50 लाख के रिश्वत कांड में सीबीआई ने आयकर आयुक्त श्वेताभ सुमन को किया गिरफ्तार, तीन अन्य लोग भी शिकंजे में

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 04/13/2018 - 20:52

New Delhi : केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 1988 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी, आयकर आयुक्त के रूप में कार्यरत श्वेताभ सुमन को 50 लाख रुपये रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया है. सुमन को उनके जूनियर आयकर अधिकारी प्रताप दास, एक मध्यस्थ प्रणवल शर्मा और एक अन्य व्यक्ति रमेश गोयनका के साथ सीबीआई ने शिकंजे में लिया है. सुमन पर यह आरोप है कि वो जोरहाट गुवाहाटी में आयकर (ऑडिट) के आयुक्त के रूप में अतिरिक्त प्रभार पर तैनात थे. जहां उन्होंने मंगलवार को मैसर्स पावर इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुरेश अग्रवाल से 50 लाख रुपये की मांग की थी. सीबीआई ने इस मामले में इनकम टैक्स कमिश्नर के खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया है. वहीं जोरहाट के कारोबारी सुरेश अगरवाला के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.  

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क्या है मामला ? 

सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक 2017-18 में आईटी कमिश्नर जोरहाट के बिजनेसमैन के पक्ष में आदेश देने के लिए राजी हो गए थे. कथित तौर पर श्वेताभ सुमन ने अपने पद का दुरुपयोग किया और चार्टर्ड अकाउंटेंट के माध्यम से एक शेल कंपनी के डायरेक्टर सुरेश अगारवाल से 50 लाख रुपए की घूस लेने का प्रयास किया. इस मामले में सीबीआई ने गुवाहाटी, जोरहाट, नागौन, दिल्ली, नोएडा, शिलांग, होजाई और कुछ अन्य जगहों पर छापेमारी की, जिसमें 40 लाख रुपए और कुछ संदिग्ध डॉक्यूमेंट्स जब्त किए गए. इससे पहले सुमन के खिलाफ 2005 में आय से ज्यादा संपत्ति के मामले में भी केस दर्ज किया जा चुका है.

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झारखंड में भी श्वेताभ की गिरफ्तारी से सनसनी

सीबीआइ के मुताबिक कर चोरी और अन्य किस्म की गड़बड़ियों की जांच के क्रम में जांच एजेंसी का ध्यान श्वेताभ सुमन पर गया था. प्रारंभिक जांच में यह पाया गया था कि वर्ष 2017-18 के दौरान श्वेताभ सुमन गुवाहाटी में पदस्थापित थे. वहां के आयकर अधिकारी प्रताप दास की मिलीभगत से इनलोगों ने एक स्थानीय व्यापारी सुरेश अग्रवाल को नाजायज लाभ पहुंचाया था. इसी क्रम में रमेश गोयनका और अमित गोयनका ने भी गड़बड़ी में मदद की थी. इस संबंध में सीबीआइ ने 11 अप्रैल को कई धाराओं में एक प्राथमिकी दर्ज करने के बाद सुमन और उनके सहयोगियों पर शिकंजा कसा है. श्वेताभ सुमन की गिरफ्तारी झारखंड के लिए चर्चा का विषय है, क्योंकि वे झारखंड के निवासी हैं और काफी समय तक यहां पदस्थापित भी रह चुके हैं.

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