बिहार : 20 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए प्रखंड शिक्षा अधिकारी

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 01/19/2018 - 10:52

Patna : बिहार राज्य निगरानी अन्वेषण ब्यूरो एक टीम ने अररिया जिले के अररिया प्रखंड शिक्षा अधिकारी को एक व्यक्ति से 20,000 रूपये की रिश्वत लेते हुए गुरुवार को रंगे हाथों धर दबोचा. पटना स्थित ब्यूरो मुख्यालय से प्राप्त जानकारी परिवादी और अररिया जिला के ताराबाड़ी थाना अंतर्गत आमगाछी गांव निवासी अजीत कुमार सिंह ने शिकायत दर्ज करायी थी कि मो0 मंसूर आलम द्वारा सेवा पुस्तिका अद्यतन करने के लिए 20,000 रुपये रिश्वत की मांग की जा रही थी.

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सत्यापन के बाद आरोप सही पाये जाने पर पुलिस उपाधीक्षक मो0 जमीरउद्दीन के नेतृत्व में गठित ब्यूरो की एक टीम ने परिवादी से मोहम्मद मंसूर आलम को 20,000 रूपये का चेक रिश्वत के तौर पर लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. अभियुक्त से पूछताछ किए जाने के बाद उसे पटना स्थित विशेष अदालत में पेश किया जायेगा.

क्या है रिश्वत

जब एक आम आदमी अपने स्वार्थ के लिए छोटे-बङों को लालच के रूप पैसे देकर अपना काम करवाता है उसे रिश्वत कहते हैं. रिश्वत की शुरूवात हम आम नागरीकों से होती है. फिर क्यों हम अधिकारीयों नैताओं पर ये इलजाम लगाते है कि वो रिश्वत लेते है. पहले अपने आप को सुधारने की जरूरत है और पहले हमें रिश्वत देने से ना करना है तब जाकर यह मामला सुधर सकता है. इस रिश्वत की शुरूआत हम ही करते हैं. जैसे अगर बच्चा स्कुल नहीं जाता तो 10-20 रुपये रिश्वत के रूप में देते हैं और उसे स्कूल जाने को बोलते हैंत. कोर्ट से कोई सर्टीफिकेट बनवाना है तो रिश्वत, बच्चों की नौकरी लगवानी है तो रिश्वत देते हैं, स्कुल कालेज मे दाखिला लेना हो तो रिश्वत, बैंक में लोन पास करवाने के लिए रिश्वत देते हैं. और हम चाहते है भ्रष्टाचार मुक्त देश हो, लेकिन इस तरह के रैवैये से भ्रष्टाचार मुक्त देश संभव नहीं है.

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