लंबोदर महतो प्रशासनिक अधिकारी रहते लगा रहे हैं आजसू पार्टी के बैनरों और पोस्टरों पर अपनी तस्वीरें

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 02/12/2018 - 16:52

Akshay Kumar Jha

Boakro: जेएमएम के विधायक योगेंद्र महतो को कोयला चोरी के केस में सजा होते ही गोमिया विधानसभा का राजनीतिक पारा धीरे-धीरे ऊपर चढ़ रहा है. हड़बड़ी इतनी है कि प्रशासनिक अधिकारी रहने के बावजूद अपनी तस्वीर पोस्टर और बैनरों पर लगवाने से लोग चूक नहीं रहे हैं. बात हो रही है जल संसाधन तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के आप्त सचिव लंबोदर महतो की. लंबोदर महतो भले ही गोमिया विधानसभा में एक राजनीतिक शख्सियत के रूप में अपने-आप को स्थापित करने में लगे हुए हैं, लेकिन वो भूल जा रहे हैं कि वो एक प्रशासनिक अधिकारी भी हैं. उन्होंने अभी तक इस पद से ना रिजाइन किया है और ना ही रिटायर हुए हैं. बावजूद इसके वो आजसू के पोस्टर और बैनरों में साफ दिखाई दे रहे हैं.

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पेटरवार और तेनूघाट में लगा लंबोदर महतो का पोस्टर और बैनर

कसमार, पेटरवार और गोमिया में लंबोदर महतो को आप कभी भी आते-जाते देख सकते हैं. यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि लंबोदर महतो आगामी चुनाव में आजसू पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले हैं. अपनी राजनीतिक छवि बनाने के लिए उन्हें इन इलाकों में हर खुशी और गम के मौके पर देखा जा सकता है. रविवार को तेनूघाट के गेस्ट हाउस में आजसू पार्टी की बुद्धिजीवी मंच का वन भोज सह मिलन समारोह था. पार्टी की तरफ से लंबोदर महतो को ही कार्यक्रम का चीफ गेस्ट भी बनाया गया था. कार्यक्रम के मद्देनजर पेटरवार से लेकर तेनूघाट तक कुछ गेट बनाए गए थे. गेट पर आजसू पार्टी के चुनाव चिन्ह, बड़े अक्षरों में आजसू पार्टी के साथ लंबोदर महतो की बड़ी-बड़ी तस्वीर भी लगी हुई है. कार्यक्रम के दौरान मंच पर भी जो बैनर लगाए गए थे, उसपर मंत्री के आप्त सचिव के पद पर कार्यरत लंबोदर महतो की तस्वीर लगी हुई थी. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर किसी सरकारी पद पर रहते हुए किसी पदाधिकारी की तस्वीर पार्टी के प्रचार-प्रसार करने वाले बैनरों पर कैसे लग सकती है. 

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2005 से मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के हैं आप्त सचिव

लंबोदर महतो भले ही गोमिया विधानसभा क्षेत्र में अपने-आप को एक राजनीतिक शख्सियत के रूप में देख रहे हों, लेकिन  वो झारखंड सरकार के प्रशासनिक अधिकारी हैं. 2003 में गोला प्रखंड के बीडीओ थे. उसके बाद वो बुंडू अनुमंडल के एसडीएम भी बने. 2005 से वो चंद्रप्रकाश चौधरी के आप्त सचिव के रूप में काम कर रहे हैं. यह बात किसी से छिपी नहीं है कि लंबोदर महतो के मंत्री के साथ काफी नजदीकी है. इसी नजदीकी की वजह से आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें आजसू पार्टी की तरफ से टिकट मिलना तय माना जा रहा है.

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अपने पद की गरिमा समझनी चाहिएः लक्ष्मण नायक (बीस सूत्री कार्यक्रम के उपाध्यक्ष, बोकारो )

किसी पदाधिकारी को अपने पद की गरिमा समझनी चाहिए. जब वो एक प्रशासनिक अधिकारी हैं, तो इस तरह आजसू या किसी भी पार्टी के बैनर और पोस्टरों की शोभा नहीं बनना चाहिए. ऐसा करना लंबोदर महतो ही नहीं, बल्कि किसी भी अधिकारी के लिए गलत है. अगर उन्हें राजनीति करनी है, तो पद से पहले इस्तीफा देना चाहिए बाद में राजनीति करनी चाहिए.

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हड़बड़ी में है लंबोदर महतो: तसउव्वर आलम उर्फ चरका (युवा कांग्रेस अध्यक्ष,गोमिया विधानसभा )

ऐसा करना किसी भी अधिकारी को शोभा नहीं देता है. अगर उन्हें राजनीति ही करनी है, तो पहले प्रशासनिक पद का मोह छोड़ें. जनता से जुड़कर राजनीति करें ना कि अपने ऑफिस में बैठकर. आजसू केंद्रीय नेतृत्व को इस बारे सोचना चाहिए कि ऐसा करना सही है या गलत.

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