मनोबल तोड़ने वाला है आईएएस अधिकारियों का तबादला, सीनियर को भेजा गिरिडीह और जूनियर को बुलाया रांची, दो युवा आईएएस को डाल दिया वेटिंग फॉर पोस्ट में

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 02/10/2018 - 13:10

Akshay Kumar Jha
Ranchi: आठ फरवरी को 20 से ज्यादा आईएएस अधिकारियों को तबादला किया गया, लेकिन जिस तरह से तबादला किया गया है,  उससे कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. तबादले में अधिकारियों के बीच ना ही सीनियर-जूनियर का फर्क समझा गया. ना ही ये देखा गया कि किस अधिकारी ने अपने क्षेत्र में कैसा काम किया है. एक जूनियर अधिकारी जो 2011 बैच का आईएएस है, उसे राजधानी रांची का डीसी बना दिया गया और एक सीनियर अधिकारी जो 2006 बैच के अधिकारी हैं, जिसे करीब तीन साल तक रांची के डीसी रहने का अनुभव है, उनकी गिरिडीह जैसे जिले में पोस्टिंग कर दी गयी. जाहिर तौर पर इससे अधिकारियों के बीच निराशा है. इनमें से कइयों का कहना है कि ऐसे में उनका मनोबल टूटता है. वो अपने जिले में इसलिए अच्छा काम करने की कोशिश करते हैं, ताकि अगली बार उन्हें सरकार की तरफ से रिवॉर्ड मिले. एक ऐसा काम करने को दिया जाए जो पहले से ज्यादा टफ हो, लेकिन सरकार की तरफ से इस तबादले के दौरान ऐसा कुछ नहीं सोचा गया, बस आंख बंद कर अधिकारियों को इस जिला से उस जिला कर दिया गया. 

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एक जूनियर अधिकारी को बना दिया डीसी रांची 

मनोज कुमार
मनोज कुमार


सबसे ज्यादा सवाल सरकार के इस फैसले पर उठ रहे हैं कि आखिर कैसे एक जूनियर अधिकारी को रांची का डीसी बना दिया गया. रांची के नए डीसी राय महिमापत रे होने वाले हैं. वो 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. मनोज कुमार को छोड़ दिया जाए, तो ऐसे सात अधिकारी थे जो राय महिमापत रे से सीनियर हैं और रांची डीसी बनने की उनसे ज्यादा काबलियत रखते हैं. मनीष रंजन 2002 बैच के आईएएस हैं. रमेश दुबे 2005 बैच के आईएएस हैं. जटाशंकर चौधरी 2005 बैच के आईएएस हैं. राजीव कुमार 2007 बैच के आईएएस हैं. शैलेश कुमार चौरसिया 2007 बैच के आईएएस हैं. जितेंद्र कुमार सिंह 2008 बैच के आईएएस हैं और उमाशंकर सिंह 2009 बैच के आईएएस हैं. ये सातों आईएएस अधिकारी राय महिमापत रे से सीनियर हैं. सभी ने अपने जिलों और विभागों में बेहतर प्रदर्शन किया है.  

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झारखंड बनने के बाद पहली बार रांची के डीसी का तबादला गिरिडीह

उमाशंकर सिंह
उमाशंकर सिंह


तबादले के दौरान ऐसी-ऐसी चीजें हुई हैं, जिसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. ऐसा पहली बार हुआ है कि एक सीनियर आईएस अधिकारी रांची में तीन साल तक डीसी रहे, उन्हें गिरिडीह भेज दिया गया हो. इसे एक तरह का डिमोशन माना जा रहा है. वहीं उमाशंकर सिंह की अगर बात करते हैं, तो वो एक ऐसे आईएएस अफसर हैं, जो बोकारो के डीसी रहने के बाद गिरिडीह में तीन साल तक डीसी रहते हैं. सम्मानजनक हर काम का रिजल्ट देते हैं. गो रक्षा से लेकर गिरिडीह से सेंसेटिव जिले में लॉ एंड ऑर्डर को बहाल रखने में हर मोर्चे पर कामयाब रहते हैं, उन्हें गोड्डा जैसे जिले का डीसी बना दिया गया. 

मंजूनाथ भजंत्री ने शौचालय पर किया था अच्छा काम, मिला हस्त करघा विभाग

डीसी मंजूनाथ भजंत्री
डीसी मंजूनाथ भजंत्री


सिमडेगा के डीसी मंजूनाथ भजंत्री भी बोकारो के डीसी राय महिमापत रे की ही तरह 2011 बैच के आईएएस हैं. उन्होंने सिमडेगा में काफी अच्छा काम किया. खास कर शौचालय के क्षेत्र में राज्य भर में सबसे अच्छा करने वालों की लिस्ट में हैं. वहीं बोकारो के डीसी राय महिमापत रे के काम का सच चंदनकियारी के एक गांव में वाइफाई कनेक्शन को लेकर साफ हो गया था. राष्ट्रीय मीडिया के बड़े चैनल ने वहां की ग्राउंड रिपोर्ट पूरे देश को दिखायी. फिर भी राय महिमापत रे के बैच के अधिकारी मंजूनाथ भजंत्री को किसी अच्छे जिला के डीसी बनाने की बजाय निदेशक हस्त करघा, रेशम एवं हस्त शिल्प बना दिया गया.    

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जिनसे काम करवाना था, उन्हें वेटिंग फॉर पोस्टिंग में डाल दिया
एक तरफ सरकार विकास योजनाओं की रफ्तार पर लगी लगाम पर यह बहाना बनाती है कि  उनके पास अधिकारियों की कमी है, लेकिन ऐसे युवा आईएएस अफसर जो बुरी परिस्थितियों में भी अच्छा काम कर सकते हैं,  उन्हें सरकार ने वेटिंग फॉर पोस्ट की लिस्ट में डाल दिया है. एक आईएएस अधिकारी बनने के बाद सरकार की तरफ से गढ़वा और पालमू के डीडीसी को वेटिंग फॉर पोस्ट में डालना उनके मनोबल को तोड़ना ही है. सुशांत गौरव और फैज अक अहमद मुमताज दोनों आईएएस अफसर 2014 बैच के आईएएस हैं. दोनों युवा हैं और काम करने वाले अधिकारी हैं. ऐसे में उनको कार्मिक वापस बुला लेना और वेटिंग फॉर पोस्ट के लिए पेंडिंग में डाल देना अच्छा संदेश नहीं देता है.

कई सीनियर अफसर भी हुए नजरअंदाज

तबादले को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि रांची जैसे महत्वपूर्ण जिला में सबसे ज्यूनियर अफसर को डीसी बना दिया गया, जबकि कई सीनियर अफसर अभी भी या तो संटिंग में हैं या किसी दूसरे कम महत्वपूर्ण वाले जिला में. इनमें 2003 बैच के प्रवीण कुमार टोप्पो, अब्दुल बकर सिद्दिकी व राजेश शर्मा, 2004 बैच के रवि कुमार, 2005 बैच के एन झा, 2008 बैच के हर्ष मंगला व अरवा राजकमल,  2009 बैच के मुकेश कुमार व ए मुट्ठू कुमार और 2010 बैच के आइएएस अबु इमरान शामिल हैं. अबु इमरान को पिछले तीन साल से सचिवालय में ही रखा गया है.

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तीन आइएएस डीसी बन गए, चार डीडीसी ही रह गए

तबादले में इस बात का भी ख्याल नहीं रखा गया कि एक बैच के सभी आइएएस को एक साथ एक तरह का मौका दिया जाए. वर्ष 2013 बैच के तीन आइएएस सूरज कुमार को खूंटी, मृत्युंजय कुमार वर्णवाल को बोकारो और आदित्य को जामताड़ा का डीसी बनाया गया है. जबकि इसी बैच के चार आइएएस अब भी डीडीसी के पद पर ही काम कर रहे हैं.

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