विभावि और कोयलांचल विवि में अनुबंध पदों पर सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति पर लगा स्टे कोर्ट ने हटाया, अब ले सकेंगे क्लास, अधिकतम 36 हजार मिलेंगे

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 05/15/2018 - 20:24

Ranchi : पिछले साल विनोवा भावे विश्वविद्यालय और कोयलांचल विश्वविद्यालय के लिए हुए अनुबंध पर नियुक्तियों पर लगे स्टे को कोर्ट ने आज हटा लिया है. साथ ही इस नियुक्ति के खिलाफ उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग पर दायर मधुसुधन राजा के केस को निरस्त कर दिया है. साथ ही ये निर्देश भी दिया कि गेस्ट टीचर के संबंध में यूनिवर्सिटी को ही अंतिम निर्णय लेने का विकल्प दिया गया है. पिछले साल हुए अनुबंध शिक्षकों के इंटरव्यू में असफल होने के बाद वे कोर्ट में ये कहते हुए चले गए कि एक अनुबंध के रहते दूसरा अनुबंध नहीं लिया जा सकता. इसपर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए स्टे लगा दिया था, जबकि मधुसुधन राजा सहित 14 अन्य अपीलकर्ता गेस्ट टीचर के पद पर काम कर रहे थे और कोर्ट को अनुबंध में होने का हवाला दिया था.

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सैंकड़ों शिक्षकों के काम करने पर लग गई थी रोक

कोर्ट द्वारा स्टे लगाए जाने के बाद दूसरे कॉलेजों और कई तरह के कार्यों को छोड़कर यूनिवर्सिटी में अध्यापन का कार्य करने आए शिक्षकों को अपने कार्यों से महरुम कर दिया गया था. कोर्ट में गेस्ट टीचरों ने अपने को अनुबंध शिक्षक बताते हुए रिक्त और सृजित पदों पर खुद को कार्यरत बताया था. जबकि कोर्ट में अधिवक्ता ने 45 पेज का काउंटर देकर यह प्रमाणित कर दिया कि गेस्ट टीचर बिना प्रक्रिया के और पिछले दरवाजे से लिए गए थे.

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मधुसुधन राजा के अधिवक्ता नहीं प्रस्तुत कर पाए कोई प्रमाण

कोर्ट में गेस्ट शिक्षकों की पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने अपने पक्ष में कोई भी डॉक्यूमेंट प्रस्तुत नहीं कर पाए. साथ ही पाया गया कि कोर्ट को गुमराह कर बेवजह यूजीसी के अहर्ता, झारखंड के उच्च शिक्षा नियमावली की प्रक्रिया को पूरा कर अनुबंध में चुने गए अभ्यर्थियों को बेवजह प्रताड़ित किया गया.

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