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सरकारी शराब सिंडिकेट : पहले शॉप सुपरवाइजर को हटाया, फिर जिला उत्पाद ऑफिस को किया साइडलाइन अब प्राइवेट कंपनी सीधा करती है जेएसबीसीएल को रिपोर्ट (2)

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 –  गंदाहै पर धंधाहै ये…

-कैबिनेट के फैसलों को ठेंगा

Akshay Kumar Jha

Ranchi: सरकार का शराब बेचने का फैसला भले ही सही हो, लेकिन जिस तरह से जेएसबीसीएल (झारखंड स्टेट बिवरेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड) इसे चला रहा है, इससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. आदेश निकालकर शॉप सुपरवाइजरों को एक महीने की नोटिस देकर संविदा समाप्त की जा रही है. आदेश में कहा जा रहा है कि शॉप सुपरवाइजरों को कम्प्यूटर का ज्ञान नहीं है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि इन शॉप सुपरवाइजरों को बहाल किसने किया था. जब जेएसबीसीएल ही इन्हें बहाल कर रही थी तो क्यों नहीं इनकी दक्षता पहले देखी गयी. सवाल ये भी है कि कहीं सीढ़ी दर सीढ़ी पूरे शराब के धंधे को सिंडिकेट के तहत अपने हाथ में लेने की ये पहली कड़ी तो नहीं थी. विभाग के आला अधिकारी इस विषय पर सही जानकारी नहीं दे पा रहे हैं. विभाग के कई लोगों को कहना है कि उन्हें जिस उद्देश्य से रखा गया था, वो पूरा नहीं हो रहा था. लेकिन कैबिनेट के फैसले के मुताबिक इन्हें सहायक आयुक्त की अनुशंसा के बाद जेएसबीसीएल की कार्रवाई के तहत हटाया जाना था. जो नहीं हुआ. हुआ ये कि कैबिनेट के फैसलों के बार-बार ठेंगा दिखाते हुए जेएसबीसीएल के उच्च और राज्य स्तरीय कर्मचारी अपने तरीके का फैसला लेते गए. 

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प्राइवेट आउटसोर्स करने वाली कंपनी को बनाया सर्वेसर्वा

जब शराब के धंधे का सरकारीकरण हो रहा था, तो दुकान में शराब को बेचने के लिए दो कंपनियों के साथ करार किया गया. फ्रंटलाइन और शोमुख. इनका काम सिर्फ दुकान में पड़े शराब को बेचना था और बिक्री का हिसाब सरकार को देना था. लेकिन धीरे-धीरे जेएसबीसीएल ने सारा पावर इन्हीं कंपनियों को दे दिया. अब ये दोनों कंपनियां शराब व्यवसाय की सर्वेसर्वा हैं.

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–              कैबिनेट और सरकार के गजट के मुताबिक किस दुकान में कितनी और कौन सी शराब की खपत होगी, ये शॉप सुपरवाइजर सहायक आयुक्त को बताता. सहायक आयुक्त जेएसबीसीएल को इसकी सूचना देकर शराब आपूर्ति का काम कराता. लेकिन चार सितंबर 2017 को आयुक्त उत्पाद ने एक बार फिर से कैबिनेट के फैसले को दरकिनार करते हुए आदेश जारी किया. जिसमें कहा गया कि प्राइवेट मैन पावर सप्लायी करने वाली कंपनी का शॉप मैनेजर सीधा सहायक आयुक्त को आपूर्ति से संबंधित रिपोर्ट देगा और सहायक आयुक्त परमिट जारी करेंगे. यानि अब मैनपावर सप्लायी करने वाली प्राइवेट कंपनी फ्रंटलाइन और शोमुख के कर्मी तय करेंगे कि किस दुकान में कौन सी शराब और कितनी बिकेगी.

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–              15 जनवरी 2018 को जीएम ऑपरेशन सुधीर कुमार की तरफ से कैबिनेट के फैसले को ताक पर रखते हुए  इस संबंधित फिर से आदेश निकाला गया. इस आदेश में उन्होंने लिखा कि जेएसबीसीएल  के जीएम ऑपरेशन की अध्यक्षता में उपायुक्त उत्पाद, जीएम फाइनेंस, निगम कर्मी और मैनपावर सप्लायी करने वाली कंपनी के प्रतिनिधि के साथ हुई बैठक के बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश के अनुसार खुदरा दुकानों में शराब आपूर्ति के लिए अब जिला स्तर पर प्राइवेट मैनपावर सप्लायी करने वाली कंपनी के मैनेजर आवेदन नहीं देंगे, बल्कि सीधा जेएसबीसीएल को अनुमोदन भेजा जाएगा. मुख्यालय ही परमिट देने के लिए डिपो और दुकान के स्टॉक की उपलब्धता देखकर जिला को निर्देश देगा. जिला उत्पाद कार्यालय अब सिर्फ शराब की मांग, जो जेएसबीसीएल की तरफ से भेजी जाएगी, उसे स्वीकृत करेगा. यह सभी प्रक्रिया 18 जनवरी 2018 से शुरू होगी.

इस आदेश के बाद जिला स्तर पर सहायक आयुक्त का शराब आपूर्ति में कोई रोल नहीं रह गया. प्राइवेट मैनपावर के लिए हायर की गयी कंपनी, अब सीधा जेएसबीसीएल को शराब आपूर्ति के लिए लिखेगी. शराब आपूर्ति का सारा डील जेएसबीसीएल और मैनपावर सप्लायी करने वाली कंपनी फ्रंटलाइन और शोमुख के जिम्मे हो गया.

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पूरे मामले पर आयुक्त उत्पाद भोर सिंह यादव ने कहा

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शॉप सुपरवाइजर को हटाए जाने के लिए नोटिस दिए जाने को लेकर आयुक्त उत्पाद भोर सिंह यादव ने कहा कि जिस काम के लिए उन्हें रखा गया था. उसका उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा था. फील्ड में वो जाना नहीं चाहते थे. सभी रांची शहर में ही रहना चाहते थे. ऐसे में उनसे काम लेना मुश्किल हो रहा था. ऐसा नहीं है कि शॉप सुपरवाइजर का पद ही खत्म कर दिया जा रहा है. जेएसबीसीएल इसपर विचार कर रही है कि कैसे लोगों को इस काम के लिए रखा जाना चाहिए. आगे होने वाली बैठक में इसपर विचार किया जाएगा.

शराब आपूर्ति से संबंधित सारा पावर प्राइवेट मैनपावर सप्लायी करने वाली कंपनी फ्रंटलाइन और शोमुख को दिए जाने पर आयुक्त उत्पाद ने कहा कि ये सारे आदेश मेरे आने से पहले के हैं. इसपर मैं कुछ नहीं कह सकता. बैठकों में इसपर विचार किया जाएगा.

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