और नगर हवेली   304        220              2

दमन और दीव              268        197              2

गोवा                             324        254              14

गुजरात                        298       194              2

हरियाणा                      318       281              4

हिमाचल प्रदेश            210       184              5

जम्मू और कश्मीर       225       186              7

कर्नाटक                     269     249              13

केरल                         287     271               13

लक्ष्यदीप                    401     248             11

मध्य प्रदेश                230      174              2

महाराष्ट्र                    194     203              2

 मणिपुर                    112     209              5

मेघालय                    189     181              6

मिजोरम                   115     194              0

 नागालैंड                 115          177          0

उड़ीसा                    213         205         6

 पांडिचेरी                223     177             19

 पंजाब                    294           240       7

राजस्थान                213     192              0

सिक्किम                300     177              0

तमिलनाडु             200     205            19

तेलंगाना                200     205             8

त्रिपुरा                   307     177              0

उत्तराखंड             158     175              0

उत्तर प्रदेश           228     175             0

प. बंगाल              234     191             11

क्या कहती है नरेगा संघर्ष मोर्चा के सहसंयोजक अंकिता अग्रवाल

जिस प्रकार नरेगा में सरकार के द्वारा मजदूरी दी जा रही है, वह राज्यों में प्रचलित न्यूनतम मजदूरी से भी कम होने के कारण मजदूरों को काम करने में परेशानी होती है. न्यूनतम मजदूरी के सवाल पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी की है कि अगर किसी को न्यूनतम मजदूरी से कम मजदूरी दी जाती है तो वह बंधुवा मजदूर के समान है. सरकार को चाहिए कि मनरेगा जैसी योजना में भी इसका ख्याल रखे.

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