108 एंबुलेंस सेवा: सरकार का दावा अधूरा, मार्च तक सड़कों पर उतारनी थी 329 एंबुलेंस-अबतक 192 ही हैं उपलब्ध

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 04/17/2018 - 12:22

Saurav Shukla

Ranchi: हम समाज के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाएंगे. ये उद्घोषणा राज्य के मुख्यमंत्री ने झारखंड स्थापना दिवस के दिन किया था. स्थापना दिवस के दिन 108 एंबुलेंस सेवा की सौगात झारखंड की जनता को दिया. इस घोषणा में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा था कि एक लाख की आबादी पर एक एंबुलेंस का संचालन किया जाएगा. उन्होंने 31 मार्च तक 329 एंबुलेंस जनता को समर्पित करने की बात कही थी. लेकिन झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता की आशा अभी भी अधूरी है.

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अबतक 192 एंबुलेंस की सुविधा

ुिरपलु108 एंबुलेंस सेवा का लक्ष्य 31 मार्च तक 329 एंबुलेंस सड़क पर उतार देना था. मार्च तो छोड़िए अप्रैल महीना भी आधे से ज्यादा बीत चुका है और विभाग अबतक 192 एंबुलेंस ही सड़क पर उतार पाई है. 137 एंबुलेंस अभी भी सड़क पर आना बाकी है. एंबुलेंस सेवा के संचालन का जिम्मा जिकित्जा हेल्थ केयर लिमिटेड को दिया गया है.

 चार जिले में एक भी एंबुलेंस नहीं

108 एंबुलेंस सेवा का शुभारंभ 15 नवंबर, झारखंड स्थापना दिवस के दिन किया गया. झारखंड के 24 जिले में इस सेवा को धरातल पर उतारने का लक्ष्य था. लेकिन अभी तक धनबाद,  बोकारो,  जामताड़ा और पश्चिम सिंहभूम में एक भी एंबुलेंस नहीं भेजा गया है. जिकित्जा हेल्थ केयर लिमिटेड के कॉल सेंटर मैनेजर विपुल शुक्ला ने कहा कि जैसे-जैसे गाड़ी हमारे पास आ रही है,  हम जिलों में भेज रहे है.

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108 एंबुलेंस सेवा के लिए अभी तक आधी ही बहाली

इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन के 700 बहाली होनी थी जिसमें अभी तक 384 , ड्राइवर कमर्शियल लाइसेंस ट्रांसपोर्ट लाइसेंस के साथ 700 में 384 लोग ही बहाल हुए हैं.  वहीं डिस्ट्रिक्ट मैनेजर के 30 पदों में से अभी तक 10 लोग को ही बहाल किया गया है,  सेल्स मैनेजर के दो,  मेंटेनेंस सुपरवाइजर के 30, एमबीबीएस डॉक्टर 5 और सीनियर एग्जीक्यूटिव के 5 पदों पर बहाली भी बाकी ही है. कुल मिलकर देखा जाए तो अभी तक आधे लोगों की ही नियुक्ति हो पायी है.

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किस तरह की है सुविधा 

108 एंबुलेंस सेवा दो श्रेणी में विभाजित की गयी है, एडवांस लाइफ सेव (ALS) और बेसिक लाइफ सेव (BLS). एएलएस तकनीक से लैस एंबुलेंस में वेंटीलेटर, शॉक मशीन, सेक्शन मशीन, सिरिंज मशीन, ऑक्सीजन, नीडल डिस्ट्रॉयर, मेडिकल किट के साथ एसी-डीसी करंट की व्यवस्था भी की गयी है. जबकि बीएलएस तकनीक में सेक्शन, नेब्युलाइज़र, फर्स्ट एड किट और ऑक्सीजन की व्यवस्था उपलब्ध है. इसके अलावा एंबुलेंस में जीपीएस और डीजल सेंसर भी लगाया जा रहा है. बाफना कंपनी (दिल्ली) और नटराज (अहमदाबाद) की कंपनी मिलकर एंबुलेंस में सभी उपकरण लगाने का काम कर रही है.

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