मानवाधिकार हनन के लिए झारखंड प्रयोगशाला बन गया है - स्टेन स्वामी

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 04/25/2018 - 13:33

स्टेन स्वामी

लोकतंत्र बचाओ मंच का राजभवन के समक्ष धरना कल

राज्य में संवैधानिक अधिकारों समेत मानवाधिकारों पर लगातार हमला बढ़ता जा रहा है. झारखण्ड निर्माण के तुरंत बाद तपकरा में कोयलकारो परियोजना का विरोध कर रहे लोगों पर आरम्भ हुआ गोली चालन बदस्तूर जारी है. राज्य में हुये दर्जनों गोली कांड लोकतंत्र की असली तस्वीर पेश कर रही है. हाल में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में न्यायालय द्वारा किये गये संशोधन के विरोध में आहूत भारत बंद के दौरान जिस तरह राज्य की पुलिस छात्रों के साथ ही साथ छात्राओं के छात्रावास के कमरे में घुसकर उनपर बर्बर ढंग से लाठी चार्ज किया, जिससे कई छात्राएं गंभीर रूप से घायल हो गयीं. इससे राज्य सरकार के लोकतंत्र के दावे के असलियत को समझा जा सकता है. उलटे कई लोगों पर मुकदमे हुए, कई लोग गिरफ्तार हुए और कई लोगों की तलाशी जारी है.

झारखंड के जेलों में निर्दोषों को डालने की बात नई नहीं है

 स्टेन स्वामी ने कहा झारखंड के जेलों में निर्दोषों को डालने की बात नई नहीं है. राज्य में सैकड़ो आदिवासी व मूलवासी नौजवान विभिन्न जेलों में बंद है. अभी कुछ दिन पहले ही विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के झारखण्ड राज्य संयोजक दामोदर तूरी को झूठे आरोप में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया है. उनपर आरोप है कि मजदूर संगठन समिति के कर्त्ता-धर्त्ता हैं और यह संगठन गैर-कानूनी कार्यवाही में संलग्न है, जबकि सच्चाई यह है कि दामोदर तूरी इस संगठन के साधारण सदस्य भी नहीं हैं. ना ही यह संगठन गैर-कानूनी कार्यों में सक्रिय है. यह सरकार द्वारा निबंधित व मान्यता प्राप्त मजदूरों का संगठन है. यह संविधान में वर्णित अधिकारों के तहत ही मजदूरों के हित में काम करता आ रहा है.

पुलिस द्वारा की गई हत्या को मुठभेड़ का नाम देने का मजदूर संगठन ने किया था विरोध

हाल-फिलहाल गिरिडीह जिले के पीरटाड के ढोलकट्टा के निवासी डोली मजदूर मोतीलाल बास्के की पुलिस द्वारा की गई हत्या को मुठभेड़ का नाम देने का मजदूर संगठन समिति ने जोरदार विरोध किया था. इस दमन के विरोध में दामोदर तुरी भी मजदूरों के साथ थे. यह सरकार को नागवार गुजरी. वह दामोदर तूरी को जेल भेज दी. जेल में भी उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है. सबक सिखाने की नियत से उन्हें तनहायी में डाला गया है, जहां ना तो रोशनी की व्यवस्था है, ना बुनियादी जरूरत की चीजें दी जा रही है. 

  झारखंड सरकार के द्वारा यह सब विरोधियों को सबक सिखाने के लिए किया जा रहा है. सरकार प्रतिरोध की आवाज को हर हाल में समाप्त करने की तैयारी कर रखी है. राज्य सरकार देश भक्ति व अंधराष्ट्रवाद की आड़ में कुछ भी करने को तैयार है. सरकार की नीतियों से भिन्न विचार वाले संगठन, व्यक्ति या कोई दल देशद्रोही, असमाजिक व विकासविरोधी हैं. सदियों से आदिवासी समाज में चली आ रही पत्थलगड़ी की परम्परा भी सरकार की नजर में देशद्रोह है. इससे ही हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है.

आमजनों के सरोकार से सरकार को मतलब नहीं  है

राज्य सरकार की प्राथमिकता कॉरपोरेट  जगत है आमजनों के सरोकार से सरकार को मतलब नहीं  है. सरकार की प्राथमिकताएं बदलती जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर इन प्राथमिकताओं की राह में हक मांगने वालों या प्रतिवाद करने वालों को सबक सिखाने के लिए सरकार किसी हद तक जाने को तैयार दिख रही है. झारखण्ड में ये दोनों चीजें साफ-साफ देखी जा रही हैं. राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को इस बात से ही समझा जा सकता है कि वह टाटा, जिंदल, मित्तल, अडानी, अंबानी समेत देशी-विदेशी कम्पनियों को जल, जंगल, जमीन, खान-खनिज, नदी-नाला सहित सस्ता श्रम उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास कर रही है. इसके लिए पेसा कानून को दरकिनार करते हुए लैण्ड बैंक और आदिवासी विकास समिति का निर्माण किया जा रहा है.

सरकार के जन विरोधी नीतियों के विरूद्ध लोकतंत्र बचाओ मंच की ओर से राजभवन के समक्ष गुरूवार को धरना आयोजन किया गया है. जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, महिला-पुरूष, प्रगतिशील जन, साहित्यकार, मजदूर-किसान, प्रगतिशील जनसंगठन, राजनीतिक दल के कार्यकर्ता शामिल होंगे. 

(लेखक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता हैं और यह उनके निजी विचार हैं)

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