झारखंड में PDS का सचः परिवार के सदस्यों के नाम आधार से लिंक नहीं होने पर, आवंटित अनाज से वंचित किये जा रहे लाभुक

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 02/06/2018 - 14:59

Pravin Kumar

Ranchi: राज्य में भूख से मौत के बाद सरकार द्वारा समय पर राशन मुहैया नहीं कराने के कई मामले सामने आ चुके हैं. अब वैसे भी मामले सामने आने लगे हैं, जिसमें लाभुकों के परिवार के सदस्यों का नाम आधार कार्ड से लिंक नहीं होने पर, उनका राशन नहीं दिया जा रहा है. राज्य में प्राथमिक परिवारों को गुलाबी कार्ड के द्वारा राशन मुहैया कराया जाता है. परिवार के प्रति सदस्य 5 किलो अनाज परिवार को मिलता है. सरकार परिवार के प्रति सदस्यों के हिसाब से राशन आवंटित करती है. ऐसे में जिन सदस्यों का नाम आधार से लिंक नहीं है, उनका राशन नहीं मिल रहा है. साथ ही डीलर के द्वारा भी लाभुकों को कम अनाज दिये जाने की राज्य में शिकायतें आम हैं.

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लातेहार के मनिका प्रखंड के, सरैया पंचायत के, चामा गांव के, राशन लाभुकों को यूनिट के अनुपात में डीलर के द्वारा कम राशन दिया जा रहा है. ऐसे कई परिवार हैं, जिन्होंने कम राशन मिलने की बात कही है. चामा गांव के डीलर प्रमिला देवी से इस संबंध में जब लाभुक जानना चाहे, तो डीलर ने कहा कि सरकारी अधिकारियों के आदेश के अनुसार ही राशन दिया जा रहा है.

गांव की सरिता देवी का राशन कार्ड नंबर 202002795502 है. परिवार के 5 सदस्यों का नाम राशन कार्ड में है, लेकिन परिवार के चार सदस्यों का ही आधार से लिंक किया गया है. इसके कारण परिवार को नवंबर महीने में 20 किलो ही अनाज मिला है.

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चामा के ही सुभाचानी कुमारी का कार्ड नंबर 202002795456 है. इन्हें नवंबर माह में 20 किलो अनाज दिया गया है, जबकि झारखंड की सरकारी वेबसाइट में 25 किलो अनाज का आवंटन दिखाया गया है. परिवार के चार सदस्यों का ही नाम आधार से लिंक होने के कारण डीलर ने उन्हें 20 किलो खाद्यान्न दिये. खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा संचालित Aahar.jharkhand.gov.in बेबसाईट पर लाभुकों के नाम पर किये गये आनाज आवंटन से उन्हें कम दिया जा रहा.

अनाज आवंटन के बाद भी नहीं मिल रहा लाभुकों को अनाज

चामा के ही कुलदीप सिंह का कार्ड नंबर 202002795568 है. परिवार में कुल 9 सदस्य हैं. जिसमें से 7 सदस्यों का नाम आधार से लिंक कराया गया है. सरकारी वेबसाइट में 35 किलो अनाज इस परिवार के नाम से आवंटन दिखाया गया है, जबकि डीलर के द्वारा परिवार के सदस्य को अनाज देने से ही इंकार कर दिया गया.

3118 लोगों में से 599 लोगों को आधार के कारण राशन से वंचित कर दिया गया

मनिका प्रखंड के सेवधरा, कुटमू, नवाटोली (सधवाडीह), देवबार, नद्बेलवा, दक्षिण टोला (कोपे), सिरिस, दासडीह, सोसदोहर, पगार के 10 गांवों में आधार से जोड़े गये एवं राशन से वंचित परिवारों का एक अध्ययन, नरेगा सहायता केन्द्र मनिका ने किया. अधय्यन में इस बात का खुलासा हुआ है कि जिस कार्डधारी के परिवार के सदस्यों का नाम आधार से लिंक नहीं किया गया है, उन सदस्यों के नाम का अनाज नहीं मिल रहा है. प्रखंड के 10 गांवों के 567 कार्डधारियों का सर्वेक्षण किया गया. इसमें कुल 3110 परिवारों के सदस्यों का नाम राशन कार्ड में है. इसमें से किसी कारणवश 599 लोगों का नाम आधार से लिंक नहीं किया जा सका. ऐसे सदस्यों को अनाज से वंचित होना पड़ रहा है. इन दस गांव में ऐसे 162 परिवार भी अध्ययन के दौरान मिले, जिनका किसी भी तरह का कार्ड नहीं बना है.

सरकार का दावा

दूसरी ओर सरकार का दावा है कि 99 प्रतिशत कार्ड को आधार से जोड़ दिया गया है. लेकिन आज भी ऐसे कई परिवार के सदस्य राज्य में मौजूद हैं, जिनका कार्ड में तो नाम है पर आधार से लिंक नहीं किया जा सका है और इस वजह से ऐसे लोगों को अनाज नहीं मिल पा रहा है.

सरकार श्वेतपत्र जारी करे

भोजन का अधिकार अभियान से जुड़े हुए कार्यकर्ता धीरज कुमार का कहना है कि सरकार आधार की अनिवार्यता के नाम पर लाभुकों का राशन कटा जा रहा है. ऐसा करना सरासर गलत है. भाजपा सरकार ने नियम-कानून की धज्जियां उड़ाकर बिना भौतिक सत्यापन के लाखों जरूरतमंद परिवारों का राशन रद्द कर दिया. खाद्य आपूर्ति मंत्री ने गलती भी स्वीकार की लेकिन मात्र गलतियां स्वीकार करने से कुछ नहीं होगा. इस गलती को सुधारने के लिए सरकार की ओर से कोई तत्परता नहीं दिख रही है. धीरज कुमार ने कहा कि जितने राशन कार्ड रद्द हुए हैं, उनकी ग्रामवार सूची जारी की जाये. प्रखंड स्तर पर किनका राशन कार्ड बना है. इसे लेकर कोई पारदर्शिता नहीं है. खूंटी में कई ऐसे परिवार हैं, जिन्होंने राशन कार्ड रद्द होने के बाद आवेदन दिया था लेकिन उनका राशन कार्ड अभी तक नहीं बना. कई जरूरत मंद परिवार तो राशन कार्ड के लिए आवेदन ही नहीं कर पाये हैं. ऐसी स्थिति में पीडीएस पर झारखंड सरकार श्वेत पत्र जारी करे.

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