भारत-प्रशांत क्षेत्र पर दबदबा बनाने के लिए पड़ोसी देशों पर दबाव बना रहा चीन : पेंटागन

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 02/13/2018 - 16:22

Washington : अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने कांग्रेस (संसद) को बताया है कि ‘भारत-प्रशांत क्षेत्र’ को अपने फायदे के लिहाज से पुन: व्यवस्थित करने के लिए चीन अपने पड़ोसियों पर दबाव बना रहा है. पेंटागन ने कहा कि चीन की ओर से अपनी आर्थिक एवं सैन्य आक्रामकता बनाये रखने और दीर्घकालिक रणनीति के जरिये सत्ता का प्रभाव दिखाने के कारण यह एक ऐसा सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम जारी रखेगा जो निकट भविष्य में भारत-प्रशांत क्षेत्रीय वर्चस्व और अमेरिका को विस्थापित करने की कोशिश करेगा ताकि भविष्य में वैश्विक प्रमुखता प्राप्त कर सके.

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आक्रामक अर्थशास्त्र का इस्तेमाल कर पड़ोसी देशों पर बना रहा दबाव

वित्तीय वर्ष 2019 के लिए अपने वार्षिक रक्षा बजट में पेंटागन ने कहा कि चीन सैन्य आधुनिकीकरण, प्रभाव डालने वाले अभियानों और आक्रामक अर्थशास्त्र का इस्तेमाल कर पड़ोसी देशों पर दबाव बना रहा है ताकि भारत-प्रशांत क्षेत्र को अपने फायदे में पुन:व्यवस्थित कर सके. चीन समूचे दक्षिण चीन सागर पर संप्रभुता का दावा करता है. वियतनाम, मलेशिया, फिलीपीन, ब्रूनेई और ताईवान इसके उलट दावा करते हैं. पूर्वी चीन सागर में भी चीन का जापान के साथ क्षेत्रीय विवाद है. बीजिंग ने कई द्वीपों और रीफों को बनाकर उनपर सैन्य नियंत्रण कायम कर लिया है.

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चीन और रूस अधिनायकवादी मॉडल से मेल खाती दुनिया बनाना चाहते हैं

दोनों क्षेत्र खनिज, तेल एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों के मामले में समृद्ध माने जाते हैं. वैश्विक व्यापार के लिए भी वे अहम हैं. पेंटागन के मुताबिक, अमेरिकी समृद्धि और सुरक्षा के लिए प्रमुख चुनौती संशोधनवादी शक्तियों (रिवीजनिस्ट पॉवर्स) की दीर्घकालिक और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का फिर से उदय होना है. रक्षा विभाग ने कहा कि यह स्पष्ट है कि चीन और रूस एक ऐसी दुनिया बनाना चाहते हैं जो उनके अधिनायकवादी मॉडल से मेल खाती हो और अन्य देशों के आर्थिक, कूटनीतिक और सुरक्षा फैसलों पर उन्हें वीटो का अधिकार मिल जाये.

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