आईएएस अमित खरे बने केंद्रीय सूचना प्रसारण विभाग के सचिव

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 05/18/2018 - 19:42

Ranchi: झारखंड कैडर के 1985 बैच के आईएएस अमित खरे का दिल्ली जाने का रास्ता साफ हो गया है. केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें सूचना प्रसारण विभाग में सचिव बनाया गया है. केंद्रीय कार्मिक प्रशिक्षण मंत्रालय ने शुक्रवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी किया. वे 01 जून 2018 से पदभार ग्रहण करेंगे. इससे पहले वो झारखंड सरकार में विकास आयुक्त के पद पर थे. 28 फरवरी को झारखंड सरकार की तरफ से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए उन्हें नो ऑबजेक्शन सर्टिफिकेट दिया गया था. बताते चलें कि उसी दिन सीएम रघुवर दास ने चार बड़े फैसले लिये थे. राजबाला वर्मा के रियाटर होने पर स्वास्थ्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को सीएस की कुर्सी पर बैठने वाले फैसले पर मुहर लगायी थी. कार्मिक सचिव निधि खरे को स्वास्थय सचिव बनाया था और कार्मिक का प्रभार गृह सचिव एसकेजी राहटे को सौंपा था. बताते चलें कि सीएस बनने की रेस में अमित खरे काफी आगे चल रहे थे. ऐसा माना जा रहा था कि सीएम उनपर भरोसा जता सकते हैं. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यह कयास पहले से भी लगाये जा रहे थे कि अमित खरे अगर सूबे में सीएस नहीं बन सके तो निश्चित तौर पर वो दिल्ली रवाना हो जायेंगे.

इसे भी पढ़ें-  कैसे मैंने लालू प्रसाद यादव और चारा घोटाले का पर्दाफाश किया : अमित खरे 

बहुत पहले ही दिल्ली जाने वाले थे खरे, सरकार ने ही रोका था

दरअसल, केंद्र में मुख्य सचिव रैंक में इंपैनल होने के बाद ही अमित खरे दिल्ली जाना चाहते थे. उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री से आग्रह भी किया था. तब केंद्र सरकार में पद भी रिक्त था. लेकिन तब उन्हें यह कहा गया था कि राज्य को उनकी जरुरत है. राजबाला वर्मा को रिटायर होने के बाद उन्हें राज्य प्रशासन की कमान संभालनी है. सरकार के आग्रह पर उन्होंने दिल्ली जाने का इरादा त्याग दिया था. वैसे झारखंड में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब किसी सीनियर अधिकारी को किसी खास पद पर पदस्थापित करने के लिए रोका गया और फिर बाद में सरकार ने वादा नहीं निभाया. पूर्व मुख्य सचिव राजीव गौबा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले थे, तब भी सरकार ने वरिष्ठ आइएएस यूपी सिंह को केंद्र से झारखंड यह कह कर बुलाया था कि उन्हें मुख्य सचिव बनाया जायेगा. बाद में सरकार ने राजबाला वर्मा को मुख्य सचिव बना दिया. जिसके बाद श्री सिंह वापस केंद्र में लौट गए.

इसे भी पढ़ें-  अनिल कुमार झा बने कोल इंडिया के नए चेयरमैन, रांची से ही 1983 में की थी करियर की शुरुआत   

बेदाग और साफ छवि वाले अमित को मिस करेगा झारखंड

अमित खरे का कार्यकाल झारखंड में काफी चर्चित रहा है. उन्हें हमेशा एक बेदाग और साफ छवि वाले अधिकारी के तौर पर देखे जाते रहा हैं. अमित खरे वही आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने चारा घोटाला में सबसे पहले एफआईआर दर्ज किया था. वो उस वक्त चाईबासा जिले के डीसी थे. चाईबासा के बाद चारा घोटाला में देवघर जिले में एफआईआर दर्ज हुआ था. इसमें कोई शक नहीं है कि ऐसे बेदाग और निडर अधिकारी को झारखंड मिस करेगा. झारखंड में शिक्षा सचिव, राज्यपाल के प्रधान सचिव और विकास आयुक्त के रुप में इन्होंने सफल पारी खेली है. राज्य में कैसलेस अभियान का मॉडल श्री खरे ने तैयार किया था. जिसकी सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है. पिछले तीन साल से झारखंड में संतुलित बजट और बजट की राशि का सही उपयोग के लिए भी उन्हें याद किया जाएगा. विकास आयुक्त के रुप में राज्य और केंद्र प्रायोजित योजनाओं की बेहतर मानेटरिंग के कारण झारखंड लगातार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. माना जा रहा है कि उनकी इन्हीं कार्यक्षमताओं के कारण चुनावी वर्ष में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय का जिम्मा दिया गया है. 

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

na