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स्मार्ट बिजली मीटर खरीद में 18.5 करोड़ के घोटाले की साजिश, यूपी-बिहार से महंगे रेट पर होगी झारखंड में मीटर की सप्लाई

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) निदेशालय की तरफ से स्मार्ट मीटर खरीदी के लिए जिस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, वो साफ तौर से एक बड़े घोटाले की तरफ इशारा कर रहा है. निदेशालय में शुरुआत से ही स्मार्ट मीटर खरीद में नियमों का उल्लंघन करना शुरू किया. मीडिया में खबर आने के बावजूद बेखौफ तरीके से पूरे टेंडर प्रक्रिया को अंजाम दिया गया. टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निदेशालय ने अब मीटर खरीद के पर्चेज आर्डर तक जारी कर दिया है. पर्चेज आर्डर जारी होने पर कुछ ऐसे तथ्य न्यूज विंग के हाथ लगे हैं, जिससे साफ तौर से घोटाले का पर्दाफाश होता है. जीरो टॉर्लेंस वाली रघुवर सरकार का यह कोई पहला घोटाला नहीं है, जो सामने आया हो. हर बार की तरह इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि हर घोटाले की तरह इस घोटाले को भी सरकार बर्दाश्त कर लेगी और सारा बोझ झारखंड की जनता पर आएगा. 

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 टेंडर की शर्त ऐसी रखी, जिससे मनचाही कंपनियां ही भर सके टेंडर

स्मार्ट मीटर खरीदने का काम एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है. JBVNL को राज्य में स्मार्ट मीीटर लगाने हैं. विभाग को ऐसे सात लाख मीटरों की जरूरत है. निदेशालय की तरफ से एक ऐसा प्लान बनाया गया, जिससे घोटाला भी हो जा और किसी को पता भी नहीं चले. टेंडर प्रक्रिया में मनचाही कंपनियां ही भाग ले सके, इसके निदेशालय ने टेंडर के लिए उन्हीं कंपनियों को बुलाया जिनका टर्न ओवर 400 करोड़ है. यहां ये जानना जरूरी है कि स्मार्ट मीटर के लिए टोटल टेंडर वैल्यू करीब 60 करोड़ का है. सीवीसी की नियमावली 17/12/2002 और 07/05/2004 के मुताबिक किसी भी टेंडर के लिए टर्नओवर टेंडर वैल्यू से 40 फीसदी तक ज्यादा होना चाहिए. लेकिन यहां कंपनी का टर्नओवर 400 करोड़ कर दिया गया. जो टेंडर वैल्यू के करीब 700 फीसदी ज्यादा हो गया. ऐसे में वहीं कंपनियों ने टेंडर में हिस्सा लिया जो निदेशालय चाह रहा था. बाकी कंपनियां देखती रह गयीं और काम जिसे मिलना था उसे मिल गया. 

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बिहार के लिए मीटर की कीमत 682 और झारखंड के लिए 905 रुपए

ऐसा नहीं है कि झारखंड में ही स्मार्ट मीटर लगने का काम हो रहा है. सभी प्रदेशों में सरकार ये काम करवा रही है. जिन कंपनियों ने झारखंड में टेंडर लिया है, वही कंपनी बिहार और यूपी में भी मीटर सप्लाई करने का काम कर रही है. लेकिन ये जान कर हैरत होगी कि जिस मीटर को बिहार में 682, यूपी में 644 रुपए में कंपनी दे रही है, उसी मीटर की कीमत झारखंड में 905 रुपए है. JBVNL निदेशालय की तरफ से टेंडर प्रक्रिया में एल वन आयी कंपनी HPL ने एक मीटर के लिए 947 रुपए कोट किया था. JBVNL ने जो पर्चेज ऑर्डर कंपनी को दिया है, उसमें जीएसटी जोड़ कर विभाग की तरफ से कंपनी को 905 रुपए दिए जाएंगे. यानि बिहार से 223 और यूपी से 261 रुपए ज्यादा.

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करीब 18.5 करोड़  का घोटाला करने की है साजिश

JBVNL ने जो पर्चेज ऑर्डर कंपनी को दिया है, उसमें जीएसटी जोड़कर विभाग की तरफ से कंपनी को 905 रुपए दिए जाएंगे. यानि बिहार से 223 और यूपी से 261 रुपए ज्यादा. गौर करने वाली बात है कि जब बिहार और यूपी में 682 और 644 रुपए में वही कंपनी मीटर उपलब्ध करा दे रही है, तो झारखंड में 261 रुपए ज्यादा लेने का क्या मकसद है. आखिर हर मीटर पर लिए जाने वाले 261 रुपए किस-किस की जेब में जाएंगे. बिजली उपकरण में डील करने वाली दूसरी कंपनी वालों का कहना है कि झारखंड में सात लाख स्मार्ट मीटर आपूर्ति करने के लिए करीब 18,50000 रुपए का घोटाला किया जा रहा है. ये पैसा कंपनी से लेकर JBVNL निदेशालय के बड़े अधिकारियों की  जेब तक जाएगा. आरोप ये भी लग रहे हैं कि सरकार सब जानते हुए भी शांत है. आखिर क्यों सरकार टेंडर को रद्द नहीं कर रही है.    

टेंडर में भाग लेने वाली सभी कंपनियों को ऑर्डर देने की तैयारी

इधर JBVNL निदेशालय स्मार्ट मीटर के लिए टेंडर में भाग लेने वाली सभी कंपनियों को खुश करने की तैयारी में है. हो भी क्यों ना सभी बड़ी टर्नओवर वाली कंपनियां हैं. जो कंपनी एलवन आयी है वो HPL है. विभाग ने अभी इस कंपनी को 1,40000 मीटर सप्लायी करने का ऑर्डर दिया है. झारखंड में सात लाख स्मार्ट मीटर की जरूरत है. ऐसे में निदेशालय टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली GENUS, L&T, L&G और SECURE को भी ऑर्डर देने की तैयारी में है. सभी कंपनियों को एलवन यानि HPL वाली रेट यानि 905 रुपए प्रति मीटर सप्लायी का ऑर्डर देने की तैयारी है. ऐसे में जाहिर तौर पर करीब 18.5 करोड़ यूपी और बिहार से ज्यादा विभाग कंपनियों को भुगतान करेगा. इसी रकम की बंदरबांट घोटाले के तौर किये जाने की तैयारी है.

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