कंपनियों को सब्सिडाइज्ड दर पर मिलने वाले कोयला में रिजेक्टेड कोल व डस्ट मिलाकर हर रैक 40 लाख की अवैध कमाई कर रहे कारोबारी

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 02/02/2018 - 10:25

** सब्सिडी पर करीब 2000 रुपया प्रति टन सस्ता कोयला मिलता है कंपनियों को.

** 4000 टन कोयला में 1500 टन घटिया व 500 टन डस्ट मिलाकर हो रही रैक लोडिंग.

** धनबाद के भागा व दुग्धा और रामगढ़ के गोला व बरकाकाना रेलवे साइडिंग पर चल रहा खेल.

** जेपी, जेवीके और बंगाल पावर को हर साल जाता है करीब 50 लाख टन कोयला.

Ranchi: धनबाद के भागा व दुग्धा और रागमढ़ के गोला व बरकाकाना रेलवे साइडिंग से तीन बड़ी कंपनियों को रैक से कोयला भेजा जाता है. कंपनियों को सरकार सब्सिडी (बाजार मूल्य से कम) पर कोयला उपलब्ध कराती है. ताकि कंपनियां बिजली का उत्पादन कर सके. राज्यों को  बिजली मिले और लोगों को रोजगार. चारो कोल साइडिंग से तीन कंपनियों जेपी, जेवीके और बंगाल टाईगर को हर साल करीब 50 लाख टन कोयला रैक के जरिए भेजा जाता है. बिजली कंपनियों ने कोयला खादान से कोयला की ढ़ुलाई से लेकर रैक लोडिंग कराने तक का काम अलग-अलग ट्रांसपोर्ट कंपनियों को दिया हुआ है.

सब्सिडाइज्ड दर पर मिलता प्रति वर्ष 50 लाख टन, 25 लाख टन चोरी कर बिकता है खुले बाजार में

सीसीएल, रेलवे, रेल पुलिस, ट्रांसपोर्टर और कंपनियों से जुड़े लोगों ने एक सिंडिकेट तैयार कर रखा है. बिजली कंपनियों को सरकार अच्छी क्वालिटी का कोयला सब्सिडी दर पर देती है. प्रति टन करीब 2000 रुपया का सब्सिडी मिलता.  जितना कोयला, खादान से निकलता है, उसमें से आधा कोयला खुली बाजार में बेच दिया जाता है. इस तरह करीब हर साल करीब 25 लाख टन कोयला जो बिजली कंपनियों को सब्सिडाइज्ड रेट पर सरकार देती है, उसे खुले बाजार में बाजार मूल्य पर बेच दिया जाता है. और इसके बदले अच्छी क्वालिटी के कोयला में बोकारो के करगली इलाके से रिजेक्ट कोयला खरीद कर मिला दिया जाता है. अच्छी क्वालिटी के कोयला में एक तय मात्रा में डस्ट (चारकोल) भी मिला दिया जाता है. इस तरह बिजली कंपनियों तक जो कोयला पहुंचता है, उसमें 50 प्रतिशत तो अच्छी क्वालिटी की होती है और करीब 35 प्रतिशत कोयला करगली इलाके से खरीदा गया रिजेक्ट कोल होता है. और करीब 15 प्रतिशत कोयला की जगह डस्ट (चारकोल) होता है.

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प्रति रैक 40 लाख से अधिक का अवैध मुनाफा 

कोयला कोराबार से जुड़े एक कारोबारी ने जानकारी दी है कि धनबाद व रामगढ़ जिला में पड़ने वाले जिन चार रेलवे कोल साइडिंग से यह अवैध कारोबार हो रहा है, वहां से सलाना 1250 रैक कोयला बिजली कंपनियों को भेजा जाता है. एक रैक में 4000 टन कोयला लोड होता. हर रैक में लोडिंग के लिए साइडिंग पर अनलोड हुए 4000 टन में 2000 टन कोयला की चोरी करके उसे खुले बाजार में बेचा जाता है. अगर सिर्फ प्रति टन सरकार से मिलने वाले सब्सिडी को ही मुनाफा मान लिया जाए, तो यह रकम 40 लाख होता है. इस तरह सीसीएल, रेलवे, रेल पुलिस, ट्रांसपोर्टर और कंपनियों से जुड़े लोगों का सिंडिकेट प्रति रैक 40 लाख रुपया की अवैध कमाई कर रहा है. 

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कंपनियों को हो रहा है भारी नुकसान

सीसीएल, रेलवे, रेल पुलिस, ट्रांसपोर्टर और कंपनियों से जुड़े लोगों के सिंडिकेट द्वारा किए जाने वाले इस अवैध कारोबार की वजह से बिजली कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्हें अच्छी क्वालिटी का कोयला नहीं मिल पा रहा है. इसका असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ रहा है. साथ ही कंपनियों की आर्थिक सेहत भी खराब हो रही है. आर्थिक मामलों से जुड़े लोग बताते हैं कि घटिया कोयला का असर यह तक हो सकता है कि आगे चल कर ये कंपनियां बंद हो जाएंगी और  बैंक का एनपीए बढ़ेगा और हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे.

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