बुधवार को होगा लालू की किस्मत का फैसला, कोर्ट के फैसले पर टिकी सबकी निगाहें

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 01/02/2018 - 19:26

Ranchi: तीन जनवरी 2018 का दिन बिहार की राजनीति को नई दिशा दे सकता है. आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले मामले में कितने साल की सज़ा होगी, हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं. हर कोई यही सोच रहा है कि आखिर कल क्या होगा ? लालू यादव को कितनी सजा होगी ? अगर लालू को सजा होती है तो बिहार में राजद का क्या होगा ? क्या बिहार में पार्टी को तेजस्वी और तेज प्रताप संभाल पायेंगे? ऐसे कई सवाल हैं जो राजद कार्यकर्ताओं और सियासत के जानकारों की जेहन में तैर रहे हैं. यह भी सवाल उठ रहा है कि राजद अपने विरोधियों को कैसे जवाब देगा, इसकी तैयारी तो उसके नेता कर रहे हैं लेकिन लालू के बग़ैर बिहार की राजनीति आसान होगी ये एनडीए के नेता अभी से ही कहने लगे हैं. 

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लालू के बगैर ही विरोधियों को जवाब देने का दावा कर रहा राजद

आरजेडी नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम भी लालू की कमी के बावजूद उनकी छाया से विरोधियों को जवाब देने का दावा कर रहे हैं. राजद नेता भले ही दावा कर रहे हैं कि बगैर लालू यादव के उनके छाया के सहारे विरोधियों को जवाब दिया जाएगा, लेकिन लालू यादव के जेल में रहते 2019 में लोकसभा चुनाव में राजद के लिए राह आसान नहीं होगी ये उनके विरोधियों का मानना है. लालू के जेल जाने की सूरत में पार्टी की एकजुटता के अलावा विरोधियों को जवाब देना भी आसान नहीं होगा. विरोधी तो पहले ही इस बात पर नज़र टिकाए हुए हैं कि लालू यादव जैसा विरोधी अगर चुनाव के समय जेल में रहे तो इसका फ़ायदा भला कैसे नहीं मिलेगा.

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असंतुष्टों को एकजुट रखना होगी लालू परिवार के सामने बड़ी चुनौती

लालू के बगैर पार्टी को संभालने और साथ ही असंतुष्टों को एकजुट रखने की चुनौती बहुत बड़ी होगी और इससे निबटना भी आसान नहीं होगा. जानकार कहते हैं कि पार्टी के अंदर असंतुष्टों को संभालना तेजस्वी और तेजप्रताप के बस की बात नहीं होगी, लेकिन फिर भी अब राजद के अलावा बिहार के बाकी राजनीतिक दलों की निगाहें लालू परिवार पर टिकी रहेंगी. खासकर बड़ी बेटी मीसा भारती, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप की ओर पूरी पार्टी आशा भरी निगाहों से देखेगी.

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मंगलवार को भी लालू से नहीं मिल सके राजद नेता

सजा पर फैसले एक दिन पहले लालू से मंगलवार को होटवार जेल में पार्टी का कोई भी नेता नहीं मिला. जेल मैनुअल का हवाला देकर सुरक्षाबलों ने किसी भी नेता को लालू से मिलने नहीं दिया. बिहार के पूर्व मंत्री डॉ अब्दुल गफ्फूर लालू से मिलने पहुंचे थे. लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया. इसके अलावा पूर्व विधायक उदय प्रकाश गोइलप्रो मो. ताहिरप्रदेश महासचिव प्रो खालिदबिजेन्द्र प्रसाद यादवअनिल सिंह आजादअब्दुल गफार, हेमंत वर्माजयकिशन यादव सहित अन्य नेता लालू से मिलने पहुंचे थे. लेकिन किसी को लालू से मिलने नहीं दिया गया.

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