1 साल पहले भी की गई थी विधायक की शिकायत, सख्त कार्रवाई होती तो नहीं जाती पीड़िता के पिता की जान : इलाहाबाद हाईकोर्ट

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 04/14/2018 - 15:01

Allahabad : यूपी के उन्नाव में गैंगरेप के मामले में राज्य सरकार और सीएम आदित्यनाथ को काफी फजीहत झेलनी पड़ी है. चारों ओर से दबाव बढ़ने पर भले ही सरकार ने केस सीबीआई के हवाले कर ये जताने की कोशिश की हो कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है. भले ही आरोपी विधायक को भी गिरफ्तार कर लिया गया हो, मगर असली सवाल अपनी जगह कायम है कि आखिर सरकार किस मजबूरी में चुप्पी साधे बैठी थी ? इस मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी योगी सरकार को फटकार भरे लहजे में आईना दिखाया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर साल भर पहले सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यालय की तरफ से एक्शन के नाम पर रस्म अदायगी भर नहीं होती और सख्त कार्रवाई होती तो पीड़िता के पिता को जान गंवानी नहीं पड़ती. इस टिप्पणी के साथ ही हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दिलीप बी भोसले ने शुक्रवार को बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को गिरफ्तार करने का आदेश सीबीआई को दिया था. यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार पर आरोपी विधायक को बचाने के आरोप लग रहे थे. शुक्रवार को ही सीबीआई ने आरोपी विधायक को हिरासत में लेकर पूछताछ की. बाद में कोर्ट के आदेश पर गिरफ्तार कर लिया.

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गैंगरेप के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ तीन केस दर्ज किए गए हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पीड़ित पक्ष द्वारा पिछले साल 17 अगस्त, 2017 को ही सीएम योगी आदित्यनाथ से आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की शिकायत की गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. हालांकि, सीएम के स्पेशल सेक्रेटरी की तरफ से उन्नाव के एसपी को इस बाबत चिट्ठी भेजी गई थी. इधर, सीएम योगी की सफाई यह है कि इस मामले में उन्हें पहली जानकारी इस साल 9 अप्रैल को मिली थी, जिसके बाद उन्होंने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था बाद में मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया गया.

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वहीं इस घटना की देश भर में आलोचना होने के बाद पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्नाव की घटना को बेहद दर्दनाक करार देते हुए दोषी पर कार्रवाई की बात कही थी. मगर इससे पहले बीजेपी और योगी सरकार की काफी आलोचना हो चुकी थी. कहा ये भी जा रहा है कि इस मामले की जांच की जिम्मेदारी जिन लोगों पर थी, वे आरोपी विधायक के रसूख के आगे घुटने टेक चुके थे. वहीं, इस मामले में एक डॉक्टर भी जांच की आंच पहुंच रही है, जिसने पीड़िता की मेडिकल जांच के दौरान उसका मजाक बनाया था. बता दें कि पीड़िता के पिता की विधायक के भाई और उसके गुर्गों ने पिटाई की थी, जिसके बात उसकी मौत हो गई थी. मौजूदा हालात में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त रुख का ही नतीजा है कि आरोपी विधायक की गिरफ्तारी हो सकी और अब सेंगर पर कानून का शिकंजा लगातार कसता चला जा रहा है. वहीं यूपी सरकार पर हाईकोर्ट की टिप्पणी सरकार को आईना भी दिखाती है.

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