बेंगलुरु से 'जिंदा दिल' लाया गया कोलकाता, झारखंड के मरीज की बची जान

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 05/22/2018 - 11:13

Kolkata: एकबार फिर मेडिकल साइंस के एडवांस टेक्निक ने एक मरीज की जान बचायी है. बेंगलुरु में ब्रेन डेड एक युवक के हृदय को हवाई रास्ते से कोलकाता लाकर झारखंड के 39 साल के एक व्यक्ति में सफल प्रतिरोपण किया गया. देवघर के सोनारायठाढ़ी गांव के निवासी दिलचंद सिंह का हृदय प्रत्यारोपित किया गया. पूर्वी व उत्तर पूर्वी भारत में ऐसा पहली बार हुआ जब चार्टर प्लेन के जरिये दूसरे राज्य से जिंदा हृदय को लाकर उसे प्रत्यापित किया गया. हार्ट ट्रांसप्लांट करनेवाले हॉस्पीटल के एक सिनियर अधिकारी ने बताया कि 19 मई को भीषण दुर्घटना का शिकार हुए एक युवक को बेंगलुरु के अस्पताल में सोमवार दिमागी रूप से मृत घोषित कर दिया गया, जिसके बाद झारखंड के व्यक्ति को बचाने की कवायद शुरू की गई. 

ग्रीन कॉरिडोर के जरिये समय पर पहुंचा हार्ट

ब्रेन डेड युवक के अभिभावकों द्वारा उसके अंग दान करने की मंजूरी देने के बाद हृदय प्रतिरोपण करने वाले डॉक्टरों की एक टीम ने डोनर का हार्ट उसके शरीर से सुबह करीब सात बजे निकाला. इसके बाद एक ग्रीन कॉरिडोर के रास्ते हृदय को अस्पताल से बेंगलुरु हवाईअड्डे ले जाया गया और वहां से हवाई रास्ते की मदद से कोलकाता भेज दिया गया.  कोलकाता यातायात पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जैसी ही यह हृदय 10 बजकर 45 मिनट पर नेताजी सुभाष चंद्र अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा वैसे ही इसे ग्रीन कॉरिडोर की मदद से आनंदपुर के फोर्टिस अस्पताल लाया गया. करीब 18 किलोमीटर की इस दूरी को केवल 22 मिनट में पूरा कर लिया गया.   

देवघर के दिलचंद को मिला दिल

देवघर के सोनारथारी का रहने वाला दिलचंद 2012 से हृदय रोग से पीड़ित है. आठ भाइयों में वो बड़ा है. फिलहाल अस्पताल में उनके भाई उमेश सिंह हैं. उमेश सिंह ने कहा कि उन लोगों ने बहुत ही कष्ट उठाये हैं. उम्मीद है कि भगवान की कृपा से अब कष्ट दूर होंगे और उनके भाई पूरी तरह से स्वस्थ  हो जायेंगे.

 बता दें कि साढ़े चार घंटे में ये सारी प्रक्रिया पूरी हुई. सुबह सात बजे बेंगलुरु स्थित फोर्टिस अस्पताल में दानदाता के शरीर से हृदय निकाला गया. सुबह लगभग ‍साढ़े आठ बजे हार्ट को लेकर चार्टर विमान बेंगलुरु से कोलकाता के लिए रवाना हुआ. कोलकाता हवाई अड्डा पर विमान सुबह 11.08 बजे पहुंचा. ग्रीन कॉरिडोर से मात्र 18 मिनट में सुबह 11.26 बजे हार्ट अस्पताल पहुंचाया गया. अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम ने दो घंटे तक हृदय रोग से पीड़ित मरीज का ऑपरेशन किया और यह हृदय प्रतिरोपण सफल रहा. हॉर्ट ट्रांसप्लांट कराने के बाद अगले 24 से 48 घंटे तक मरीज डॉक्टर्स की निगरानी में है और फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर है.

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