काले धन पर हमलावर मोदी सरकार, दूसरे चरण में 2.25 लाख शेल कंपनियों पर लगेगा ताला

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 06/08/2018 - 18:45

NewDelhi : काला धन पर हमलावर मोदी सरकार ने नवंबर 2016 में नोटबंदी करने के बाद शेल कंपनियों के पर कतरने की कवायद शुरू की थी. इसमें अब तेजी लायी जायेगी.  नोटबंदी के बाद सरकार के रडार पर आयी शेल कंपनियों पर कार्रवाई अब और तेज होने वाली है. सरकार काले धन पर रोक लगाने के लिए शेल कंपनियों के खिलाफ एक और मुहिम शुरू करने वाली है. सरकारी एजेंसियों ने इस बार 2 लाख 25 हजार 910 शेल कंपनियों की पहचान की है. इन कंपनियों में 7191 एलएपी कंपनियां भी शामिल हैं. सरकार की तरफ से इस साल इन सभी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है. वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को टॉस्क फोर्स को शेल कंपनियों पर कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिया है. एसएफआईओ की तरफ से शेल कंपनियों की सूची तैयार कर ली गयी है. वित्त वर्ष 2019 में इन कंपनियों को डि-रजिस्टर किया जा सकता है. इससे पहले फाइनेंशियल ईयर 2018 में सरकार 2.26 लाख शेल कंपनियों का नाम हटा चुकी है. गौरतलब है कि फरवरी 2017 में पीएमओ ने रेवेन्यू सेक्रेटरी और मिनिस्ट्री ऑफ कंपनी अफेयर्स के सेक्रेटरी को मिलाकर शेल कंपनियों की पहचान के लिए टॉस्क फोर्स का गठन किया था. एसएफआईओ को शेल कंपनियों के बारे में मिली जानकारी के आधार पर टास्क फोर्स कार्रवाई की तैयारी कर रही है. अब टास्क फोर्स इन कंपनियों की पहचान कर रही है. कॉरपोरेट मंत्रालय को बैंकों से जो डिटेल्स मिली हैं उनमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. नोटबंदी के दौरान इन शेल कंपनियों के जरिए मोटी ट्रांजेक्शन की गई थीं. बाद में इन कंपनियों की मदद से ही नोटबंदी के वक्त बैंकों में जमा की गई पूरी राशि निकाल ली गयी थी.

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 देश के 33 लाख कंपनी निदेशकों का विवरण सरकार के पास रजिस्टर्ड होगा

सूत्रों के अनुसार कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय शेल कंपनियों पर नकेल कसने और कंपनियों में डायरेक्टर्स को और अधिक जिम्मेदार बनाने और कॉरपोरेट जगत में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से नयी केवाईसी योजना शुरू करने जा रहा है. इस योजना के तहत कंपनियों के सभी डायरेक्टर्स को अपना पासपोर्ट डिटेल, पैन नंबर और कॉन्टैक्ट डिटेल्स सालाना देना होगा.बता दें कि हर कंपनी को सालाना आर्थिक प्रतिवेदन रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के दफ्तर में फाइल करना होता है. इस प्रक्रिया में मंत्रालय ने दो नये छोटे फॉर्म जोड़े हैं. पहले फॉर्म में कंपनी के डायरेक्टर का पूरा विवरण,  पासपोर्ट नंबर, पैन नंबर, मोबाइल नंबर, ई-मेल और पता दर्ज कराना होगा. इसे आरओसी की वेबसाइट पर कंपनी सेक्रेटरी या चार्टर्ड अकाउंटेटंट सालाना आर्थिक रिपोर्ट अपलोड करते समय शामिल करेंगे. दूसरे फॉर्म में कंपनी का भौतिक सत्यापन कराना होगा यानी कंपनी जिस पते पर कार्यशील होगी उसे दर्ज कराना होगा. इससे कंपनी तक विभागीय पहुंच आसान हो सकेगी. इस फॉर्म को भी कंपनी सेक्रेटरी या चार्टर्ड अकाउंटेंट सालाना आर्थिक प्रतिवेदव जमा करते समय अपलोड करेंगे. सरकार का मानना है कि कि इस मुहिम से शेल कंपनियों पर रोक लगायी जा सकेगी. कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में सचिव इनजेति श्रीनिवास के अनुसार इस मुहिम से देश के 33 लाख कंपनी निदेशकों का विवरण सरकार के पास रजिस्टर्ड हो सकेगा.   

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