झारखंड में सुरक्षित नहीं बेटियां: गुमला में बंदूक की नोंक पर नाबालिग छात्रा का अपहरण कर गैंगरेप

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 04/14/2018 - 11:22

Gumla: कठुआ और उन्नाव गैंगरेप केस को लेकर पूरे देश में आक्रोश का माहौल है. लोगों में सिस्टम और सरकार के प्रति गुस्सा है और सवालों के घेरे में है बेटियों की सुरक्षा. एकबार फिर झारखंड में बच्चियों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं. रघुवर सरकार के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे को धत्ता बताकर गुमला में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा के साथ बंदूक की नोंक पर गैंगरेप हुआ. ये शर्मनाक घटना 31 मार्च की है, लेकिन आरोपियों की धमकी से डरी बच्ची 13 दिनों तक इस मामले में कुछ भी बोलने से कतराती रही. आखिरकार उसकी बड़ी बहन को मामले की जानकारी हुई, जिसके बाद शुक्रवार को घाघरा थाने में शिकायत की गई.

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पिस्टल के बल पर किया अगवा

घटना के संबंध में नाबालिग पीड़िता ने बताया कि 31 मार्च की शाम गांव के ही बगल के कुएं में पानी लाने के लिए गई थी. तभी अचानक तीन युवक बाइक में आए और सिर में पिस्टल अड़ा कर चेहरा ढकने को कहा, इसके बाद बाइक से पूषो गढ़वाली जंगल में ले जाकर दुष्कर्म किया. दरिंदगी के बाद एक अप्रैल को सुबह करीब चार बजे घर के पास छोड़ दिया. इस दौरान रास्ते में भी तीनों ने दोबारा दुष्कर्म किया. पीड़िता ने यह भी बताया कि 31 मार्च की रात जंगल में दुष्कर्म के बाद तीनों ने उसे गोली मारने के लिए पिस्टल भी निकाला. 


जान से मारने की दी थी धमकी
अपनी आपबीती सुनाते हुए पीड़िता ने बताया कि रेप के बाद तीनों आपस में उसे जान से मारने की बात कर रहे थे. लेकिन उसने हाथ जोड़कर किसी से कुछ भी नहीं कहने की बात कही. जिसके बाद तीनों लोगों ने  खुद को उग्रवादी बताते हुए कहा कि हम लोगों का घर सिसई थाना के लोहनजरा में है. और हम लोग किसी से नहीं डरते हैं. 

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तीन लोगों ने किया दुष्कर्म

हथियार के बल पर हुई हैवानियत के दरिंदों ने अपना नाम आरिफ, बबलू और जगलाल साहू बताया. पीड़िता ने बताया कि वो आरिफ को पहचानती है, वो ऑटो चलाता है. तीनों लोगों ने पीड़िता को धमकी दी कि जब भी वो बुलाये उसे आना पड़ेगा, नहीं तो जान से मार देंगे. इस घटना से आहत पीड़िता चलने फिरने में भी असमर्थ थी. और पिछले 12 दिनों से अपने घर पर ही थी. वो अपने बुजुर्ग दादा और मां के साथ घर पर रहती है. पीड़िता की मां ने उसकी बड़ी बहन को जानकारी दी, जिसके बाद मामला थाने पहुंचा.

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कठुआ और उन्नाव केस की पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए पूरा देश एकजुट है. हर वर्ग, हर समुदाय में गुस्सा है. जिस तरह से हाल के दिनों में झारखंड में महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ा है. ऐसे में प्रदेश में भी बेटियों की सुरक्षा पर जोरशोर से आवाज उठाने की जरुरत है. ताकी सोई हुई सरकार और प्रशासन की नींद टूटे और गुमला की नाबालिग, रातू की नाबालिग रेणू और पुंदाना की अफसाना को भी न्याय मिल सके

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