IMPACT: झारखंड के पहले चारा घोटाला में गव्य निदेशालय के अफसरों व सप्लायर पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 02/12/2018 - 19:47

Ranchi: झारखंड के पहले चारा घोटाले में सरकार ने गव्य निदेशालय के अफसरों और चारा सप्लाई करने वाली आंध्रप्रदेश की कंपनी M/s KPR Agrochem Ltd.  के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दे दिया है. कृषि एवं पशुपालन विभाग के सचिव ने गव्य निदेशालय के निदेशक को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है. न्यूज विंग ने सोमवार को इससे संबंधित खबर प्रकाशित किया था. हालांकि प्राथमिकी से संबंधित आदेश में कहा गया है कि महालेखाकार से प्राप्त रिपोर्ट के आलोक में यह आदेश दिया गया है, जिसमें स्पष्ट है कि 7.82 लाख रुपये की राशि की निकासी दो बार की गयी.  इस प्रकार एक  बिल के विरुद्ध दो बार राशि की निकासी किया जाना घोर वित्तीय अनियमितता एवं सरकारी राशि के कपटपूर्ण  निकासी व गबन का मामला है. इसके साथ ही यह पद एवं शक्तियों का दुरुपयोग, सरकारी राशि की हानि एवं अनुपादक व्यय तथा एजेंसी को लाभ पहुंचाने के लिए अपराधिक षडयंत्र कर निजी स्वार्थवश किए गए कृत्यों का घोतक है. इसके लिए संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी तथा संबंधित आपूर्तिकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जाता है.

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उल्लेखनीय है कि न्यूज विंग ने जो खबर प्रकाशित किया था, उसमें लिखा था कि जिस राजनीतिक पार्टी ने संयुक्त बिहार में हुए चारा घोटाला का पर्दाफाश किया था, उसी बीजेपी की सरकार में झारखंड में चारा घोटाला हुआ है. घोटाला करीब पांच करोड़ रुपए का हुआ है. चारा खरीदी के नाम पर एक निजी एजेंसी को कृषि विभाग ने नियमों की अनदेखी कर चारा खरीदने का टेंडर दे दिया. एजेंसी को घोटाला करने में विभाग ने पूरी मदद की. इसके सारे प्रमाण सामने आ चुके हैं. एजेंसी और टेंडर प्रक्रिया की समीक्षा करने से यह साफ हो चुका है कि विभाग ने सुप्रीम कोर्ट, विजिलेंस, झारखंड फाइनेंशियल रूल, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के नियमों के खिलाफ जाकर जानबूझ कर एजेंसी के पक्ष में सारे फैसले लिये. विभाग ने जिस कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए चारा घोटाला को अंजाम दिया, वो कंपनी आंध्रप्रदेश की कंपनी M/s KPR Agrochem Ltd. है. 

कैसे हुई घोटाले की शुरुआत

30 अक्टूबर 2016 को एक स्थानीय अखबार में टेंडर संख्या 15063 प्रकाशित किया गया. टेंडर में जानवरों के लिए खनिज युक्त फूड सप्लीमेंट (Mineral Mixture Amino Acid and Vitamin) पांच लाख किलो खरीद कर सरकार को देने की बात थी. हर बैग पांच किलो का होना था. सरकार की तरफ से कोई भी टेंडर NIT Format में निकाला जाता है. लेकिन यह टेंडर NIT Format में नहीं था. इस टेंडर को निकालने के लिए वित्त विभाग का अनुमोदन दरकिनार कर दिया गया और विधि विभाग से भी टेंडर निकालने से पहले अनुमति नहीं ली गयी. टेंडर में आयकर रिर्टन को लगाना अनिवार्य नहीं किया गया. जो हर सरकारी टेंडर निकालने में किया जाता है. सिर्फ कहा गया कि कंपनी अपना टर्नओवर बता दे. पांच लाख पशु पोषाहार खरीदने के लिए 4.65 करोड़ का टेंडर निकाला गया था.

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