एक साल बाद मोदी सरकार मॉनसून सत्र में एक बार फिर पेश करेगी वेतन संहिता विधेयक

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 05/17/2018 - 19:15

New Delhi : केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार एक साल बाद एक बार फिर मॉनसून सत्र के दौरान वेतन संहिता विधेयक को संसद में पेश करने वाली है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विगत वर्ष 26 जुलाई को ही इस विधेयक की मंजूरी दे दी थी. इसके बाद पिछले साल के मॉनसून सत्र के दौरान इसे सदन में पेश किये जाने की बात कही गई थी. इसको लेकर श्रम मंत्री संतोष गंगवार का कहना है कि सरकार संसद के मॉनसून सत्र में वेतन संहिता विधेयक को पारित करने के लिए आगे बढ़ायेगी. इसके अलावा सरकार सामाजिक सुरक्षा विधेयक 2018 पर श्रम संहिता को भी संसद में विचार के लिए रखेगी. उन्होंने कहा कि श्रम पर स्थायी समिति ने वेतन पर संहिता से संबंधित अपनी रिपोर्ट को अंतिम स्वरूप दे दिया है. हम इस बिल को पास कराने के लिए अगले सत्र में आगे बढ़ायेंगे. उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता को अपने पोर्टल पर टिप्पणियों के लिए डाला है. हमारा प्रयास इस विधेयक को संसद के आगामी सत्र में पेश करने का है.

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विधेयक पारित होने से चार करोड़ से ज्यादा कर्मचारी होंगे लाभान्वित

ज्ञात हो कि केंद्रीय कैबिनेट ने विगत वर्ष 26 जुलाई को वेतन संहिता विधेयक को मंजूरी दे दी थी. इससे श्रम क्षेत्र से जुड़े चार कानूनों को एकजुट कर सभी क्षेत्रों के लिए न्यूनतम वेतन तय होने की संभावना है. इस विधेयक के पारित होने से देश के चार करोड़ से अधिक कर्मचारियों को लाभ मिलने की आशा जग सकती है. खबर ये भी है कि वेतन श्रम संहिता विधेयक में न्यूनतम वेतन कानून 1948, वेतन भुगतान कानून 1936, बोनस भुगतान कानून 1965, तथा समान पारितोषिक कानून 1976 को एकीकृत किया जा सकता है. इस विधेयक में केंद्र को देश में सभी क्षेत्रों के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारित करने का अधिकार देने की बात कही गयी है और राज्यों को उसे बनाये रखना होगा. सूत्रों के अनुसार, हालांकि, राज्य अपने क्षेत्र में केंद्र सरकार के मुकाबले अधिक न्यूनतम वेतन उपलब्ध करा सकेंगे.

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सभी कर्मचारियों पर लागू होगा नियम

गौरतलब है कि नया न्यूनतम वेतन नियम सभी कर्मचारियों पर लागू होगा, चाहे उनका वेतन अलग-अलग भी क्यों न हो. वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम वेतन उन कर्मचारियों पर लागू होता है, जिन्हें प्रति माह 18,000 रुपये तक वेतन मिलता हैं. इस विधेयक को आने वाले संसद के मानसून सत्र में पेश किये जाने की संभावना है.

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