2014-17 के बीच 23 पुलिसकर्मी हुए शहीद, डीजीपी कह रहे 2018 में खत्म कर देंगे नक्सलवाद

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 01/13/2018 - 18:25

Chandi Dutta Jha

रांची : रघुवर सरकार ने अपने कार्यकाल में राज्‍य को नक्‍सल समस्‍या से मुक्‍त कराने का वादा किया था. साल 2017 को लक्ष्‍य मान कर सरकार ने झारखंड को नक्‍सल मुक्‍त करने का बीड़ा उठाया था, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया है. सरकार 2017 में नक्सलवाद को खत्म करने में नाकाम रही. अब सरकार ने एक साल का और समय लिया है. डीजीपी डीके पांडेय ने 10 जनवरी को दावा किया है कि 2018 तक राज्य पूरी तरह से नक्सल और उग्रवाद मुक्त होगा. लेकिन जो स्थितियां दिख रही है उसे देखकर तो यही लग रहा है कि यह साल भी आश्वासन में ही निकल जायेगा, क्योंकि नक्सली गतिविधियां राज्य में घटने के बजाए बढ़ती जा रही है. अलग झारखंड राज्य बनने के बाद 2000 से 2013 के आंकड़ों को अगर देखें तो पता चलता है कि 13 साल में हर साल 300 से ज्यादा नक्सली हमले हुए, वहीं 2013 से अक्टूबर 2017 तक राज्य में 1130 नक्सली वारदात हुए हैं. वहीं पुलिस ने 2014 से 17 सिर्फ 158 नक्सलियों को ही मारा है, जबकि इसी दौरान 23 पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं. आंकड़े बता रहे हैं कि नक्सलवाद के खात्मे का जो वादा सरकार ने किया था उसमें सरकार को थोड़ी भी सफलता नहीं मिली है. वहीं मुख्यमंत्री रघुवर दास मानते हैं कि नक्सलवाद पर कुछ हद तक अंकुश लगा है और आने वाले कुछ सालों में राज्य से नक्सलवाद का सफाया हो जायेगा.

17 साल में 5,688 नक्सली हमले, 510 पुलिस जवान शहीद

अलग झारखंड बनने के बाद 2001 से लेकर 2013 तक हर साल औसतन 300 से ज्‍यादा नक्सली हमले हुए हैं. इनमें कई बड़े हमले थे जिसमें बहुत ज्यादा जान माल का नुकसान हुआ. कई जांबाज पुलिस अफसर शहीद हो गये और सरकार को एक गंभीर चुनौती नक्‍सलियों की ओर से मिली. अमरजीत बलिहार, अजय कुमार, इंसपेक्‍टर इंदवार जैसे पुलिसकर्मियों की शहादत ने जनता में भय और मायूसी भी व्‍याप्‍त कर दिया. अगर अबतक के आंकड़े देखें तो 2001 से लेकर 2017 तक पुलिस रिकार्ड के अनुसार 5,688 नक्‍सली हमले और घटनायें हो चुकी हैं और अबतक 510 पुलिसकर्मी नक्‍सली हमलों में शहीद हो चुके हैं.

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17 साल में मारे गये 846 नक्सली

2001 से 2017 तक पुलिसिया कार्रवाई में 846 नक्‍सली भी मारे गये हैं. 17 साल में 1778 आम जन नक्‍सलियों के शिकार बने, जिनकी जानें इन हमलों में चली गयीं. वर्ष 2002 पुलिस के लिये काला वर्ष रहा. इस साल 69 पुलिसकर्मी नक्‍सली हमले में शहीद हो गये. राज्‍य बनने के बाद सबसे ज्‍यादा 92 नक्‍सली 2008 में पुलिस के हाथों मारे गये. 2007 से लेकर 2013 के बीच 985 आम लोगों को भी नक्‍सलियों ने मौत के घाट उतार दिया. इनमें अकेले साल 2007 में ही 175 लोगों की जान नक्‍सलियों ने ले ली.

2011 में 504 नक्सली घटनायें

झारखंड में 2011 में सबसे ज्‍यादा 504 नक्‍सली घटनायें हुई. वहीं 2007 से लेकर 2012 तक हर साल 400 से ज्‍यादा नक्‍सली हमले हुए. 2007 से लेकर 2013 तक हर साल 478, 426, 512, 496, 504, 404 और 349 नक्‍सली हमले हुए. 2013 से 2017 अक्‍टूबर तक 1130 छोटी बड़ी नक्‍सली वारदातें हुईं हैं. वहीं 2007 से 2013 के छह सालों में नक्‍सली हमलों में 222 पुलिसकर्मियों की जानें चली गयी. इन सालों में 456 नक्‍सली भी पुलिस के हाथो मारे गये. 

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2014-17 में 23 पुलिसकर्मी हुए शहीद

2014 से 2017 के बीच नक्‍सली वारदातों में कमी आना पुलिस के लिए भी कुछ हद तक अच्‍छा रहा, क्‍योंकि इन सालों में पुलिस ने अपना बचाव भी सफलता से किया. हाल के तीन सालों में नक्‍सलियों पर पुलिस दबिश काम कर रहा है और पुलिस को कम जानमाल का नुकसान उठाना पड़ा है. 2014-17 के बीच 23 पुलिसकर्मी शहीद हुए, 158 नक्‍सली मारे गये हैं, वहीं 237 लोगों की जान नक्‍सलियों ने ले ली है.

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