पुलिस कस्टडी में मौत के मामले में चार पुलिसकर्मियों को पांच साल की सजा

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 02/14/2018 - 19:20

Ranchi : सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एके मिश्रा ने पुलिस कस्टडी में मौत के मामले में बीस साल बाद चार पुलिसकर्मियों को पांच-पांच साल की कैद और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी है. आरोपियों में तत्कालीन मुख्यालय डीएसपी डालटनगंज डीएन रजकतत्कालीन इंस्पेक्टर देवलाल प्रसादतत्कालीन पांकी थाना प्रभारी सुरेन्द्र प्रसाद और एसआई रुखसार अहमद शामिल हैं.

इसे भी पढ़ेंः बकोरिया कांड की जांच में तेजी आते ही बदल दिए गए सीआईडी एडीजी एमवी राव

इसे भी पढ़ें - बीजेपी में मेयर और डिप्टी मेयर के नामों पर राय-शुमारी तेज, डिप्टी मेयर के लिए ठेकेदार और व्यवसायी कर रहे हैं सबसे ज्यादा दावा

पारस नाथ सिंह की मौत जुलाई 1998 में पुलिस कस्टडी में हो गयी थी

अधिवक्ता के अनुसार पारस नाथ सिंह की मौत जुलाई 1998 में पुलिस कस्टडी में हो गयी थी. इस संबंध में मृतक की पत्नी अहुलास देवी के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. पुलिस ने टीम बनाकर पांकी थाना के सिरम गांव में छापेमारी की थी. इस दौरान पुलिस ने पारस को गिरफ्तार किया था और मारपीट करते हुए पिपराटांड़ चौकी ले गयी थी. वहां भी मारपीट की गयी. छाती पर लकड़ी की बल्ली चढ़ा दी गयी, जिससे उसकी मौत हो गयी थी. उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था.

इसे भी पढ़ेंः डीजीपी डीके पांडेय ने एडीजी एमवी राव से कहा था कोर्ट के आदेश की परवाह मत करो !

पुलिस ने उन्हें नक्सली घोषित करने की कोशिश की

पुलिस ने उन्हें नक्सली घोषित करने की कोशिश की थी. इसके बाद अहुलास ने हाइकोर्ट में रिट याचिका दायर की. सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों को हाजिर कराया गया था. तत्कालीन जस्टिस एमवाइ इकबाल ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिये. दिल्ली सीबीआई ने 1(s) 2001 के तहत मामला दर्ज करके उसकी जांच की. मामले में अभियोजन की ओर से 27 और बचाव पक्ष की ओर से 13 गवाहों की गवाही हुयी.

इसे भी पढ़ेंः बकोरिया कांड : एडीजी एमवी राव ने सरकार को लिखा पत्र, डीजीपी डीके पांडेय ने फर्जी मुठभेड़ की जांच धीमी करने के लिए डाला था दबाव

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.