जेपीएससी है स्वतंत्र संवैधानिक संस्था, पर अब सरकार लेने लगी है इसके फैसले

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 02/10/2018 - 21:40

Kumar Gaurav
Ranchi : छठी जेपीएससी का विवादों से गहरा नाता हो चला है. तीन बार सिर्फ पीटी परीक्षा का रिजल्ट जारी किया गया है. इसके बाद भी जेपीएससी ये दावा नहीं कर सकती कि इस रिजल्ट पर मुख्य परीक्षा आयोजित करा ली जाएगी. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि अब जेपीएससी के बजाय इसके सभी निर्णय सरकार के कैबिनेट मिटिंग में तय होते हैं. पीटी परीक्षा की पहली रिजल्ट आने के बाद जब विरोध हुआ तब भी सरकार के आदेश  पर ही एडिशनल  रिजल्ट जारी किया था. इसबार फिर से कैबिनेट मीटिंग  में ही कट ऑफ जारी कर दिया है. उल्लेखनीय है कि जेपीएससी एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, जिसका काम झारखंड सरकार के रिक्त पदों के लिए परीक्षा और इंटरव्यू लेना  है. साथ ही इनके रिजल्ट जारी करती है. 

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रिजल्ट  भी रद्द करवा  दिया 

विधानसभा की कार्यवाही को तीन वरीय पदाधिकारियों के बर्खास्तगी की मांग को लेकर बाधित रखा. सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की, पर एक दिन जेपीएससी को लेकर विरोध हुआ तो सरकार ने जेपीएससी को तुरंत परीक्षा रद्द  करने के लिए विचार करने के आदेश दे दिया. रातों रात उस एक नोटिस पर संज्ञान लेते हुए रद्द  कर दिया. जेपीएससी अगर इसी स्पीड के साथ काम करती तो सरकार को किसी भी तरह के संज्ञान लेने की जरुरत नहीं पड़ती. पर जेपीएससी सरकार के आदेश  पर ही काम करती है. क्योंकि स्टूडेंटस के लगातार आंदोलन के बावजूद जेपीएससी को संज्ञान लेते हुए नहीं पाया गया.

दो बार पीटी परीक्षा के लिए कट आॅफ कैबिनेट ने ही तय किया

छठी जेपीएससी के पीटी परीक्षा के लिए अब तक कुल तीन बार रिजल्ट जारी किया जा चुका है. तीन बार में दो बार रिजल्ट के लिए कटऑफ झारखंड सरकार द्वारा तय किए गये हैं. पहली बार कहा था कि जेनरल के सबसे कम मार्क्स  के साथ पास छात्र के बराबर जितने भी लोगों के अंक हैं सभी को पास कर दिया जाए. दूसरी बार पासिंग मार्क्स  के आधार पर सभी को पास करने के लिए निर्णय कैबिनेट में ही लिया गया. 

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जेपीएससी के 12.512 नियुक्तियों पर सीबीआई जांच के थे आदेश, मंत्रियों के रिश्तेदारों की हुई थी नियुक्ति 

पहले तीन बार हुए जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के रिजल्ट पर भी गौर करें तो पता चलेगा कि सरकार के तत्कालीन मंत्रियों पर अपने रिश्तेदार  और नातेदार को इन पदों पर नियुक्ति करवाने के आरोप लगे थे. जिसके बाद उन सभी परीक्षाओं के जांच के आदेश  भी जारी कर दिए गए थे. इसमें तीसरे जेपीएससी के 63 पद, सेकेंड जेपीएससी 172 पद, तीसरी जेपीएससी लेक्चरर नियुक्ति परीक्षा  750 पद, अस्सिटेंट और जूनियर इंजीनियर नियुक्ति 335 पद, शिक्षक  नियुक्ति परीक्षा 9735, चिकित्सक नियुक्ति परीक्षा 1070 पद, डिप्टी रजिस्ट्रार नियुक्ति परीक्षा 02 पद, सहकारिता प्रसार पदाधिकारी परीक्षा 325 पद, बाजार पर्यवेक्षक परीक्षा 53 पद, और राजकीय फार्मेसी संस्थान लेक्चरर नियुक्ति परीक्षा 07 के लिए हुई परीक्षा शामिल हैं.

पहले ही बेंच दी जाती है सीटें

छात्र नेता मनोज यादव ने आरोप लगाया है कि जेपीएससी नियुक्ति करने के नाम पर प्रक्रिया में ही उम्मीदवारों को फंसाए रखता है. नोटिफिकेशन  निकालने से पहले ही सारी सीटे लाखों में बेंच दी जाती है. जितने दिन में यहां एक सिविल सेवा की परीक्षा आयोजित होती है उतने में कम से कम एक उम्मीदवार चार बार ट्राई कर सकता है. पर आयोग उम्मीदवारों को पहले फंसाए रखता है बाद में उसकी उम्र निकल जाती है.

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