नोटबंदी से हाउसहोल्ड के फायनेंशियल एसेट्स में चार ट्रिलियन रुपये की गिरावट : आरबीआई की रिपोर्ट

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 03/13/2018 - 20:29

New delhi : आरबीआई की तिमाही रिपोर्ट में नोटबंदी के कारण हाउसहोल्डट के फायनेंशियल एसेट्स में चार ट्रिलियन रुपये की गिरावट दर्ज की गयी है. इसके अलावा करेंसी होल्डिंग में भी गिरावट आयी है, जिसका सीधा असर बाजार पर देखने को मिला है. हाउसहोल्ड फायनेंशियल एसेट्स एंड लायबलिटीज नाम से जारी रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 के पुराने नोटों को वापस लेने के फैसले का स्पष्ट प्रभाव दिखा है. आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर, 2016 में ग्रॉस फायनेंशियल एसेट्स (सकल वित्तीय संपत्तियां) का कुल मूल्य 141 ट्रिलियन रुपये था. दिसंबर, 2016 तक इसमें चार ट्रिलियन रुपये की कमी आयी और यह आंकड़ा 137 ट्रिलियन तक पहुंच गया था. बता दें कि पीएम मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी. हाउसहोल्डत फायनेंशियल एसेट्स आउटस्टैंडिंग अमाउंट में भी छह फीसद तक की कमी दर्ज की गयी. वर्ष 2017 की अंतिम तिमाही में भी यह आंकड़ा सितंबर, 2016 के मुकाबले कहीं कम है. 

इसे भी पढ़ेंः पत्थलगड़ी के नाम पर लोगों को भड़काने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई : झारखंड सरकार

इसे भी पढ़ेंः झारखंड सरकारी कर्मचारियों को सांतवा वेतनमान के भत्ते पर कैबिनेट की मुहर, राज्य निर्वाचन आयोग की हरी झंडी के बाद मिलेगा लाभ

इसे भी पढ़ेंः रांची नगर निगम : जानिये किस वार्ड में हैं आप, बदल गया है आपका क्षेत्र

भारतीय लोगों में बचत के बजाय निवेश की प्रवृत्ति बढ़ी

नोटबंदी के बाद भारतीय लोगों में बचत के बजाय निवेश की प्रवृत्ति ज्यामदा पायी गयी है. आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है, भारतीय लोग आमतौर पर बचत करने वाले और अर्थव्यवस्था में वित्तीय संसाधन की आपूर्तिकर्ता के तौर पर जाने जाते हैं. हालांकि, वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही में नेट फायनेंशियल एसेट्स में नकारात्‍मक बदलाव दिखा है जो नोटबंदी के प्रभाव को दर्शाता है. बता दें कि फायनेंशियल एसेट्स के तहत बैंक डिपोजिट, बॉन्ड्स, इंश्योरेंस एसेट्स और स्टॉक्स आदि आते हैं. अन्य एसेट्स की तुलना में फायनेंशियल एसेट्स ज्यादा लिक्विड होते हैं. नोटबंदी के बाद हाउसहोल्ड‍ के फायनेंशियल एसेट्स के स्वरूप में भी उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है. सितंबर, 2017 में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की तुलना में करेंसी होल्डिंग्स में भी गिरावट दर्ज की गयी है. नोटबंदी से पहले यह जहां 10.6 फीसद था, वहीं बड़े नोटों को वापस लेने की घोषणा के बाद यह आंकड़ा 8.7 फीसद तक पहुंच गया. इसका मतलब यह हुआ कि लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसे पहले के मुकाबले कम हो गयी. नोटबंदी के पहले 10.6 फीसद (जीडीपी की तुलना में) हाउसहोल्ड ने म्यूचुअल फंड में निवेश किया था. सितंबर 2017 में यह आंकड़ा 12.5 फीसद तक पहुंच गया. करेंसी होल्डिंग में गिरावट का असर म्यूचुअल फंड में निवेश के तौर पर सामने आया. लोग करेंसी होल्डिंग का इस्तेमाल फायनेंशियल मार्केट में करने लगे.

इसे भी पढ़ेंः पलामू: कठौतिया कोल माइंस से कोयला लेकर निकल रहे वाहनों पर फायरिंग और बमबारी

इसे भी पढ़ेंः पलामू: नकल करते 32 परीक्षार्थी धराये, सभी एक्सपेल्ड, दो वीक्षक भी निलंबित, केंद्राधीक्षक को शोकॉज

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.