न्यूरो-पीडियाट्रिक के चक्कर में बच्चे की चली गयी याददाश्त, न्यूज़ विंग की पहल के बाद रेफर हुआ मंथन

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 02/14/2018 - 20:18

 Ranchi : अपने पिता की गोद से लिपटे मासूम को यह याद नहीं कि वो किसकी गोद में है. न्यूरो और पीडियाट्रिक के चक्कर में बच्चे की याददाश्त चली गयी. धनबाद जिले के झरिया थाना क्षेत्र के रहने वाले धर्मेंद्र अपने बच्चे की हालत को देखकर भावुक हो जाते हैं. वर्षीय मंथन दिसंबर 2017 में इलाज के लिए रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग आया था. उसका इलाज डॉ सीबी सहाय की यूनिट में किया गया. वहां डॉक्टरों ने जांच करने के बाद मंथन को दवा लिखी. दवा खिलाने के बाद एक बार फिर रिम्स में जांच के लिए आने के लिया कहा गया.

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13 फरवरी को बच्चे को दिखाने रिम्स लेकर आये थे  माता-पिता

मंथन के पिता डॉक्टर के कहे अनुसार 13  फरवरी को एक बार फिर रिम्स लेकर आये. जहां एक बार फिर से बच्चे को पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट में डॉ अनिल कुमार की यूनिट में इलाज किया गया, लेकिन बच्चे की हालत में सुधार न होता देख पिता दूसरे अस्पताल रेफर करने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन रिम्स से मंथन को रेफर नहीं किया जा रहा था.

न्यूज विंग संवाददाता को जब बच्चे की हालत की जानकारी मिली, तब बच्चे के पिता को रिम्स उपाधीक्षक डॉ गोपाल श्रीवास्तव से मिलाया गया, जहां बच्चे के पिता ने उपाधीक्षक को अपनी आपबीती बतायी. उपाधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद मंथन को इलाज के लिए हाइर सेंटर रेफर किया गया.   

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छह तारीख को आया अटैक : शालिनी देवी

मंथन की मां शालिनी देवी ने कहा कि छह तारीख को बच्चे को अटैक आया. बच्चे की हालत देख एक बार फिर 13 तारीख को रिम्स में लेकर इलाज के लिए आए, लेकिन यहां पर डॉक्टर बच्चे को रेफर नहीं कर रहे थे. न्यूज विंग के हस्तक्षेप के बाद डॉ सीबी सहाय ने इलाज के लिए मंथन को रेफर किया.

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