भारत-रूस की फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट डील कैैंसल, 2000 करोड़ रुपए डूबे

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 06/13/2018 - 15:58

NewDelhi  :  भारत की रूस के साथ नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट को डिवेलप करने की लगभग 610 अरब रुपए की डील टूट गयी है. खबरों के अनुसार इस डील के टूटने से भारत की 2000 करोड़ रुपए की शुरूआती रकम का भी नुकसान हुआ है. जानकारी के अनुसार डिफेंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन   (DRDO) ने दावा किया था कि उसके पास इस प्रॉजेक्ट के लिए जरूरी सभी टेक्नॉलजी मौजूद है और वे इसे अपने देश में ही डेवलप कर रहा है. इसी के आधार पर डील कैंसल किये जाने की बात कही जा रही है.  बता दें कि अगर डील नहीं टूटती तो भारत अमेरीका और चीन के बाद उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाता, जिनके पास फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट मौजूद हैं. हालांकि कहा गया है कि डील इस शर्त के साथ तोड़ी गयी है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इस फाइटर एयरक्राफ्ट को खरीदा जायेगा. इस डील में भारत की जरूरतों के अनुसार फाइटर एयरक्राफ्ट बनाया जाना था. इसके चार फ्लाइंग प्रोटोटाइप की डिलीवरी 2019-20 तक होनी थी. इसमें भारत में कम से कम 127 एयरक्राफ्ट का प्रॉडक्शन भी शामिल था. भारतीय वायु सेना की घटती ताकत को मजबूत करने के लिए रूस ने अपने 20 पुराने मिग 29 फाइटर जेट 2,000 करोड़ रुपये से कुछ अधिक में बेचने की भी पेशकश की है.  

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रूस ने भारत को फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट मिलकर डिवेलप करने की पेशकश की थी

 डील के लिए बातचीत में शामिल सूत्रों  के अनुसार इस प्रॉजेक्ट को लेकर प्रगति न होने की वजह DRDO का यह जोर देना था कि उसके पास इसके लिए जरूरी टेक्नॉलजी डिवेलप करने की क्षमता है. रूस ने भारत को फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट मिलकर डिवेलप करने की पेशकश की थी. इसके लिए अधिकांश रिसर्च भारत करने के साथ ही टेक्नॉलजी के पूरे ट्रांसफर पर भी सहमति बनी थी.जान लें कि भारत ने इस प्रॉजेक्ट के शुरुआती डिजाइन के लिए रूस को 29.5 करोड़ डॉलर यानी 2000 करोड़ रुपए का भुगतान किया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार  पीएमओ द्वारा इस साल की शुरुआत में इस प्रॉजेक्ट पर आयोजित उच्च स्तरीय मीटिंग में वायु सेना ने अपनी सभी जरूरतों को पूरा करने के रूस के प्रपोजल पर आशंका जताई थी.  इसके पूर्व एक मीटिंग में DRDO से डील को लेकर देश में मॉडर्न टेक्नॉलजी आने पर राय देने को कहा गया था. इस पर DRDO के प्रमुख एस क्रिस्टोफर द्वारा स्पष्ट जवाब दिये जाने से डील के रद्द होने का रास्‍़ता तैयार हो गया था.   

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