दिल्ली की तरह निर्णय हुआ तो छत्तीसगढ़ में गिर सकती है भाजपा सरकार

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 01/23/2018 - 17:33

Raipur : असम और दिल्ली में संसदीय सचिवों को लेकर आये फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में हलचल तेज हो गई है. छत्तीसगढ़ में भी 11 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया गया है. इनके खिलाफ उच्च न्यायालय में सुनवाई अंतिम दौर में चल रही है.

90 विधानसभा सीट वाले छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल भाजपा के पास 49 विधायक हैं. इनमें से 11 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया गया है. मसलन अगर दिल्ली वाली स्थिति छत्तीसगढ़ में निर्मित होती है तो यहां सरकार पर संवैधानिक संकट आ जाएगा.

तिथिवार संसदीय सचिवों का मामला
- 13 दिसंबर 2016 को बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर
- 13 फरवरी 2017 को राज्य शासन, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव को नोटिस जारी
- 27 अप्रैल 2017 को नोटिस के 10 हफ्ते बाद भी जवाब नहीं मिला
- 02 मई 2017 को राज्य शासन के एक सचिव हाईकोर्ट में उपस्थित हुए
- 28 जून 2017 को शासन का जवाब नहीं आने पर हाईकोर्ट ने मामले को अंतिम सुनवाई के लिए रखा
- कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 तक शासन से शपथ पत्र में जवाब मांगा था
- 25 जुलाई 2017 को सुनवाई टली
- 31 जुलाई 2017 को तकनीकी त्रुटि का हवाला देते हुए फिर सुनवाई टल गई, लेकिन कोर्ट ने मेंसन किया सुप्रीम कोर्ट ने असम के 11 संसदीय सचिवों को अवैध माना है
- 23 अगस्त 2017 को मामले की अंतिम सुनवाई एक दिन के लिए टली
- 24 अगस्त 2017 शासकीय महाधिवक्ता की अनुपस्थ्तिति में फिर सुनवाई टली
- 12 दिसंबर को मुख्य न्यायाधीश ने व्यस्सता का हवाला देकर अगली तारीख दी
- 12 जनवरी 2018 को सुनवाई होनी थी, मगर मुख्य न्यायाधीश छुट्टी पर थे
- 12 जनवरी को ही शाम 4 बजे मुख्य न्यायाधीश टीबी राधाकृष्णन का स्थानातंरण आदेश जारी हो गया.

अब इसे इत्तेफाक कहिए या फिर कुछ और जिस दिन मुख्य न्यायाधीश ने मामले को अंतिम सुनवाई के लिए रखा, उसी 12 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश का स्थानातंरण आदेश जारी हो जाता है. खैर मामले को लेकर अब राजनीति तेज हो गई है. पक्ष बचाव की मुद्रा में है तो वहीं विपक्ष हमालवर. ऐसा नहीं हैं कि सरकार ने केवल इन्ही 11 विधायकों को मलाईदार पर दिया हो. इनके अवाला भी आधा दर्जन विधायकों को निगम-मंडलों का प्रमुख बनाया गया है. इनको लेकर भी विपक्ष सवाल खड़े करता रहा है. कई बार खुले मंच से इसका विरोध भी किया गया है.

विधायक, जिनको मलाईदार पद मिले
-देवजी भाई पटेल - अध्यक्ष- पाठ्य पुस्तक निगम
-शिवरतन शर्मा - अध्यक्ष- खनिज विकास निगम
-संतोष बाफना- अध्यक्ष- छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल
-युद्धवीर सिंह जुदेव- अध्यक्ष- छत्तीसगढ़ बेवरेज कॉर्पोरेशन
-भोजराज नाग- उपाध्यक्ष- बस्तर एंव दक्षिण क्षेत्र विकास प्राधिकरण
-रामशरण भगत- उपाध्यक्ष- सरगुजा एंव दक्षिण क्षेत्र विकास प्राधिकरण
-चुन्नीलाल साहू- उपाध्यक्ष- पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण
-सनम जांगड़े- उपाध्यक्ष- अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण

संसदीय सचिवों को मिलने वाली सुविधाओं पर एक नजर
मासिक वेतन - 75 हजार रुपए, (11 अतिरिक्त भत्ता) - कुल 25 लाख रुपए मासिक खर्च, मंत्रायल में अलग से कमरा, मंत्रालय से अलग डी और ई टाइप कमरे, लाल बत्ती लगी लक्जरी फोर व्हीलर बड़ी गाड़ी, अलग ऑफिस और टेलीफोन, सरकारी डीजल रोजकोष से फ्री, सुरक्षा के लिए 1 से 4 गार्ड, शासकीय बंगले, 06 चौकीदार 2 रसोइया सहित.

यदि कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में संसदीय सचिवों की नियुक्ति अवैध मानकर उनकी विधान सभा सदस्यता खत्म कर दिया तो स्थिति उलट हो जाएगी. दिल्ली में 20 विधायकों के सदस्यता खत्म करने के बाद भी 66 विधायक वाले आम आदमी पार्टी की सरकार तो बच गई मगर छत्तीसगढ़ में सरकार पर संवैधानिक संकट आ जाएगा.

(साभार : न्यूज 18)

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