सीआइडी ने कोर्ट को झूठ कहा है कि इंस्पेक्टर हरीश पाठक ने  NHRC को क्या बयान दिया, जानकारी नहीं

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 01/20/2018 - 16:35

- 04 दिसंबर 2017 को हरीश पाठक ने सीआइडी को जो बयान दिया है, उसमें एनएचआरसी को दिए बयान का है जिक्र.

- हरीश  पाठक ने अपने बयान के साथ एनएचआरसी को दिए बयान की प्रति भी उपलब्ध करायी थी सीआइडी को.

Ranchi : बकोरिया कांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर हाई कोर्ट में दाखिल याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 24 नवंबर 2017 को मामले की जांच कर रही सीआइडी से कई बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी. 16 जनवरी 2018 को सीआइडी ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दे दी है. रिपोर्ट में यह कहा गया है कि सीआइडी को इस बात की जानकारी नहीं है कि इंस्पेक्टर हरीश पाठक ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को क्या बयान दिया. एनएचआरसी को दिए गए बयान की प्रति भी सीआइडी के पास नहीं है. newswing.com के पास उपलब्ध दस्तावेज के मुताबिक 04 दिसंबर 2017 से सीआइडी को यह पता है कि इंस्पेक्टर हरीश पाठक ने एनएचआरसी को क्या बयान दिया था.

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04 दिसंबर को ही सीआइडी को मिल गयी थी हरीश पाठक का एनएचआरसी को दिए बयान की कॉपी

हरीश पाठक ने सीआइडी को दिए बयान में एनएचआरसी को दिए बयान की जो जानकारी दी थी
हरीश पाठक ने सीआइडी को दिए बयान में एनएचआरसी को दिए बयान की जो जानकारी दी थी

04 दिसंबर 2017 को हाई कोर्ट के आदेश पर सीआइडी ने इंस्पेक्टर हरीश पाठक का बयान दर्ज किया था. हरीश पाठक ने अपने लिखित बयान के अंतिम पन्ने पर लिखा हैः राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा भी मुझसे इस घटना के संबंध में पूछताछ की गयी थी. मैंने उन्हें भी लिखित रुप से सारी घटना के बारे में बताया था. जिसकी प्रति संलग्न है. इंस्पेक्टर हरीश पाठक ने सीआइडी के एसपी सुनील भाष्कर को अपना बयान लिखित रुप से दिया था. जिसे एसपी ने रिसिव भी किया था. बयान के साथ हरीश पाठक ने एनएचआरसी को दिए  बयान (06 मार्च 2017 को) की प्रति भी संलग्न की थी.  और संलग्न करने की बात सीआइडी को दिए बयान में भी लिखा है.

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घटनास्थल पर मौजूद थे हरीश पाठक, फिर घटना से लेना-देना कैसे नहीं

सीआइडी ने हाई कोर्ट में दिए हलफनामे में एक और झूठ लिखा है. सीआइडी ने हाईकोर्ट को बताया है इंस्पेक्टर हरीश पाठक पलामू के सदर थाना प्रभारी थे. बकोरिया सतबरवा थाना में पड़ता है. इसलिए बकोरिया में हुए कथित मुठभेड़ से हरीश पाठक का कोई लेना देना नहीं.  newswing.com  के पास एेसी कई तस्वीरें उपलब्ध हैं, जिससे यह साबित होता है कि घटना के बाद हरीश पाठक बकोरिया में मौजूद थे. तस्वीरों में हरीश पाठक मृतकों के शव का मुअायना करते नजर आ रहे हैं. 

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कोर्ट में याचिका दाखिल होने से पहले 04.08.15 और 23.04.16 को भी हरीश ने सवाल उठाये थे

04.08.2015 को हरीश श्रीवास्तव ने एसपी को पत्र लिख कर जो कहा था, उसका अंश..
04.08.2015 को हरीश श्रीवास्तव ने एसपी को पत्र लिख कर जो कहा था, उसके अंश..

दरअसल, सीआइडी ने हाई कोर्ट में जो हलफनामा दाखिल किया है, उसमें यह साबित करने की कोशिश की है कि इंस्पेक्टर हरीश पाठक किसी के बहकावे में आकर बकोरिया कांड के सिलसिले में गलत बयान दे रहे हैं. लेकिन हरीश पाठक ने बकोरिया कांड में पहली बार सवाल नहीं उठाया है. बकोरिया कांड को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल होने से बहुत पहले हरीश पाठक ने पलामू के तत्कालीन एसपी कन्हैया मयूर पटेल को दो पत्र लिखे थे. चार अगस्त 2015 को लिखे पत्र में हरीश पाठक ने साफ लिखा था कि बकोरिया कांड में आपने (एसपी) जो भी करवाया या जो आपके निर्देश पर किया गया, उसके साक्षी आप (एसपी) खुद हैं. एेसा करवा कर आपके तुरंत मुकर जाने से मुझे काफी दुख हुआ है.

06.03.2016 हरीश पाठक ने एसपी को जो पत्र लिख कर कहा, उसका अंश..
06.03.2016 हरीश पाठक ने एसपी को जो पत्र लिख कर कहा, उसके अंश..

23 अप्रैल 2016 को हरीश पाठक ने दूसरा पत्र एसपी को लिखा. जिसमें हरीश पाठक ने लिखा हैः मैं स्मरण दिलाना चाहता हूं कि आपके निर्देश पर दूसरे थाना के दर्जनों कांडों के उदभेदन व गिरफ्तारियों में सहयोग दिया है. यह सूचित करने के लिए मैं मजबूर होता जा रहा हूं कि  बकोरिया कांड (पुलिस-नक्सली मुठभेड़) में आपने जो भी करवाया या आपके निर्देश पर जो-जो क्रियाकलाप हुआ, उससे आप भलीभांति अवगत हैं. आप इस बात से भी अवगत हैं कि इस घटना से संबंधित पूरी गहराई से जानकारी मुझे भी है. एक जगह पर हरीश पाठक ने एसपी को चुनौती देते हुए लिखा है कि आप चाहे तो मेरा नारको टेस्ट  करा सकते हैं. इसके बाद हरीश पाठक ने एसपी से कहा हैः सच्चाई पर रहने वाले व्यक्ति को तत्काल परेशान जरुर होना पड़ता है. लेकिन झूठा आरोप लगाकार सत्य को दबाया नहीं जा सकता. वैसे भी जब मेरा निलंबन पूर्व से तय ही था तो इस मामले में नहीं तो किसी और मामले में कर ही दिया जाता. लेकिन बकोरिया की सच्चाई अब सबको पता है. विभाग की मर्यादा के कारण सबकुछ जानते हुए भी मैं अाज तक मौन हूं. मुझे निलंबित करके सच्चाई को दबाने का प्रयास किया जा रहा है. 

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