शिक्षा विभाग टैब घोटाला : 41,000 शिक्षकों के बदले दे दिया करीब 2500 बीआरपी और सीआरपी को टैब, आठ महीने में नहीं करा पाए एक दिन की ट्रेनिंग (2)

Publisher NEWSWING DatePublished Sun, 05/13/2018 - 12:46

Akshay Kr Jha/Kumar Gaurav

Ranchi : 19 जनवरी 2017 को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मिशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम गुणवत्ता शिक्षा के उद्घाटन समारोह में सीएम रघुवर दास करीब पांच हजार लोगों को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को टैबलेट दिया जाएगा. अगले वित्त वर्ष में इसके लिए 25 करोड़ की राशि की व्यवस्था की जा रही है. शिक्षकों को ई-विद्यावाहिनी सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा. सरकार छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए कटिबद्ध है. सीएम ने जितनी राशि खर्च करने की बात समारोह में कही उससे तीन गुनी ज्यादा राशि इस योजना पर खर्च हो चुकी है. लेकिन नतीजा सिफर है. टैब का फायदा ना शिक्षकों को मिल रहा है और ना ही करोड़ों खर्च होने के बाद झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में ही कोई सुधार है.

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आठ महीने में सरकार नहीं दे सकी शिक्षकों को एक दिवसीय ट्रेनिंग

टैब
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टैब बांटे हुए करीब आठ महीने बीतने को हैं. विद्या वाहिनी योजना के तहत Software को समझने के लिए शिक्षकों को एक दिवसीय ट्रेनिंग दिया जाना था. ट्रेनिंग में शामिल होने पर सभी शिक्षकों को 150 रुपए सरकार की तरफ से दिए जाने थे. ताकि Software को शिक्षक अच्छी तरह से समझ सकें और उसपर काम कर सकें. पूरे प्रशिक्षण के लिए करीब 62 लाख का बजट बनाया गया. लेकिन बीते आठ महीनों में विभाग शिक्षकों को एक दिन की ट्रेनिंग नहीं दिला पाया. सिर्फ टैब की खरीदारी कर जिलों में भेज दिया गया. जहां ये टैब धूल फांक रहे हैं.

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टैब बांटना था शिक्षकों के बीच, बांट दिया 2500 सीआरपी और बीआरपी के बीच

विभाग शिक्षकों को एकदिवसीय ट्रेनिंग देने में अभी तक असफल है. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि कहीं पड़े-पड़े टैब खराब ना हो जाए. ऐसी स्थिति में विभाग की तरफ से राज्य के करीब 2500 बीआरपी (Block Resource Person) और सीआरपी (Cluster Resource Person) के बीच टैब बांट दिए. उन्हें एक दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया. इस काम में भी राज्य के दो जिलों को छोड़ दिया गया. रामगढ़ और हजारीबाग के सीआरपी और बीआरपी को ट्रेनिंग नहीं दी गयी. इस वजह से उनके बीच टैब का वितरण नहीं किया गया है. जबकि विद्या वाहिनी योजना के तहत शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जानी थी और टैब का वितरण भी शिक्षकों के बीच करना था. ऐसे स्कूल जहां 100 से कम बच्चे हैं वहां एक शिक्षक को टैब और ऐसे स्कूल जहां 100 से ज्यादा बच्चे हैं, वहां दो शिक्षकों को टैब बांटे जाने पर सहमति बनी थी. लेकिन सरकार ने 41,000 शिक्षकों के बीच टैब का वितरण ना करते हुए सीआरपी और बीआरपी के बीच टैब का वितरण कर दिया.   

घोषणाएं जो जमीन पर उतरे ही नहीं

19 जनवरी 2017 को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मिशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सरकार की तरफ से तत्कालीन सचिव आराधना पटनायक ने कहा था कि संपर्क फाउंडेशन और अरविंदो सोसाइटी के साथ एमओयू भी किया गया है. संपर्क फाउंडेशन देश के दूसरे राज्यों में भी स्मार्ट पाठ्शाला का संचालन कर चुका है. 26 हजार प्राथमिक स्कूलों में पढ़नेवाले 40 लाख बच्चों तक खुशी पहुंचाने के लिए 40 करोड़ निवेश होगा. यह संस्था अंग्रेजी बोलने, गणित बनाने की किट उपलब्ध कराएगा. शिक्षकों के लिए ऑडियो साउंड बॉक्स, मोबाइल एप और प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. 60 हजार से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का काम होगा. संपर्क स्मार्टशाला एप द्वारा मॉनिटरिंग भी की जाएगी. अरविंदो सोसाइटी भी विकास के क्षेत्र में काम करेगा. लेकिन मौजूद स्थिति में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. जो घोषणाएं हुई थीं, उसमें एक भी घोषणा जमीन पर नहीं उतरी. 

जारी...

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