गिरिडीह: फर्जी प्लेसमेंट दिखा कर ली निकासी, एनयूएलएम में बड़ा फर्जीवाड़ा

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 03/13/2018 - 14:40

" युवा वर्ग, जिसकी आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने पलते हैं. जब भी युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए कोई सरकारी योजना चलती है, उनके सपने भी उड़ान भरना चाहते हैं, मगर सरकारी योजनाओं का संचालन कर रहे बिचौलियों की वजह से इन युवाओं के सपने तिल तिल कर दम तोड़ रहे हैं, उनकी आंखों में उभरता सवाल यही कहता है कि हमारी क्या गलती थी, और हमारे गुनहगारों को सजा कब मिलेगी ?"

GIRIDIH : राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन योजना में गिरिडीह में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. योजना की समीक्षा के दौरान जब प्रशिक्षणरत लोगों ने अपनी जुबान खोली तो कई मामले सामने आये है. और इस बड़े फर्जीवाड़े को लेकर एसडीएम सह नगर पर्षद की प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी विजया जाधव ने जांच कर उपायुक्त व नगर विकास विभाग को रिपोर्ट देने की बात कही है. बता दें कि इस फर्जीवाड़े को लेकर नगर पर्षद उपाध्यक्ष राकेश मोदी लगातार जांच की मांग कर रहे थे.

क्या हैं पूरा मामला

बता दें कि इस राष्ट्रीय शहरी मिशन आजीविका योजना के तहत बेरोजगार युवक- युवतियों को प्रशिक्षण देकर प्लेसमेंट कराने का ज़िम्मा होता है. इसको लेकर गिरिडीह में तीन संस्थाएं- ज्ञान ज्योति, नेचर केयर और संत रविदास काम कर रही है. इसमें इन संस्थाओं द्वारा ब्यूटी केयर, हेयर ड्रेसिंग, कढ़ाई जैसे कोर्सेस करवाने की बात कही गई. लेकिन संस्थाओं द्वारा इन्हें केवल ट्रेनिंग दी गई. ट्रेनिंग के बाद ना ही प्रशिक्षण लेने वाली युवतियों को कोई प्रमाण पत्र दिया गया और न ही कोई प्लेसमेंट दी गई. केवल कागजों में पूरी योजना की खानापूर्ति कर पूरी राशि निकाल ली गई.

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2013 से शुरू हुए योजना में  अबतक करोड़ो की निकासी

यहां बता दें कि गिरिडीह में यह योजना वर्ष 2013 से संचालित है और संस्थाओं द्वारा मिलीभगत से इसमें लगभग 5 करोड़ रुपये निकालने की बात सामने आ रही है. इस मामले को लेकर सोमवार को नगर पर्षद के सभागार में प्रशिक्षण ली हुई लड़कियों व संस्था के प्रतिनिधियों को आमने सामने बिठाया गया. इसके बाद तो इन संस्थाओं की एक एक कर पूरी पोल पट्टी खुल गई. इस पूरे फर्जीवाड़े के बाबत एसडीएम सह नप के प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी विजया जाधव ने बताया कि इन संस्थाओं को बेरोजगार युवतियों को कोर्स के तहत प्रशिक्षण देकर प्लेसमेंट कराना था. पर बिना ऐसे किये प्रशिक्षण में दी जाने वाली दूसरी, तीसरी व चौथी स्टालमेंट की निकासी संस्थाओं ने कर ली. कहा कि प्रशिक्षण ली हुई लड़कियों ने यह भी बताया कि जब कोई निरीक्षण के लिए आता था तो लड़कियों को एक बेच से दूसरे बेच में शिफ्ट करा दिया जाता था. कहा कि प्रशिक्षण के दौरान कोई भी किट इन्हें नहीं दी गई. जबकि प्रावधान के तहत इन्हें किट देना था. 

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प्लेसमेंट की जो कंपनी बताई वो नहीं कर रही है काम

प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी ने यह भी बताया कि प्रशिक्षण ली हुई युवतियों से नौकरी मिली है वाली कॉलम में साइन लेकर और फर्जी प्लेसमेंट दिखाकर संस्थाओं ने चौथे और अंतिम इन्स्टालमेन्ट की निकासी की है. बताया कि नेचर केयर द्वारा दो कंपनियों का जिक्र किया गया है जिसमें एक जय इंटरप्राइसेस है लेकिन ऐसी कोई कंपनी यहां काम नहीं कर रही है और ना ही इस कंपनी का पूरा ब्यौरा है. 

सिटी मिशन मैनेजर पर प्रताड़ना का आरोप, मिशन मैनेजर गायब

प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी जाधव ने कहा कि सिटी मिशन मैनेजर राकेश कुमार पर लकड़ियों ने कई आरोप लगाएं है. इस मामले पर सिटी मिशन मैनेजर का पक्ष जानने के लिए उसे बुलाया गया है. लेकिन वो बिना किसी सूचना के गायब हो गया है. कई बार कॉल से सम्पर्क का प्रयास किया गया लेकिन लगातार उसका नम्बर बन्द आ रहा है. उसके घर में मैसेज भिजवाई गई है लेकिन कोई पता नहीं है. ऐसा करने से वह बच नहीं पायेगा. 

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प्रमाण पत्र समेत योजना से जुड़े दस्तावेज जब्त

इस पूरे मामले को लेकर प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा एन यू एल एम से जुड़े सभी कागजातों को अलमीरा खुलवाकर जब्त कर लिया गया है. इसमें वर्ष 2016 से अब तक कई प्रमाण पत्र बगैर मिले हैं. जो अबतक प्रशिक्षण प्राप्त लड़कियों को नहीं दिया गया है. 

पूरे मामले की जांच कर सौंपी जाएगी रिपोर्ट

प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी ने कहा कि प्रशिक्षण में कितने का घपला हुआ है, किस संस्था के कौन कौन लोग है, किस संस्थान ने कितने की निकासी की है इसकी गहराई से जांच की जाएगी. कहा कि योजना को लेकर स्थानीय विधायक भी शिकायत करते रहें हैं. उन्होंने कहा कि ये भी जांच की जाएगी कि आखिर क्यों प्रशिक्षण के इतने दिन बाद प्रमाण पत्र इन्हें नहीं दिया गया ? क्या प्रशिक्षण के पूर्व ह्यूमन रिसोर्स का सर्वे हुआ ? उन्होंने कहा कि 7 से आठ हजार रुपये की नौकरी के लिए लड़कियां कैसे बाहर जाएंगी. बाहर रहकर कैसे वो इतनी कम सैलरी में काम कर पाएंगी ऐसे में यह भी जांच की जाएगी कि क्या प्रशिक्षण प्राप्त लड़कियों को शहर में जॉब दिलाने की कोई पहल गई ? इन सब बातों की पूरी जांच कर उपायुक्त को रिपोर्ट दी जाएगी. इसके बाद आगे निर्देश पर काम किया जायेगा.

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