झारखंड में अक्सर नक्सलियों के निशाने पर रहते थे ट्रेन, 2012 से घटनाओं में आयी कमी     

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 01/22/2018 - 17:09

Chandi dutta jha

Ranchi : झारखंड में लंबे समय तक रेल भी नक्‍सलियों के निशाने पर रहा है. कई बार तो नक्‍सलियों ने यात्रियों सहित पूरे ट्रेन को ही अपने कब्‍जे में ले लिया था और घंटो उसे बंधक बनाये रखा. ऐसे हालात में पुलिस ने भी कोई खास एक्‍शन नहीं लिया क्‍योंकि इससे यात्रियों के हताहत होने का भय था. अंतत: नक्‍सलियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर सिस्‍टम को बौना साबित कर ट्रेन को मुक्‍त किया है.

झारखंड में नक्‍सलियों के गढ़ से होकर गुजरने वाली ट्रेनें उनके रहमोकरम पर ही गुजरती रही हैं. कुछ ऐसे वाकये भी हुये हैं, जिसमें ट्रेन की पटरियों को उड़ा कर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने का प्रयास किया गया है. हालांकि सौभाग्‍य से समय रहते इसका पता चल जाने पर कोई बड़ी घटना नहीं हुई है.

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नक्सली अपने गढ़ में रहते थे हावी

कुछ साल पहले तक चलती ट्रेन पर नक्‍सलियों ने अपने गढ़ में फायरिंग कर सुरक्षाकर्मियों को घायल करने या उनकी जान लेने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया है. जिससे उन इलाकों के जंगलों, पहाड़ों से गुजरते समय ट्रेन की सुरक्षा भगवान भरोसे रहती थी. भौगोलिक बनावट की वजह से नक्‍सली ट्रेन के सुरक्षाकर्मियों पर भारी पड़ते थे. 2001 से लेकर 2017 के आंकड़ों को देखें तो शुरूआती सालों में नक्‍सलियों के निशाने पर रेल रहा और ऐसे हालात 2011 तक रहे. अकेले 2003 में ही नक्‍सलियों ने रेलवे पर हमले के 27 घटनाओं को अंजाम दिया, जिसमें रेलवे की संपत्ति के साथ ही हथियार लूट और आगजनी और सुरक्षाकर्मियों पर हमले की कई घटनायें हुईं.

जबकि 2011 तक नक्‍सलियों ने हर साल तकरीबन एक दर्जन हमले ट्रेनों पर किये. इनमें से ज्‍यादातर मामलों में आगजनी की गयी और हथियार के साथ ही सुरक्षाकर्मी मुख्‍य रूप से निशाने पर रहे. इन सालों में सिर्फ 2008 ही एक ऐसा वर्ष रहा, जब रेलवे इनके हमलों से कुछ बचा रहा और इस साल सिर्फ 5 बार नक्‍सली घटनाओं का शिकार बना. इसके बाद 2009, 10 और 11 में 15 बार 12 बार और 10 बार नक्‍सली हमलों से रेलवे हलकान रहा.

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2012 से नक्‍सली घटनाओं में आयी है कमी

पुलिस की सुरक्षा या नक्‍सलियों की रणनीतिक बदलाव के कारण वर्ष 2012 से रेलवे पर नक्‍सली हमलों में कमी आयी है. 2012 में 4 बार, 2013 में दो बार, 2014 में 4, 2015 में तीन, 2016 में 4 और 2017 में सिर्फ दो बार ही रेलवे नक्‍सलियों के निशाने पर रहा.

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राज्य की कई परियोजनायें भी लंबित रहीं

हाल के वर्षों में घटना में कमी जरूर आयी है. कभी रेल नक्सलियों का सॉफ्ट टारगेट हुआ करता था. झारखंड में कई रेल परियोजना भी इसी वजह से पूरा नहीं हो रहा था. बल्कि रेलवे की कई परियोजनायें नक्सली आतंक की वजह से अधूरी ही रहती थी. रेलवे की लंबित परियोजना को पूरा करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल और राज्य पुलिस की सुरक्षा दी गयी है, इस मामले को लेकर कई बार अहम बैठक में निर्णय लिया गया. जिससे फिलहाल कई लंबित योजनायें पूरी हो पायीं और तेज गति से निर्माण कार्य चल रहा है.

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